फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Crime Archives ›   policemen hand over girl to accused in up

दरोगा ने आरोपी से किया किशोरी का सौदा

Thu, 26 Jun 2014 09:54 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ Updated Thu, 26 Jun 2014 09:54 AM IST
विज्ञापन
policemen hand over girl to accused in up

यूपी के मेरठ में किशोरी को बहला फुसलाकर अपहरण करने वाले आरोपी से ही पुलिस ने किशोरी का सौदा कर डाला। झांसी से दोनों की बरामदगी के बाद भी किशोरी को आरोपी के हवाले कर दिया गया। इतना ही नहीं पुलिस ने दबिश देने के लिए गरीब बाप से 15 हजार रुपये भी लिए। सीबीसीआईडी की विवेचना में इसका खुलासा हुआ है।

विज्ञापन


जिले के सूरजकुंड रोड निवासी एक व्यक्ति ने 15 जनवरी 2013 को थाना सिविल लाइन में अपनी पुत्री के अपहरण की तहरीर दी थी। युवक का आरोप है कि पड़ोस में ही रहने वाला एक आटो चालक उसकी नाबालिग पुत्री को बहला फुसलाकर ले गया।
विज्ञापन


काफी दिनों तक थाने के चक्कर काटने के बाद तत्कालीन डीआईजी के निर्देश पर एक फरवरी 2013 को आरोपी रूप सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया गया।

पुलिस ने मदद के बजाय किया शोषण

policemen hand over girl to accused in up

किशोरी और आरोपी के झांसी में होने की सूचना पर दरोगा ने किशोरी के पिता और एक सिपाही के साथ दबिश दी। आरोप है कि मिलने के बावजूद किशोरी को आरोपी के ही सुपुर्द कर दिया गया।

सीबीसीआईडी के विवेचक अशोक कुमार ने बुधवार को बताया कि किशोरी का परिवार काफी गरीब है। इसलिए पुलिस ने उसकी कोई मदद नहीं की और उल्टा शोषण किया। बयानों में सामने आया है कि सिविल लाइन पुलिस जब झांसी के थाना मऊ रानीपुर क्षेत्र में किशोरी को बरामद करने गई थी तो थाने से भी दो सिपाही साथ गए थे।

थाने के मुंशी और सिपाहियों का भी कहना है कि किशोरी बरामद हो गई थी, लेकिन उसका दाखिला नहीं किया गया। किशोरी के पिता का आरोप है कि पुलिस ने उसकी बेटी का आरोपी से सौदा कर लिया।

पीड़ित के पिता से पुलिस ने लिए 15000 रुपए

policemen hand over girl to accused in up

वहीं, दरोगा का कहना है कि किशोरी तो बरामद ही नहीं हुई थी तो आरोप कैसे। पीड़ित के पिता ने बताया कि झांसी में दबिश के नाम पर पुलिस ने उनसे 15 हजार रुपये मांगे थे। उन्होंने कर्ज लेकर पुलिस को 15 हजार रुपये दिए थे।

सीबीसीआईडी के सामने परेशानी
करीब डेढ़ साल बाद भी किशोरी का सुराग नहीं लगा है। आरोपी की मां एक रिटायर सरकारी अफसर के घर बर्तन मांजती थी। इसलिए परिवार वहां मुफ्त में रहता था। आरोपी के नाम और फोटो के अलावा अन्य कोई जानकारी नहीं मिली।

झांसी में तथाकथित रिश्तेदारी होने के चलते ही पुलिस वहां गई थी। हालांकि विवेचक का कहना है कि आरोपी पूर्व में भी एक किशोरी को अपहरण कर मुंबई ले जा चुका है। अंदेशा है कि किशोरी भी कहीं मुंबई में गलत हाथों में न चली गई हो।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed