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ज्योति हत्याकांड: पढ़ें, डायरी के वो खास अंश

Fri, 08 Aug 2014 03:27 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 08 Aug 2014 03:27 PM IST
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jyoti murder case, diary

ज्योति हत्याकांड के सनसनीखेज खुलासे के बाद भी हम लगातार इस मामले से जुड़ी हर एक्सक्लूसिव खबर आप तक पहुंचा रहे है। आज हम ज्योति की डायरी के कुछ अंशों को बता रहे जो पीयूष की बेवफाई, उसके प्रति बुरे बर्ताव, दूसरी लड़कियों से संबंध और उसके साथ की गई पीयूष की ज्यादतियों को साबित करने के लिए काफी है।

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स्वभाव से अंर्तमुखी ज्योति श्यामदासानी को शादी से पहले से ही डायरी लिखने की आदत थी। पुलिस ने ज्योति की अलमारी से जो दो डायरी बरामद की थी, उसमें ज्योति ने शादी के बाद ससुराल में अपने पहले दिन से हत्या से दो दिन पहले तक की एक-एक बात लिख रखी है।
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किस तरह हनीमून पर साथ होने के बाद भी पीयूष उसके साथ नहीं था। कैसे उसने पीयूष से शादी करके अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती कर दी। डायरी में ज्योति ने मनीषा के अलावा एक अन्य लड़की का नाम के साथ जिक्र किया है जो ज्योति और पीयूष के बीच अलगाव की वजह थी।
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मैं ज्योति श्यामदासानी....

jyoti murder case, diary

हमारी शादी हुए चार दिन ही हुए थे। जबलपुर से कानपुर शिफ्ट होने का पूरा सफर नई उम्मीदों, रोशनी और प्यार से भरा था। मैं पहले कानपुर आ चुकी थी। शादी से पहले पीयूष से भी बात होती थी। लेकिन मेरे डैडी और पीयूष के परिवार में इस रिश्ते को लेकर जो गर्मजोशी थी वह हमारे बीच नहीं थी।

घर आए चार दिन ही हुए हैं, सब कुछ अच्छा है। नए रिश्तेदार मिलने आ रहे हैं। भैया और दीदी (पीयूष का बड़ा भाई और भाभी) बहुत अच्छे हैं। हमारा कमरा भी बहुत अच्छा है, लेकिन पीयूष ज्यादा टाइम नहीं देते हैं। भईया ने स्वीटजरलैंड में 10 दिन का हनीमून पैकेज गिफ्ट किया है। कल जाना है। मैंने काफी पैकिंग कर ली है।

अगला दिन - आईजीआई एयरपोर्ट से यूरोप के लिए फ्लाइट थी। मैं पहले पहुंच गई थी। वो किसी काम को पूरा करने के बाद एयरपोर्ट पहुंचने की बात कह रहे थे। दो घंटे मैं अकेले ही वहां बैठी रही। फ्लाइट बोर्ड करने के लिए कॉल हुई उसके बाद वह एयरपोर्ट पहुंचे।

मनीषा नहीं और भी हैं 'वो'

jyoti murder case, diary

मैंने पूछा तुम कहां थे, इतनी देर कैसे लग गई। इस पर पीयूष ने बेहद रूखे लहजे में जवाब दिया कि एक फ्रैंड से वीडियो चैट कर रहा था।

हनीमून के बाद - स्वीटजरलैंड में हनीमून के दौरान गुजारे वो सात दिन मेरी जिंदगी के सबसे बुरे दिन थे। हम दोनों साथ होकर भी अजनबी थे। वो मुझसे बात ही नहीं करता था। हमेशा फोन पर किसी से बात करता रहता था।

मैंने उससे इस बारे में जानने की कोशिश की तो उसने मेरे साथ बुरा बर्ताव किया। मुझे अब ऐसा लग रहा है कि मैंने गलती कर दी।

नहीं रूक रहे पिता की आंखों में आंसू

jyoti murder case, diary

जिस डायरी में ज्योति ने अपने दर्द को बयां किया है उसमें उसने बड़ी इत्मिनान से पीयूष और उसके दूसरी महिलाओं से संबंधों के बारे में भी लिखा है। आईजी आशुतोष पांडेय बताते हैं कि डायरी में जिस लड़की का बार बार नाम से जिक्र ज्योति ने किया है वो मनीषा नहीं कोई और है।

पूरी डायरी पढ़ने पर ज्योति और पीयूष के संबंधों की पूरी परिपाटी साफ हो जाएगी। ये दो डायरी ही पीयूष के खिलाफ काफी बड़ा सबूत है।

वहीं, ज्योति के पिता शंकर नागदेव को अपनी बेटी के दिल की आवाज नहीं सुन पाने का जीवन भर दुख रहेगा। वह बेटी के हत्यारे को सजा दिलाने के लिए सब कुछ करने को तैयार है।

ज्योति के पिता बताते हैं कि बचपन से लेकर शादी तक कभी उसके आंखों में आंसू नहीं आने दिए। एक बार स्कूल में टीचर ने डांटा तो वहां पहुंच गया। वहां से घर ले आया और घंटों अपनी बांहों से लगाए रखा।

बचपन से ज्योति चाकू से डरती थी

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शंकर नामदेव के मुताबिक ज्योति ने सेंट एलॉयसिस कॉलेज जबलपुर से ग्रेजुएशन किया है। शादी से पहले कुछ दिन कंगारू किड्स स्कूल में पढ़ाने भी जाती थी। उसे बच्चों से बहुत प्यार था।

कॉलेज की फ्रैंड को लेकर घर आती थी तो अपने हाथों से उनको एक से बढ़कर एक चीजें बनाकर खिलाती थी। लेकिन सब्जी काटने या फिर दूसरे काम के लिए चाकू का प्रयोग खुद नहीं करती थी, किसी और से कटवाती थी। वो कहती थी कि इससे डर लगता है।

अक्सर कॉलेज से आने के बाद मुझसे उस दिन की हर बात शेयर करती थी। अगर किसी फ्रैंड से लड़ाई करके आती थी तो भी बिना मुझे बताए नहीं रहती थी, लेकिन उसने मुझसे इतनी बड़ी बात क्यों छिपाई? मैं ये नहीं समझ पा रहा हूं..अब तो जिंदगी भर रोने के सिवाए और कुछ नहीं बचा..मेरी इतनी प्यारी बच्ची पर उसने इतने अत्याचार किए और मुझको भनक तक नहीं लगी।

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