प्रेगनेंट हुई तो पति ने बिठाया कोठे पर
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जिस व्यक्ति के साथ उसने सात फेरे लिए थे, साथ जीने-मरने की कसम खाई थी, उसी ने उसे गर्भवती होने के बाद कोठे पर बेच डाला। मोहब्बत की नगरी आगरा में एक ऐसा ही मामला सामने आया है।
जानकारी के मुताबिक, एक एनजीओ ने पुलिस की मदद से आगरा के एक कोठे पर छापा मारकर एक विवाहिता समेत तीन युवतियों को मुक्त करवाया, जिनकी उम्र 18 से 20 साल है।
इनमें से दो लड़कियां गर्भवती हैं, जिन्हें नौकरी का लालच देकर यहां लाया गया था। कोठा संचालिका पुष्पा मौके से फरार हो गई। इस रैकेट से जुड़े नेपाल के रहने वाले प्रेम तमांग नाम के शख्स को गिरफ्तार किया गया है। जबकि दोनों युवतियों में एक असम और दो बंगाल की हैं।
ताजमहल दिखाने के बहाने लाया था आगरा
रेड लाइट एरिया से मुक्त कराइ गई गर्भवती महिला ने बताया कि दस दिन पहले उसका पति ताजमहल दिखाने के बहाने उसे आगरा लाया था। दो दिन आगरा में घूमने-फिरने के बाद महिला के पति ने कहा कि उसके पास पैसे खत्म हो गए है।
उसने कहा कि उसे कुछ दिन परिचित के पास रहना होगा और पैसों का इंतजाम होते ही वह उसे यहां से ले जाएगा। पति के जाने के दो दिन बाद महिला को पता चला कि उसे कोठे पर बेच दिया गया है।
लड़कियों का कहना था कि उनसे जबरन वेश्यावृत्ति कराई जाती थी। विरोध करने पर पीटा जाता था। पुलिस ने कोठा संचालिका के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।
जबरन कराया जाता था देह व्यापार
दिल्ली की एनजीओ रेस्क्यू फाउंडेशन के जांच अधिकारी संतोष को जानकारी मिली कि आगरा में चार किशोरियों से देह व्यापार कराया जा रहा है। इस पर संतोष एनजीओ की काउंसलर शैलुजा के साथ आगरा आए और एसएसपी से मुलाकात की।
उनकी शिकायत पर गुरुवार को छत्ता थाना प्रभारी निरीक्षक ने मय फोर्स के कश्मीरी बाजार स्थित पुष्पा के कमरे पर छापा मारा। कमरा बाहर से बंद था। लेकिन अंदर किसी के होने की आवाज आ रही थी।
इस पर पुलिस सीढ़ी के सहारे पहली मंजिल पर चढ़ी। दरवाजा तोड़ कर जांच की तो वहां एक गुप्त रास्ता दिखा जो तहखाने तक जा रहा था। इसके अंदर तीन किशोरियों मिलीं। केयरटेकर प्रेम बहादुर ने बताया कि पुलिस के आने की सूचना पर पुष्पा मौके से फरार हो गई।
पति ने ही दिया धोखा
एक किशोरी का कहना था कि उसको पति ने ही धोखा दिया। एक तो कम उम्र में शादी की, उसके बाद पति ने ही उसे यहां बेच दिया। इसकी जानकारी उसे दो दिन बाद मिली, जब वह लौटा नहीं। पति पुष्पा को अपना रिश्तेदार बताता था।
रेड लाइट एरिया से मुक्त तीन किशोरियों में से एक असम की और दो पश्चिम बंगाल की हैं। असम की किशोरी तो एक माह से वहां है। जबकि पश्चिम बंगाली की किशोरियों को दस और 12 दिन ही हुए हैं।
उन्होंने बताया कि उनको पश्चिम बंगाल से नौकरी का झांसा देकर लाया गया था। उनको यह भी नहीं मालूम था कि वह आगरा में बंधक हैं।
दिल्ली की जगह आगरा बनी मंडी
एनजीओ रेस्क्यू फाउंडेशन के जांच अधिकारी संतोष ने बताया कि यह पहली बार जानकारी में आया जब किसी किशोरी को सीधे आगरा में बेचा गया हो।
इससे पहले दलाल किशोरियों को दिल्ली में बेचते थे। वहां से वह आसपास के जिलों में बेची जाती थीं। उन्होंने बताया कि देह व्यापार की आगरा दूसरी बड़ी मंडी बनती जा रही है।