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47 साल बाद कोर्ट ने कहा, 'बेगुनाह हो तुम'

Sat, 29 Mar 2014 05:01 PM IST
बीबीसी न्यूज़
बीबीसी न्यूज़ Updated Sat, 29 Mar 2014 05:01 PM IST
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Japanese man freed after 45 years on death row as court orders retrial

जापान के एक अदालत ने चार दशकों से मौत की सज़ा पाए एक व्यक्ति के मुक़दमे पर फिर से सुनवाई की इजाज़त दी है।

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इवाओ हाकामादा को अपने बॉस, उसकी पत्नी और उसके दो बच्चों की हत्या के लिए 1968 में मौत की सजा सुनाई गई थी। अब 78 साल के हो चुके हाकामादा ने उस वक़्त 20 दिनों की पूछताछ के बाद अपना गुनाह क़बूल कर लिया था।

वह कहते हैं कि पूछताछ के दौरान उनको पीटा गया था। बाद में वह अदालत में इक़बालिया बयान से मुकर गए थे।

जापान की पुलिस पारंपरिक रूप से मुक़दमा चलाने के दौरान बयान पर भरोसा करती है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि अक्सर ये बयान जोर ज़बरदस्ती कर के लिए जाते हैं।

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दुनिया का एक अनोखा क़ैदी

Japanese man freed after 45 years on death row as court orders retrial

एक बयान में, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बताया कि हाकामादा को दुनिया के सबसे लंबे समय तक मौत का सज़ा पाए क़ैदी के रूप में माना जाता है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल के पूर्वी एशिया अनुसंधान निदेशक रोसीअन राइफ़ ने कहा, अगर कोई मुक़दमा जो फिर से सुनवाई की मांग करता है वह यह मुक़दमा है।

हाकामादा एक मजबूर इक़बालिया बयान के आधार पर दोषी पाया गया था और हाल ही में डीएनए सबूत से उठे सवालों का अनुत्तरित रहना भी एक वजह थी।

इस पूर्व पेशेवर बॉक्सर पर 1966 में सिजुओका में सोयाबीन प्रोसेसिंग कारख़ाने में अपने बॉस और उसके परिवार की हत्या का आरोप लगाया गया था। उसके परिवार के लोग आग लगने के बाद चाक़ू से मारे पाए गए थे।

कोर्ट ने कहा, हाकामादा के साथ अन्याय

Japanese man freed after 45 years on death row as court orders retrial

क्योदो समाचार एजेंसी के रिपोर्ट के मुताबिक़ अदालत का यह फ़ैसला उस वक़्त आया जब बचाव पक्ष के वकीलों ने दिखाया कि कथित तौर पर हत्यारे द्वारा पहने गए कपड़ों पर पाए गए ख़ून के धब्बों के डीएनए हाकामादा डीएनए से मेल नहीं खाता।

न्यायाधीश ने उनकी रिहाई का आदेश देते हुए कहा, "उनकी बेगुनाही की संभावना एक सम्मानजनक हद तक स्पष्ट हो गई है, इसलिए अब प्रतिवादी को गिरफ़्तार करे रखना अन्याय है।

मामले की सुनवाई कर रहे तीन जजों में से एक ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वह अभियुक्त को बेगुनाह मानते है। आम तौर पर सार्वजनिक रूप से इस तरह बयान देने का प्रचलन नहीं है।

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हाकामादा की बहन लड़ रही है मुक़दमा

Japanese man freed after 45 years on death row as court orders retrial

हाकामादा की 81 वर्षीय बहन हीदेको कई वर्षों यह मुक़दमा लड़ रही है।

एएफ़पी समाचार एजेंसी ने अदालत के बाहर समर्थकों और मीडिया को उनके हवाले से कहा, "यह आप सब की मदद से हो पाया। आप सब को धन्यवाद। मैं बस बहुत ख़ुश हूँ।

जापान की न्याय प्रणाली संदिग्ध लोगों के बयान पर काफ़ी हद तक आधारित है

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