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सामने आया रैगिंग का एक और खौफनाक सच

Fri, 05 Sep 2014 01:25 PM IST
Updated Fri, 05 Sep 2014 01:25 PM IST
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Ragged by seniors, polytechnic student ends life

20 सितंबर 2013 को अमर उजाला ने पॉलीटेक्निक में रैगिंग का खुलासा करके अफसरों को चेताया था लेकिन संस्थान के जिम्मेदारों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और एक निर्दोष की जान चली गई।

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राजकीय पालीटेक्निक में सीनियर्स की रैगिंग से प्रताड़ित होकर निजी हॉस्टल में आत्महत्या करने वाले हिमांशु विश्वकर्मा (22) के मामले में कल्यानपुर पुलिस ने भाई विनीत की तहरीर पर दो स्टूडेंट्स को नामजद करते हुए कई अज्ञात लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने (306 आईपीसी) की एफआईआर दर्ज की है।
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आईजी ने बताया कि रैगिंग की धारा भी बढ़ाई जाएगी। उधर मामले की जांच के लिए पालीटेक्निक के प्रधानाचार्य एफआर खान ने सात विभागाध्यक्षों की एक जांच कमेटी गठित कर दी है। यह कमेटी दो दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। वहीं प्राविधिक शिक्षा निदेशक ओपी वर्मा ने संयुक्त निदेशक (बुंदेलखंड क्षेत्र झांसी) सुरेंद्र प्रसाद और निदेशालय में तैनात अंबिका प्रसाद सिंह को मामले की जांच करने को कहा है।
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मैकेनिकल इंजीनियरिंग सेकेंड ईयर (ग्रुप के) के छात्र घाटमपुर निवासी हिमांशु विश्वकर्मा ने बुधवार को विनायकपुर स्थित प्राइवेट हॉस्टल के अपने कमरे में फांसी लगा ली थी। पुलिस ने गुरुवार को पॉलीटेक्निक छात्र करन और विजय के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की। सीओ कल्यानपुर अखिलेश सिंह, एसओ नवाबगंज मुकेश वर्मा और कल्यानपुर एसओ आलोक मणि त्रिपाठी ने हिमांशु के साथ पढ़ रहे कई छात्रों से पूछताछ की।

पुलिस ने रैगिंग संबंधित दस्तावेज जब्त कर लिए। एंटी रैगिंग कमेटी के सदस्यों और प्रधानाचार्य एफआर खान से भी पूछताछ की। साथी ने बताया कि एक सितंबर को हिमांशु अप्लाइड फिजिक्स की क्लास से हॉस्टल पहुंचा तो उसके गाल और कान के पास सूजन थी। पूछने पर हिमांशु ने बताया कि बाल बड़े हैं, इसलिए सीनियर्स ने बेरहमी से पीटा है।

रैगिंग का एक और मामला

Ragged by seniors, polytechnic student ends life

इस घटना से हिमांशु काफी आहत था। इस कारण दो सितंबर को पढ़ने नहीं गया और तीन सितंबर को उसकी मौत की सूचना मिली। पुलिस के साथ हिमांशु के भाई विनीत भी पॉलीटेक्निक पहुंचे। कहा कि यहां पर रैगिंग की शिकायतों को गंभीरता से नहीं सुना जाता है।

पॉलीटेक्निक प्रशासन ने प्राविधिक शिक्षा निदेशालय की जांच टीम को सौंपी अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा है कि आत्महत्या करने वाले हिमांशु विश्वकर्मा 25 अगस्त के बाद से पढ़ने नहीं आए थे जबकि पुलिस को हिमांशु के साथियों ने बयान दिया है कि हिमांशु ने एक सितंबर को भी क्लास ली थी। उसकी अटेंडेंस भी दर्ज है।


जिस दिन हिमांशु को सीनियर्स ने पीटा था, उसी दिन मैकेनिकल इंजीनियरिंग सेकेंड ईयर के छात्र अजय पाल की धुनाई हुई थी। वह भी हिमांशु के ही हॉस्टल में रहता है। पुलिस को मिली जानकारी के अनुसार सीनियर्स ने पहले अजय पाल को पीटा, फिर हिमांशु को निशाना बनाया। इस संबंध में दोनों ने बातचीत भी की थी।

