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युवती से चक्कर चला दरोगा ने पहले की शादी, फिर मर्डर

Sat, 23 May 2015 04:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 23 May 2015 04:30 PM IST
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police inspector of up gyanendra singh murdered his wife

यूपी के प्रतापगढ़ में तैनात दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह की पत्नी ईशा की सिर काटकर हत्या कर दी गई है। 19 मई को कौशांबी के महेवाघाट थाने से 50 मीटर दूर ईशा का निर्वस्त्र शव मिला, अभी तक सिर का पता नहीं चला है। शुक्रवार को ईशा के परिजनों ने कौशांबी पहुंचकर शव की शिनाख्त की। पोस्टमार्टम के बाद दोपहर को शव परिजनों को सौंप दिया गया।

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ईशा की मां विनीता ने तीन दिन पहले काकादेव थाने में दरोगा ज्ञानेंद्र के खिलाफ पहली शादी छिपाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। ईशा चार दिन पहले ज्ञानेंद्र के साथ गई थी, तब से उसका कोई अता-पता नहीं था। काकादेव एसओ के मुताबिक आरोपी दरोगा लाइन हाजिर चल रहे हैं।
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एसपी कौशांबी रतनकांत पांडेय ने फोन पर बताया कि मामला महेवाघाट और काकादेव थाने में दर्ज है। तफ्तीश के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक बलिकरन सिंह यादव ने पत्नी की हत्या के आरोप में दरोगा ज्ञानेंद्र को सस्पेंड कर दिया है।
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ईशा (30) नवीन नगर काकादेव निवासी विनीता सचान की बेटी थी। विनीता ने बताया कि चित्रकूट जिले के छिविलहा गांव निवासी ज्ञानेंद्र सिंह शहर के कई थानों में बतौर थानाध्यक्ष और एसएसआई तैनात रह चुके हैं।

शादीशुदा दरोगा ने डाले ‌थे ईशा पर डोरे

police inspector of up gyanendra singh murdered his wife

शहर में तैनाती के दौरान दारोगा ज्ञानेंद्र सिंह उनके परिवार के संपर्क में आए। शादी का भरोसा देकर बेटी ईशा से मेलजोल बढ़ाई। वर्ष 2013 में ज्ञानेंद्र कानपुर देहात के मूसानगर  थानाध्यक्ष बने। फिर 10 मार्च 2013 को ईशा से शादी कर ली। इसके बाद दोनों साथ रहने लगे, दोनों के एक बेटी भी हुई।

बाद में ईशा को पता चला कि ज्ञानेंद्र सिंह पहले से शादीशुदा हैं और उनकी पहली पत्नी नीलम है, जो मध्यप्रदेश के सतना के बछरावा की रहने वाली है। शादी की जानकारी होने पर दोनों में झगड़े बढ़े तो करीब 24 दिन पहले ईशा मायके नवीन नगर आ गईं और परिजनों को पूरी जानकारी दी।

मामला पुलिस में पहुंचने के डर से ज्ञानेंद्र सिंह ने 17 मई को ईशा के मायके पहुंचकर समझौता कर लिया था। इसके बाद 18 मई को ज्ञानेंद्र कूष्मांडा देवी मंदिर जाने की बात कहकर कार से ईशा को ले गए थे। तब से दोनों का पता नहीं है। इसकी शिकायत विनीता ने काकादेव थाने में की, पर मामला विभाग से जुड़ा होने की वजह से रिपोर्ट नहीं लिखी गई।

विनीता ने आईजी आशुतोष पांडेय से लेकर एसएसपी शलभ माथुर तक शिकायत दर्ज कराई। तब 19 मई को काकादेव पुलिस ने दारोगा ज्ञानेंद्र के खिलाफ पहली शादी छिपाने का मामला दर्ज किया था। लेकिन तब भी ईशा के गुम होने की शिकायत दर्ज नहीं की गई। ईशा के लापता होने के बाद परिवार के लोग उसकी तलाश में जुटे थे।

कई दिन से ड्यूटी में नहीं था ये शातिर है दरोगा

police inspector of up gyanendra singh murdered his wife

जानकारों की मानें तो हत्यारे ने ईशा का धड़ महेवाघाट क्षेत्र में फेंका और सिर दूसरी जगह फेंका। हत्यारे का इरादा था कि पुख्ता तरीके से शव की शिनाख्त नहीं होने पर इसका लाभ उसे मिल जाएगा।

पुलिस की मानें तो सिर कहां फेंका गया इसका पता चलना बाकी है। आरोपी दारोगा के गिरफ्त में आने के बाद ही ईशा के सिर के बारे में पचा चल सकेगा।

डीएनए जांच को भेजे गए ईशा के नाखून
परिजनों की शिनाख्त के बाद भी पुलिस कानूनी दांवपेच से बचने के लिए ईशा का डीएनए जांच कराएगी। इसके लिए पोस्टमार्टम के दौरान शव के नाखून और ब्लड के सैंपल सुरक्षित रख लिए गए हैं। इसे जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा जाएगा।

उधर प्रतापगढ़ जिले के संवाददाता के मुताबिक आरोपी दरोगा की तलाश में प्रतापगढ़ पुलिस भी लगी है। आसपुर देवसरा थाने से लाइन हाजिर होने के बाद दरोगा ज्ञानेंद्र सिंह पुलिस लाइन में था और क्यूआरटी ड्यूटी कर रहा था। 14 मई से वह गैरहाजिर है। कानपुर पुलिस ने एसपी से दरोगा की गिरफ्तारी में सहयोग मांगा है। जिले की पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

अमर उजाला के जरिए शव की हुई शिनाख्त

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ब्रिटेन में बैठे ईशा के एक रिश्तेदार ने इंटरनेट पर अमर उजाला समाचार पत्र पढ़ा। समाचार पत्र में कौशांबी के महेवाघाट क्षेत्र में एक अनजान महिला का शव मिला, समाचार प्रकाशित हुआ था। बस यही ईशा की पहचान का माध्यम बन गया। इसी के सहारे परिवार के लोग महेवाघाट थाने पहुंच गए। ईशा को अखिरी बार परिवार वालों के कंधे के सहारा मिल गया।

ईशा के बहनोई मनोज सिंह ब्रिटेन में रहते हैं। परिवार के लोगों ने ईशा के लापता होने की खबर 19 मई को मोबाइल के जरिए मनोज को दी। मनोज ने किसी तरह से महेवा एसओ का नंबर लिया और उनसे बातचीत करके महिला के शव की कद-काठी पूछी।

इस दौरान मनोज को पता चला कि महिला के हाथ में घड़ी है, वैसी ही घड़ी उन्होंने ईशा को गिफ्ट की थी। इसके बाद मनोज ने ईशा की मां विनीता और भाई एश्वर्य राज को शव की पहचान के लिए महेवा घाट भेजा था। विनीता ने पूरा वाकया काकादेव एसओ को बताया। इसके बाद सभी महेवाघाट थाने पहुंचे।

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