यूपी: डकैतों के लिए काल साबित हुए जुलाई-अगस्त महीने
जुलाई और अगस्त महीने बुंदेलखंड के कुख्यात डकैतों के लिए काल साबित हुए। बुंदेलखंड में अपहरण, लूट, हत्या और डकैती से दहशत फैलाने वाले बड़े से बड़े दस्युओं का अंत इन्हीं दो महीनों में हुआ।
बीहड़ी इलाकों में तैनात शिक्षकों का अपहरण कर आतंक फैलाने वाले बारह हजार के इनामी बदमाश अशोक कोल के आतंक का अंत भी अगस्त में हो गया। अशोक कोल (27) पुत्र छोटा कोल पयासी का पुरवा मजरा चमरौंहा थाना मानिकपुर का रहने वाला था।
एसपी पवन कुमार ने बताया कि डाकू अशोक कोल इसलिए ज्यादा खतरनाक था, क्योंकि इसने नया ट्रेंड अपनाया। यह ट्रेंड बीहड़ी इलाकों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के अपहरण कर फिरौती वसूलने का था।
छह मई को इसने मानिकपुर की ग्राम पंचायत ऊंचाडीह के मजरे मुरकटा से प्रभारी प्रधानाध्यापक मतगंजन प्रसाद वर्मा निवासी लोढ़वारा का अपहरण किया था। अगले दिन शिक्षक की रहस्यमय ढंग से वापसी हुई थी। चर्चा है कि इसकी पकड़ तीन लाख रुपए फिरौती देने पर यह छूटा था।
इसके बाद बीहड़ इलाके में ही स्थित मानिकपुर थाना के निही चिरैया प्राथमिक स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक विनोद कुमार निवासी मऊ और सहायक अध्यापक राजबहोर निवासी बरगढ़ का दस्यु गिरोह ने अपहरण कर लिया था। इनको वहां से लगभग दो किमी दूर मारतेपीटते ले गए थे और फिर मोबाइल नकदी लूटकर छोड़ा था। तब भी यह बात सामने आई थी कि इनसे दो-दो लाख फिरौती एक हफ्ते के अंदर भिजवाने को कहा गया था और इस वारदात में भी पुलिस ने अशोक कोल की ही आशंका जताई थी।
जुलाई-अगस्त महीनों में मारे गए ये डकैत
डकैत अशोक कौल के मारे जाने से करीब डेढ़ महीने पहले बुंदेलखंड में आतंक का पर्याय बना दस्यु बलखड़िया उर्फ बाल खड़े उर्फ सुदेश पटेल 2 जुलाई 2015 को मारा गया।
बलखड़िया की मौत के बाद गिरोह के सदस्यों ने उसके शव का अंतिम संस्कार कर दिया था। लेकिन कुछ तस्वीरों के जरिए यूपी पुलिस ने बलखड़िया को मुठभेड़ में मारने का दावा किया था। बलखड़िया पर छह लाख रुपए का ईनाम घोषित था।
इससे पहले 23 जुलाई 2007 को शिवकुमार पटेल उर्फ ददुआ मारा गया था। ददुआ पर पांच लाख रुपए का ईनाम घोषित था। इसी दिन पुलिस मुठभेड में 50 हजार का ईनामी डकैत मईयादीन पटेल और 50 हजार का ईनामी सरगना छोटुआ भी मारा गया था। जुलाई 2007 में ददुआ के साथ गैंग के 10 अन्य बदमाश भी मारे गए थे।
अगस्त में मारे गए ये डकैत
ददुआ जैसे दुर्दांत डकैत की हत्या के भी बाद इलके में बदमाशों का खौफ कम नहीं हुआ था। चार अगस्त 2008 को अंबिका पटेल उर्फ ठोकिया पुलिस मुठभेड में मारा गया था।
इससे पहले 16 अगस्त 2005 में 20 हजार रुपए का ईनामी बदमाश राजकुमार पटेल उर्फ चच्चू मारा गया था।
इलाके में अभी खत्म नहीं हुए हैं डकैत
अभी तक बुंदेलखंड इलाके में करीब हालांकि अभी गैंग के तमाम सदस्य बीहड़ में छिपे हुए हैं। पुलिस उन्हें भी तलाश रही है। ऐसी स्थिति में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि बलखड़िया का गैंग खत्म होगा अथवा कोई दूसरा दस्यु कमान संभालेगा।
चित्रकूट एसपी से जब यह पूछा गया कि बलखड़िया मारा गया, अब गिरोह की कमान किसके हाथ पहुंचने की आशंका है। इस पर एसपी पवन कुमार ने कहा था कि इसकी ज्यादा आशंका है कि गैंग की कमान दो लाख का इनामी बबुली कोल संभाले।
उन्होंने कहा था कि हालांकि लवलेश पटेल भी गैंग की कमान संभाले तो आश्चर्य नहीं। जब उनसे पूछा गया था कि क्या बलखड़िया की जगह लेने को गिरोह में गैंगवार की आशंका है, तो उन्होंने कहा था कि फिलहाल ऐसा नहीं दिखता।
पता चला है कि बलखड़िया जो कुंडल पहनता था, वो अब लवलेश पहने है, जबकि उसकी चेन बबुली के गले में है।
बुंदेलखंड के बीहड़ में करीब डेढ़ दशक तक आतंक का पर्याय बने बलखड़िया के मारे जाने की पुष्टि हो गई है।