बच्चों का खर्चा नहीं उठा पाया तो उन्हें मार दिया
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किसी भी बच्चे के लिए उसके पिता किसी सुपरमैन सरीखे होते हैं। बच्चों को उम्मीद होती है कि उनकी हर चाहत को पिता पल में पूरा कर देंगे। बच्चों के लिए पिता की बाजुओं से ताकतवर दुनिया में कोई सुरक्षा नहीं होती है। तस्वीर में दिख रहे इन बच्चों को भी ऐसी ही उम्मीदें अपने पिता से रही होंगी।
लेकिन इस पिता ने पवित्र रिश्ते को तार-तार कर दिया। बच्चों को महज इसलिए जान से मार दिया क्योंकि घर का खर्च चलाने में दिक्कत आ रही थी।
ये खबर सदमा देती है, लेकिन पाठकों के लिए पढ़ना इसलिए जरूरी है क्योंकि हम लाख दावा कर रहे हैं कि हालात इंसान को थका नहीं सकते। इंसान घोर संघर्ष कर मुफलिसी और तमाम परेशानियों के भंवर से उबर कर सुनहरे भविष्य की राह बना सकता है। लेकिन जब एक पिता अपनी रत्ती भर पगार के चलते दो बच्चों की देखभाल नहीं कर पाए। समस्या से निजात पाने के लिए वो उनकी हत्या कर डाले, तो शर्म की बात है हमारे पूरे समाज के लिए, पूरी इंसानियत के लिए।
इस खबर को लिखते और पढ़ते हुए दिल पसीजता है लेकिन आगाह कराना हमारा फर्ज है। बेहद आधुनिक कहे जाने वाले बैंगलुरू में हुई इस वारदात ने लोगों की नींद उड़ा दी है।
बच्चों को मारकर कबूला जुर्म
डेक्कन क्रॉनिकल की खबर के मुताबिक 37 वर्षीय शिवकुमार चिकपेट में एक बैग की दुकान पर काम करता था। उसके दो बच्चे पवन और सिंचाना पास के ही एक स्कूल में पढ़ाई करते थे। दोनों बच्चों की उम्र क्रमश: 9 और 6 वर्ष बताई जा रही है। घर खर्च में सहयोग करने के लिए शिवकुमार की पत्नी वसंता भी घरों में काम करती है।
बीते शुक्रवार को बच्चे स्कूल नहीं गए थे। बच्चों की मां वसंता घरों में काम करने के लिए चली गई, लेकिन शिवकुमार घर पर ही रुका रहा। उसने अपनी पत्नी से बताया था कि वो बच्चों को धर्मशाला घुमाने ले जाएगा। लेकिन पत्नी के घर से जाने के बाद उसने बच्चों को चाकू से गोद डाला और उनकी लाशों को बैग में भरकर माले महादेश्वरा स्थित नाले में फेंक दिया।
रविवार को शिवकुमार अकेला ही घर लौटा। पूछने पर उसने सारी बात बीवी और रिश्तेदारों को बताई।
रिश्तेदारों ने पुलिस को सूचना दी और शिवकुमार को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने नाले से बच्चों लाशें भी बरामद कीं।
पुलिस की मानें तो शख्स की मानसिक स्थित सही है। फिर भी उसने ऐसी वारदात को अंजाम दिया जिस के बारे में जेहन में ख्याल तक लाना असंभव लगता है।