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सनकी ने की चचेरे भाई की गोली मारकर हत्या

Fri, 17 Jul 2015 03:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मिर्जापुर
ब्यूरो/अमर उजाला, मिर्जापुर Updated Fri, 17 Jul 2015 03:56 PM IST
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man shot down to his cousin in mirzapur

उत्तर प्रदेश में मिर्जापुर देहात कोतवाली के गंगाऊत तिराहा स्थित स्टूडियो में बैठे विजय कुमार शुक्ला (38) की गुरुवार की दोपहर चचेरे भाई ने ही लाइसेंसी बंदूक से गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी को पिपराडाड़ के पास से गिरफ्तार कर लिया।

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हत्या के पीछे पुरानी रंजिश बताई जा रही है। घटनास्थल पर पुलिस अधीक्षक, सीओ सदर और थानाध्यक्ष फोर्स के साथ पहुंचे थे।

मेवली गांव निवासी विजय कुमार शुक्ला ने गंगाऊत गांव निवासी जितेंद्र शुक्ला के मकान में किराए पर स्टूडियो एवं मोबाइल रिचार्ज की दूकान खोली थी। गुरुवार की दोपहर वह दूकान में अखबार पढ़ रहे थे तभी लगभग एक बजे उनका चचेरा भाई नरेंद्र कुमार अपनी लाइसेंसी बंदूक लेकर वहां पहुंचा।
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वह दूकान के अगल-बगल घूम रहा था कि इसी बीच एक बालक मोबाइल रिचार्ज कराने आ गया। उसे देख नरेंद्र दूकान के बाहर ही खड़ा रहा। बालक का मोबाइल रिचार्ज करने के बाद विजय फिर अखबार पढ़ने लगा। इसी दौरान नरेंद्र ने लाइसेंसी बंदूक से विजय के सीने पर फायर कर दिया। गोली लगते ही विजय काउंटर पर लुढ़क गया।
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गोली की आवाज सुनकर आसपास के लोग भागकर पहुंचे, मगर इसके पहले ही नरेंद्र फरार हो गया। विजय को चार बेटियां और एक बेटा है। उधर, मौके पर पहुंचे एसपी सिटी अजय सिंह, सीओ सदर सर्वजीत शाही और थानाध्यक्ष अविनाश सिंह ने परिवार के लोगों से इस बाबत पूछताछ की। सीओ सदर सर्वजीत शाही ने बताया कि हत्या का कारण पुरानी रंजिश है। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।

गोली मारने से पहले मांगी तम्बाकू

man shot down to his cousin in mirzapur

मेवली गांव के विजय और नरेंद्र चचेरे भाई थे। नरेंद्र के पिता शेषमणि बडे़ और विजय के पिता राधेश्याम छोटे भाई हैं। विजय अपने पिता का बड़ा पुत्र था, जबकि नरेंद्र दूसरे नंबर का।

कुछ वर्ष पूर्व उसने सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी के लिए बारह बोर के असलहे का लाइसेंस बनवाया था। उसने कुछ दिनों तक गार्ड की नौकरी भी की लेकिन खराब व्यवहार के चलते उसे किसी ने भी नौकरी पर ज्यादा दिनों तक नहीं रखा। गुरुवार को नरेंद्र कुमार विजय से पहले ही दूकान पहुंच गया था।

उसने अपने भाई से खाने के लिए सुर्ती मांगी फिर लाइसेंसी बंदूक से उनके सीने में गोली मार दी। गांव वालों के मुताबिक नरेंद्र गांव में दस दिनों से बंदूक लेकर घूम-घूमकर लोगों से वारदात को अंजाम देने के बारे में कहता फिर रहा था। विजय को भी अपनी हत्या की आशंका थी। इस बारे में उन्होंने ग्रामीणों से चर्चा भी की थी, लेकिन कभी पुलिस को नहीं बताया था।

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