नहीं माना सीनियर तो किया यौन उत्पीड़न का मुकदमा
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उत्तराखंड जल विद्युत निगम के एक कार्यालय में तैनात महिला कर्मचारी ने अनुभाग अधिकारी के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया है।
पीड़िता दो साल से अधिकारी की बेजा हरकतों को झेल रही थी। शर्म की बात यह है कि विभागीय अधिकारियों ने उसकी शिकायत तो सुनी, लेकिन दोषी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। डीजीपी के आदेश पर कैंट कोतवाली में यह मामला दर्ज किया गया है।
पीड़िता का आरोप है कि दो साल पहले कार्यालय में अनुभाग अधिकारी के रूप में आए नरेश कुमार वर्मा ने उसका जीना मुहाल कर दिया।
विरोध भी जताया, लेकिन वह नहीं माना
वर्मा खुद को वरिष्ठ बताकर रौब गालिब करता रहा। बेवजह ऑफिस में बुलाकर टाइपिंग कराने और गलत हरकतों को वह नजरअंदाज करती रही। लेकिन, उससे उम्र में काफी बड़े नरेश वर्मा की हरकतें बढ़ती गईं।
उसने कई बार विरोध भी जताया, लेकिन वह नहीं माना। इसके बाद विभागीय स्तर पर उसे छोटी-छोटी बात को लेकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने लगा। यही नहीं वर्मा वक्त-बेवक्त उसे फोन पर भी परेशान करने लगा।
पीड़िता ने 15 जुलाई 2013 को पहली बार विभागीय अधिकारियों से लिखित शिकायत की। विभाग के महाप्रबंधक और उप महाप्रबंधक कार्मिक से मिलकर पूरा किस्सा बताया।
रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश
उन्होंने वर्मा की हरकतों को गलत तो बताया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। महिला कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए गठित विभागीय समिति के सामने भी यह मामला उठाया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
विभाग से निराश होने के बाद पीड़िता 19 जून को डीजीपी बीएस सिद्धू से मिली थी। डीजीपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी को रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया।
शुक्रवार देर रात कैंट पुलिस ने अनुभाग अधिकारी नरेश कुमार वर्मा के खिलाफ विभिन्न तरीकों से छेड़छाड़ कर यौन उत्पीड़न करने तथा अपशब्दों का प्रयोग कर अपमानित करने की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया।
महिला दारोगा ने शनिवार देर शाम पीड़िता के बयान दर्ज किए। डीआईजी अमित सिन्हा ने कैंट पुलिस को प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।