बदायूं: जहां गैंगरेप हुआ, उस गांव का सच
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ये सच है कि बदायूं के कटरा सआदतगंज में दो लड़कियों के साथ बलात्कार हुआ और यह भी सच है कि उन्हें फांसी पर लटकाया गया लेकिन नामजद लोगों के साथ उन्हें देखे जाने के बाद उन्हें कहां ले जाया गया, ले जाने वाले चार थे या पांच, उन्हें मारने की नौबत क्यों आयी और किस तरह और कब पेड़ से लटकाया गया आदि बहुत से सवाल हैं जिनका जवाब नहीं मिल रहा है। कहानी की शुरुआत पता है अंत भी पता है लेकिन बीच का हिस्सा बिल्कुल गायब है।
चश्मदीद बयान देते हुए लड़खड़ा रहे हैं और आरोपी अपना गुनाह कबूल करने को तैयार नहीं है। ऐसे में साक्ष्य जुटा पाना सीबीआई के लिए भी आसान नहीं होगा। जिन लोगों को नामजद किया गया है वे दबंग हैं। गंगापार उनकी खेती है और यहां मकान बना कर रहते हैं। गांव वाले कह रहे हैं कि लड़के तमंचे लगाकर चलते हैं चौकी में बैठते हैं वहीं शराब पीते हैं और गांव वालों को दबाने के लिए कोई भी हरकत कर सकते हैं। आरोपी परिवार का जो मिजाज बताया जा रहा है उससे तो लगता है कि कटरी में कल्लू डकैत के नए अवतार पैदा हो गए हैं।
कल्लू ही नहीं एक दर्जन नाम हैं जिन्होंने अपना खौफ फैला कर यहां राज किया। ये अलग बात है कि वे घोषित डकैत थे और छिप कर रहते थे लेकिन अय्याशी वे भी करते थे। मारी गई लड़कियों के मां बाप ही नहीं गांव के दूसरे लोग भी कह रहे हैं कि जिस तरह ये मामला उछला है उससे तो आगे के लिए और खतरा बढ़ गया है। कल जब मीडिया चला जाएगा और इस तरह फोर्स भी यहां नहीं रहेगी तो हमारा क्या होगा।
'मैं भी इसी तरह पेड़ से लटकी मिलती'
बात यादवों की नहीं है। गांव में और भी यादव हैं जो सबके साथ मिल कर रहते हैं लेकिन ये भी सच है कि दबंगई करने वाले ज्यादातर यादव ही हैं। इसीलिए पीड़ित परिवार के आंगन में हो रहे सवाल जवाबों में यादव और सरकार निशाने पर आ जाती है।
गांव की महिलाएं बार-बार कहती हैं उनकी सरकार उनकी पुलिस ऐसा करती है। लड़की के पिता के पास आकर रामपाल शाक्य की पत्नी ने बताया पिछले साल दो लोगों ने मेरे साथ जबरदस्ती की। हाथों के निशान दिखाकर बोली ये घाव तब के ही हैं। गांव वाले न आते तो मैं भी इसी तरह पेड़ पर लटकी मिलती। पुलिस के पास भी नहीं गए। क्या करते पुलिस तो जात पूछ कर बात करती है। बाग में मिले महेश ने भी अपने अनुभव सुनाए। बोले हम तो सिर नीचा करके रहते हैं। ये लोग खेतों में महिलाओं को दबोचने पहुंच जाते हैं।
कई महिलाएं अपने घर तक में शिकायत नहीं कर पाती और जो बताती भी हैं उनके घर के लोग कुछ नहीं कर पाते। ये किस्सा सिर्फ इसी गांव का नहीं है आसपास के कई गांवों के लोग इसी तरह की शिकायत करते हैं।
निर्दोष को फंसाकर हमदर्द बनने आया हत्यारा
एक दंबग ने किसी की भैंस खोल दी थी, उसे गिरफ्तार किया गया तो उसने शिकायत करने वाले के सात साल के बेटे को बेरहमी से मार डाला। हत्यारा उस परिवार का हमदर्द बन कर पहुंचा और एक निर्दोष को हत्या में फंसा दिया। बच्चे के पिता को जब सच का पता चला तो उसने किसी तरह निर्दोष को तो छुड़वाया दिया लेकिन दोषी को सजा नहीं दिला पाया।
शोक के इस मजमे में कई लोग सिर्फ इसलिए आए हैं कि ये बता सकें कि वे भी खौफ में हैं। बड़ी संख्या में यहां आ रहे राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के लोग पीड़ित परिवार के ढांढस बंधाने के साथ न्याय की लड़ाई में अंत तक साथ रहने का पूरा भरोसा दिला रहे हैं लेकिन कत्ल हुई बच्चियों के परिवार वालों को इससे कोई दिलासा नहीं मिल रहा। आरोपी के परिवार वाले घर छोड़कर भागे हुए हैं तो उनके पड़ोसी सहमे हुए हैं।
पुलिस, मीडिया के जाने के बाद क्या होगा?
घटना की शिकार चचेरी बहनों में से बड़ी की मां अपने घर में शोकाकुल और सुबकती महिलाओं से अलग हटकर दोपहर में गत 27 मई से ही ठंडे पड़े चूल्हे और औंधे पड़े खाली जूठे बर्तनों के पास चेहरे पर घूंघट डाले निढाल पड़ी थी। उदास स्वर में बोली यह भीड़ आज नहीं तो कल छंट जाएगी। उसके बाद गांव में रहना मुश्किल होगा और गांव छोड़ना ही सही रहेगा। उसके पति ने भी यही बात कही तो घटना की शिकार छोटी लड़की की विवाहिता बहन ने कहा कि दबंग लोगों का भरोसा नहीं, सरकार भी उन्हीं की है और पुलिस भी, बहुत डर लग रहा है।
आरोपी पप्पू यादव के सामने रहने वाले बिजेंद्र यादव मड़ई में रहते हैं। उनकी पत्नी घटना के बाद मायके चली गई है। पूछने पर हाथ जोड़ लिया और कहा कि कुछ नहीं देखा और कुछ नहीं जानते। आरोपी के पड़ोस का मकान में गंगा पार से आकर बसे नेपाल सिंह यादव तैनात पुलिस वालों के साथ बैठे थे। चेहरे पर खौफ था, पूछते ही उनके होंठ कांप गए। बताया कि सायं सात बजे के बाद घटना वाली रात को क्या हुआ उन्हें या उनके परिवार के किसी सदस्य को कुछ नहीं पता क्योंकि सात बजने तक सभी घर के भीतर हो जाते हैं। चौकी के पास रहने वाले एक दबंग ने कहा कि मीडिया वाले हटे नहीं कि पुलिस वाले भी छंट जाएंगे। फिर तो यहां बदले की भावना से कौन किस पर टूटे कुछ पता नहीं।
इस चौकी से क्या सुरक्षा होगी!
कटरा सआदतगंज की पुलिस चौकी ही इतनी ज्यादा खस्ताहाल है कि इसमें कोई पुलिस वाला रह ही नहीं सकता। दीवारों पर धारों और छत पर जमे हुए पानी के रिसने के निशान है। इससे पूरी चौकी टपकती हुई दिखती है तो कार्यालयनुमा बरामदा और बैरक की छतें बीच से उखड़कर एकदम खाली हो गई हैं और बचे हिस्से भी अबकी बारिश में दरकने को तैयार हैं। इसमें तैनात रहे पुलिस वालों का हाल भी ऐसा ही बताया जाता है।
फटकने के लिए महकमे ने उन्हें एक डंडा तक नहीं दे रखा था। अब दो रायफल जरूर हैं जो सोमवार को ही सिपाही मुख्यालय से लेकर पहुंचे हैं। पूरा नजारा साफ बताता है कि यहां पुलिस वाले खुद ही सुरक्षित नहीं थे तो गांव वालों की सुरक्षा क्या करते। उन्हें सुरक्षित रहने के लिए गांव के दबंगों की रहनुमाई चाहिए थी और गांव में जो घटना घटी, उसने भी यही जाहिर किया।
दबंगों की शरण में पुलिसवाले
गांव वाले, पुलिस के मुहंलगे कहे जाने वाले दबंग और खुद पुलिस वाले दबी जुबान में गांव का जो हाल बताते हैं, उससे पता चलता है कि चौकी में पहले तैनात रहे पुलिस वालों ने न सिर्फ दबंगों की शरण ली हुई थी बल्कि उनसे इतने घुल-मिल गए थे कि दबंग अपने वैध-अवैध असलहे लेकर चौकी में चले आते थे जिन्हें मेज या खाट पर खुला रख दिया जाता था।
दबे-कुचले या आम लोग ऐसे में यहां अपनी फरियाद लेकर आने में हिचकिचाते थे। कई बार उनकी फरियादों पर सुनवाई तक दबंगों के यहां होती थी। दबंगों की मर्जी, वे चाहें तो तहरीर सुनी जाए या फरियादी को दुत्कार कर भगा दिया जाए। चौकी में तैनात पुलिस वाले अपने इन रहनुमाओं के आगे किसी की नहीं सुनते थे। अक्सर शाम को दबंगों के खाने-पीने का इंतजाम भी चौकी में होता था।