बेटे को जहर देकर, करती रही उसके मरने का इंतजार
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एक मां ने अपने ही आठ साल के बेटे को जान से मार दिया।
53 साल की गीगी जोर्डन जोकि एक करोड़पति दवा व्यापारी है। उसने ऑटिस्टिक से पीड़ित अपने बेटे जूड को जानलेवा दवाईयां देकर मार डाला था।
मैनहैटन कोर्ट ने उसे 18 साल कैद की सजा सुनाई है। मेल ऑनलाइन के अनुसार मैनहैटन के एक होटल के कमरे में जूड और उसका बेटा साथ रह रहे थे।
जार्डन का कहना है कि उसको डर था कि उसका पूर्व पति उसे मार डालेगा। उसके मरने के बाद जूड का ख्याल कौन रखेगा।
इसी डर की वजह से जार्डन नहीं चाहती थी की उसके पूर्व पति को जूड की कस्टडी मिले। इसलिए उसने पांच फरवरी 2010 को उसे मारना बेहतर समझा।
कोर्ट के सामने जार्डन ने यह भी बयान दिया कि वो अपने बेटे की बीमारी के चलते उसे इस कदर तड़पता हुआ नहीं देख सकती थी। इसलिए जहर देकर आराम की मौत देना चाहती थी।
जार्डन के वकील का कहना था कि वह जान चुकी थी की उसका बेटा इन बिमारियों की वजह से कभी भी ठीक नहीं हो पायेगा। इसलिए उसके दर्द और तकलीफ को कम करने के लिए जूड को जान से मार डाला।
बेटे ने ही दी थी ऐसी सलाह
कोर्ट ने ये मानने से इंकार कर दिया था कि जार्डन ने जूड को जहर देने के बाद खुद को भी मारने की नाकाम कोशिश की थी।
कोर्ट का कहना है उसे विश्वास नहीं हो रहा कि पांच साल बाद भी उसे कोई दुख नहीं कि उसने अपने बेटे का कत्ल कर दिया। आज भी जार्डन उसी बात पर टिकी है कि उसने जूड की जिंदगी बचाने के लिए जान से मारा है।
सभी तरह के साधनों और पैसों के बल पर जार्डन अपने बेटे को बचा सकती थी पर उसने ऐसा नहीं किया। ये एक गम्भीर भावात्मक चोट के चलते उठाया गया कदम है।
जार्डन ने अपनी सफाई में यह भी कहा था कि उसके बेटे ने ही ऐसी सलाह दी थी कि उसे मार डाले। इसके लिए जार्डन को 18 साल की सजा सुनाई गयी है।