फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Crime Archives ›   Noida Nithari Murder Case, full story

पढ़ें, निठारी के नरपिशाच की पूरी कहानी

Fri, 05 Sep 2014 04:06 PM IST
Updated Fri, 05 Sep 2014 04:06 PM IST
विज्ञापन
 Noida Nithari Murder Case, full story

देश का दहला देने वाला सबसे सनसनीखेज निठारी हत्याकांड अब भी आपके दिलो दिमाग में याद होगा। दिसंबर 2006 में हुए इस कांड के खुलासे ने लोगों को हिला कर रख दिया था।

विज्ञापन


यह एक ऐसा कांड था, जिसके खुलते ही देश भर में हलचल मच गई थी। आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा की मांग देश के कोने-कोने से उठी। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई ने शुरू की थी।
विज्ञापन


निठारी कांड के 11 जनवरी 2007 को सीबीआई ने पूरा केस अपने हाथ में ले लिया। 28 फरवरी और 01 मार्च 2007 को निठारी के नरपिशाच सुरेंद्र कोली ने दिल्ली में एसीएमएम के यहां अपने इकबालिया बयान दर्ज कराए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


आज करीब पौने आठ साल बाद निठारी कांड एक बार फिर चर्चाओं में है। अंततः नरपिशाच सुरेंदर कोली के खिलाफ गाजियाबाद की सेशन कोर्ट ने मौत का परवाना जारी कर दिया है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को कोली का डेथ वारंट भेजकर इसे लागू कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

एडीजी जेल राजीव भटनागर का कहना है कि डेथ वारंट गाजियाबाद जेल पहुंच चुका है जिसमें सात से 12 सितंबर के बीच कोली को फांसी देने की बात कही गई है। एडीजी जेल ने बताया कि जेल प्रशासन ने कोली को फांसी देने के लिए तैयारियां पूरी कर ली है।

17 बच्चों को बनाया था अपना शिकार

 Noida Nithari Murder Case, full story

गाजियाबाद की सीबीआई विशेष कोर्ट द्वारा आरोपी सुरेंद्र कोली का डेथ वारंट जारी किए जाने के साथ ही उसकी फांसी के लिए जेल और जल्लाद की तलाश शुरू कर दी गई है। इस कांड के आरोपी मोनिंदर सिंह पंधेर और सुरेंद्र कोली फिलहाल गाजियाबाद की डासना जेल में बंद हैं।

आइए, एक बार फिर हम चलते है राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा के सेक्टर-31 के पास स्थित उस छोटे से गांव निठारी में, जहां मासूम बच्चों की चीख-पुकार और आंखों में एक खौफनाक दृश्य अभी भी उभरता हुआ दिख रहा है।

करोड़पति मोनिंदर सिंह पंधेर के उस खूनी कोठी नंबर डी-5 को भला कौन भूल सकता है। कौन भूल सकता है कि इसी कोठी में इंसान के रूप में मौजूद भेड़ियों ने एक दो नहीं बल्कि 17 बच्चों को अपना शिकार बनाकर इसी कोठी में उन्हें दफन कर दिया था।

इस कोठी में रहने वाले नरपिशाचों ने बड़ें ही शातिर ढ़ग से गांव के भोले-भाले मासूम बच्चों को किसी न किसी बहाने अपने पास बुलाते थे। इसके बाद उनके साथ हैवानियत की हदें पार कर उनकी हत्या करने के बाद लाश के टुकड़े-टुकड़े कर नाले में बहा देते हैं।

शव के टुकड़े कर पकाया, खाया

 Noida Nithari Murder Case, full story

क्या-क्या नहीं किया इस कोठी को मालिक और उसके नौकर सुरेंद्र कोली ने। मासूम बच्चों को अपनी कोठी में ले जाकर उसके साथ कुकर्म उसके बाद उनका गला घोंटकर हत्या। इतने से भी मन नहीं भरा तो उसके शव के छोटे-छोटे टुकड़े कर कुछ पकाकर खाए तो कुछ हिस्से को कोठी के पीछे नाले में बहा दिया।

यह खौफनाक सिलसिला करीब डेढ़ साल से ज्यादा समय तक चला। लेकिन किसी की नजर इस कोठी पर नहीं पड़ी। हां, इतना जरूर हुआ कि कोठी के पास स्थित पानी की एक टंकी के आसपास से बच्चों को गायब होने का शक जरूर हुआ।

