HIV पॉजिटिव होने पर पत्नी, बेटियों को जलाया
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एचआईवी पॉजिटिव होने की बात पता चलने से एक शख्स इतना परेशान हो गया कि उसने पत्नी और दो बेटियों को जिंदा जला दिया। उसने तीनों को कार में बंद करके आग लगा दी। मानसिक दबाव न झेल पाने पर उसने खुद ही उसने इसका भंडाफोड़ भी किया।
मामला मध्य प्रदेश का है। बेतुल जिले के मुल्ताई टाउन में रहने वाले एक सरकारी इंजीनियर ने इस वारदात के दौरान खुद को भी मारने की कोशिश की, लेकिन कार में आग की लपटें बढ़ते ही उसका कलेजा कांप गया और वह बाहर निकल आया।
पुलिस के अनुसार, घटना वाले दिन आरोपी इंजीनियर महाराष्ट्र के अमरावती स्थित अपने गृहनगर से बुंदेलखंड स्थित उस शहर जा रहा था जहां वह तैनात था।
बीच रास्ते रोकी कार, पेट्रोल डालकर लगाई आग
एचटी के अनुसार, घटना तीन मार्च की है। आरोपी इंजीनियर ने खुद को पुलिस के हवाले करते हुए बताया कि उसने और उसकी पत्नी ने मिलकर यह फैसला लिया था कि घर से लौटते समय रास्ते में अपनी बेटियों की हत्या के बाद वे लोग खुद को भी मार डालेंगे।
मंगलवार को आरोपी इंजीनियर को पूछताछ के लिए मुल्ताई पुलिस स्टेशन लाया गया। एसएचओ एसके सिंह ने बताया कि आरोपी की बात को परखने के लिए उसका दोबारा एचआईवी टेस्ट कराया जा रहा है। उसे बुधवार को कोर्ट में पेश कर रिमांड में लेने की तैयारी है।
इंजीनियर ने पूछताछ में बताया कि करीब सात महीने पहले उसने और उसकी पत्नी ने एचआईवी टेस्ट कराया था, जिसमें वे पॉजिटिव निकले। इसके बाद उन्होंने बेटियों का भी टेस्ट कराया और वे भी पॉजिटिव निकलीं।
वे लोग 28 फरवरी को अमरावती गए और 3 मार्च को वापस लौट रहे थे। रास्ते में पूर्व योजना के मुताबिक, उसने गौनापुर घाट के पास कार रोकी और पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी।
पत्नी ने कहा, 'बेटियों को बचा लो उनकी गलती नहीं'
उसने कार को रास्ते से हटाने के लिए धक्का दिया और खुद भी कूद कर कार में बैठ गया। कार में आग बढ़ती इससे पहले ही उसकी पत्नी का कलेजा कांप गया। उसने कार की पिछली सीट पर सो रही दोनों बेटियों को देखा और रो पड़ी।
उसने कहा कि एचआईवी पॉजिटिव होने में उनकी बच्चियों का कोई दोष नहीं है। पत्नी की बात से वह भी सहमत हुआ और जलती कार से बेटियों को खींचकर बाहर लाने की कोशिश की, लेकिन तभी कार लपटों से बुरी तरह घिर गई और वह उन्हें बचा नहीं सका।
उसने पत्नी और बेटियों को कार में मरने के लिए छोड़ दिया और खुद अमरावती पहुंच गया। इस घटनाक्रम से उबरने के लिए वह मुंबई और नागपुर में घूमता रहा, लेकिन जब बर्दाश्त नहीं हुआ तो उसने अपने परिवार और दोस्तों को सच्चाई से अवगत कराया। उन्होंने उसे खुद पुलिस के पास जाने की सलाह दी।
उसकी पत्नी के भाई ने उसकी ओर से दिए गए बयान को नकार दिया और मामले की गहन तहकीकात की मांग की है।