पूरे साल चलती है

Ragged by seniors, polytechnic student ends life

कानपुर में मेकेनिकल इंजीनियरिंग के स्टूडेंट हिमांशु शुक्ला की आत्महत्या के बाद गुरुवार को राजकीय पालीटेक्निक परिसर में जांच-पड़ताल करने पहुंचे कल्याणपुर सीओ अखिलेश सिंह का रैगिंग के भयानक सच से सामना हुआ। सीओ कल्याणपुर ने जो जांच की, उसमें पाया कि फर्स्ट ईयर में एडमिशन लेने वाले ज्यादातर स्टूडेंट्स के बाल छोटे-छोटे हैं।

किसी ने बेल्ट नहीं लगाया है। सभी फारमल पैंट-शर्ट पहनकर आए हैं। इसपर कुछ स्टूडेंट्स के बयान दर्ज किए गए। स्टूडेंट्स ने सीओ को बताया कि रैगिंग पूरे साल चलती है। सीनियर्स रोजाना रात में 11 से 2 बजे के बीच जूनियर्स के विश्वेसरैया, भटनागर, बोस हॉस्टल में आते हैं।

कपड़े उतरवाकर जूनियर्स को लॉबी या गली में दौड़ाते हैं। 90 डिग्री पर झुकाकर सलामी दगवाते हैं। गाली-गलौज भी कराते हैं। कहते हैं कि सीनियर्स जहां मिलें, उन्हें सलाम करें। अब इन मामलों को लेकर पुलिस ने कार्रवाई का फैसला किया है।

गौरतलब है कि अमर उजाला ने पिछले साल रैंगिंग का लाइव प्रकाशित किया था कि किस तरह पालीटेक्निक हॉस्टल्स में रैगिंग चलती है। हॉस्टल प्रशासन वैसे मूकदर्शक बना रहा। प्रशासनिक अधिकारी भी हरकत में नहीं आए, वरना सख्त कार्रवाई हो गई होती तो हिमांशु को जान न गंवानी पड़ती। खैर, अब भी प्रभावी कार्रवाई हो जाए तो फ्रेशर्स को काफी राहत मिलेगी।

‘रात में कपड़े उतरवाकर दौड़ाते हैं सीनियर्स’

Ragged by seniors, polytechnic student ends life

पालीटेक्निक प्रशासन के तमाम दावों के विपरीत राजकीय पालीटेक्निक के तमाम कोर्स में एडमिशन लेने वाले 500 से ज्यादा स्टूडेंट्स को रैगिंग का खौफ है। इन स्टूडेंट्स को सीनियर्स ने बाल भुर-भुरा (एकदम छोटे-छोटे, जो कि कंघी के पकड़ में न आए) कराके क्लास लेने की हिदायत दी है।

सीनियर्स ने कहा है कि कोई भी स्टूडेंट जींस-टीशर्ट पहनकर नहीं आएगा। सभी फारमल पैंट-शर्ट पहनेंगे। शर्ट को बांह तक चढ़ाकर नहीं आएंगे। फर्स्ट ईयर या इंटरमीडिएट के बाद सेकेंड ईयर में लेटरल इंट्री पाने वाले किसी स्टूडेंट्स को बेल्ट लगाने की इजाजत भी नहीं है।

स्टूडेंट्स ने सीओ को बताया कि हॉस्टल से निकलते और उसमें इंट्री मारते समय 180 डिग्री पर झुककर सलामी देनी होती है। इसकी जानकारी प्रिंसिपल, एंटी रैगिंग कमेटी के सदस्यों को भी है लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।

तमाम स्टूडेंट्स ऐसे हैं, जिन्होंने रैगिंग करने वाले सीनियर्स की शिकायत की है। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में सीओ कल्याणपुर ने प्रिंसिपल एफआर खान और एंटी रैगिंग कमेटी के सदस्य अनूप पटेल, पीयूष, एके मिश्रा और प्रमतेश से भी पूछताछ की। इन सभी से पूछा कि ज्यादातर स्टूडेंट्स के बाल छोटे-छोटे कैसे हैं, इसका जवाब संबंधित लोग नहीं दे सके।

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