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नामी फिल्म के सेट पर स्पाटबॉय बन पुलिस से छिप रहा था हत्यारा

Thu, 22 Oct 2015 08:34 AM IST
Updated Thu, 22 Oct 2015 08:34 AM IST
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murderer disguised himself as spot boy arrested from film set in pune

पुणे के पास भोर में एक बड़ी फिल्म की शूटंग चल रही थी। वहीं के स्पॉट बॉय फिल्म की कास्ट और क्रू की जरूरतों को पूरा करने में लगे हुए थे।

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इन्हीं के बीच स्पॉट बॉय बन कर एक हत्यारा पुलिस से छिपने की कोशिश कर रहा था। जेल से भागा यह मुजरिम शिवसेना के एक पार्षद के खून का दोषी है।

दरअसल 32 साल के अनिल गिरी को आठ महीनों से पुलिस ढूंढ रही थी। अनिल ने 2007 में अपने साथी अरुण गवली के साथ मिलकर शिव सेना के पार्षद कमलाकर जमसांदेकर की हत्या की थी।
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गिरि, गवली और उनके 11 साथियों को महाराष्ट्र सांगठित नियंत्रित क्राइम कानून के तहत अगस्त 2012 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

मिड डे की खबर के मुताबिक दहीसार पुलिस का कहना है कि फरवरी में अनिल अपने पिता का अंतिम संस्कार करने के लिए 30 दिन की पेरोल पर नासिक सेंट्रल जेल से बाहर आया था।
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समय सीमा खत्म होने के बाद भी जब वह जेल नहीं लौटा तो जेल अधिकारियों ने साकी नाका पुलिस को जानकारी दी और मार्च में उसके खिलाफ केस दर्ज हुआ।

तस्वीर देख कर क्रू ने की पहचान

murderer disguised himself as spot boy arrested from film set in pune

दहीसार पुलिस थाने के सह पुलिस इंसपेक्टर प्रकाश पवार ने बताया, ''हम भोर में फिल्म के सेट पर पहुंचे जहां सुबह सुबह ही शूटिंग चल रही थी। टीम के पास गिरी की तस्वीर थी, क्रू के सदस्यों को जब तस्वीर दिखाई तो एक आदमी ने गिरी को पहचान लिया और वह पकड़ा गया।''

अनिल की गिरफ्तारी के बाद उस पर आईपीसी की धारा 224( व्यक्ति का अपने डर के कारण कानून में बाधा डालना) के अंतर्गत केस दर्ज हुआ और उसे साकी नाका पुलिस को सौंप दिया गया। कोर्ट में पेशी के बाद उसे नासिक जेल में डाल दिया गया है।

चाचा के साथ मिल कर किया था खून

murderer disguised himself as spot boy arrested from film set in pune

दाहीसार पुलिस को अनिल के चाचा विजय गिरी की भी खोज थी। असल में विजय ने ही पार्षद पर गोली चलाई थी। जबकि पार्षद के घर का पता अनिल ने लगया था और खून के बाद विजय को मोटरबाइक पर बिठा कर भी वही भागा था।

विजय भी जेल से 14 दिन की पेरोल पर बाहर निकला था लेकिन वापस नहीं आया। विजय के बारे में पुलिस को जल्द ही जानकारी मिल गई थी कि वह अपने बड़े भाई के घर में छिपा था।

पुलिस ने वहीं उसे जा दबोचा और पूछताछ में विजय ने यह भी उगल दिया कि अनिल कहां छिपा है। इसके बाद ही पुलिस ने पुणे जा कर फिल्म बाजीराव मस्तानी के सेट पर से अनिल को पकड़ लिया।

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