हालांकि गांव वालों ने तो यहां तक मान लिया कि जरूर पानी टंकी के पास कोई भूत रहता है जो बच्चों को निगल जाता है। लेकिन दिसंबर 2006 में एक लापता लड़की के बारे में जांच के दौरान जब यह पता चला कि उसकी हत्या कोली ने की है तो पुलिस ने मामले को गहराई से जांचना शुरू किया।

फिर क्या था...एक के बाद मामले खुलते गए और जांच दल को बड़े पैमाने पर बच्चों की नृशंस हत्याओं के बारे में पता चला। कोली जिस मकान में घरेलू नौकर की तरह काम करता था, उसके समीप के एक नाले से बच्चों के कंकाल बरामद हुए थे।

16 मामलों में से पांच में मिली है मृत्युदंड

 Noida Nithari Murder Case, full story

कोली को रिम्पा हलदर नामक एक लड़की की 2005 में हत्या के जुर्म में निचली अदालत ने मृत्यु दंड सुनाया था जिसकी पुष्टि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कर दी थी। बाद में उच्चतम न्यायालय ने 15 फरवरी 2011 को इस फैसले पर अपनी मुहर लगाई।

कोली को सिलसिलेवार हत्यारा करार देते हुए अदालत ने कहा था कि उसके प्रति कोई दया नहीं दिखाई जानी चाहिए। कोली के खिलाफ कुल 16 मामले दर्ज किए गए। उसके नियोक्ता मोनिन्दर सिंह पंढेर को भी रिम्पा हलदर मामले में मृत्युदंड सुनाया गया था, लेकिन इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उसे बरी कर दिया।

कोली के खिलाफ दर्ज 16 मामलों में से पांच में उसे मृत्युदंड सुनाया गया है जबकि शेष अभी विचाराधीन हैं। इसमें 13 फरवरी 2009 को सीबीआई विशेष न्यायाधीश रमा जैन ने सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर को फांसी की सजा सुनाई थी। कालांतर में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंधेर को बरी कर दिया। जबकि सुरेंद्र की सजा बरकरार रखी। सुप्रीम कोर्ट ने भी सुरेंद्र कोली की सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अपील को खारिज कर दिया।

जब तक इसकी मौत ना हो जाए तब तक लटकाओ

 Noida Nithari Murder Case, full story

वहीं, आरती मर्डर केस में 12 मई 2010 को इस मामले में सीर्बीआई विशेष न्यायाधीश डा. एके सिंह ने आरोपी सुरेंद्र कोली को दोषी मानते हुए उसे फांसी की सजा सुनाई। यह सजा कनफर्मेशन के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेंडिंग है।

जबकि दीपाली मर्डर केस में 12 दिसंबर 2010 को सीबीआई कोर्ट ने दीपाली मर्डर के लिए सुरेंद्र कोली को दोषी माना और फांसी की सजा सुनाई। वहीं 28 सितंबर 2010 को रचना लाल मर्डर केस में सीबीआई विशेष न्यायाधीश डा. एके सिंह ने सुरेंद्र कोली को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई।

24 दिसंबर 2012 को सीबीआई विशेष न्यायाधीश एस. लाल ने आरोपी सुरेंद्र कोली को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। फैसले में न्यायाधीश ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि ‘अभियुक्त के मन में हमेशा यही भावना बनी रहती है कि किसको मारूं, काटूं व खाऊं। अभियुक्त इन परिस्थितियों में समाज के लिए खतरा बन चुका है।

उसके सुधार और पुनर्वास की संभावनाएं भी नहीं हैं। मृतका की आत्मा को तभी शांति मिल सकती है, जब अभियुक्त को मृत्यु दंड से ही दंडित किया जाए। अभियुक्त को गर्दन में फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए, जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए।

VEDIO में देखें, निठारी कांड का सच

 Noida Nithari Murder Case, full story

बेरहमी की सारी हदें लांघ कर की गई इस वारदात के खुलासे ने लोगों का दिल दहला कर रख दिया था।



यह वीडियो फॉक्स क्राइम से ‌लिया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed