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लॉकअप में भी जागृति से परेशान हैं सांसद धनंजय
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 12 Nov 2013 02:18 PM IST
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राखी का बेटा शहनाज मां के शव को लेने के लिए दिल्ली आने को तैयार नहीं है।
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नई दिल्ली जिला पुलिस उपायुक्त एसबीएस त्यागी ने बताया कि उन्होंने कोलकाता पुलिस के अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे शहनाज को समझाएं ताकि वह शव लेने के लिए राजी हो जाए। दिल्ली पुलिस की टीम कोलकाता से वापस आने के लिए रवाना हो गई है।
पुलिस के अनुसार, शहनाज राखी का इकलौता बेटा है और शादीशुदा है। उसके एक बेटा और एक बेटी है। मां की मौत की खबर सुनकर शहनाज बुधवार को दिल्ली पहुंचा था। वह रिश्तेदार के साथ चाणक्यपुरी थाने पहुंचा और बृहस्पतिवार को गायब हो गया।
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पुलिस सूत्रों का कहना है कि शहनाज की बृहस्पतिवार को 24 परगना, कोलकाता के लोकल नेताओं से बात हुई थी। उनके कहने पर ही वह कोलकाता गया था। बताया जा रहा है कि इसी वजह से वह यहां नहीं आ रहा है।
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सोमवार सुबह दिल्ली पुलिस ने शहनाज को समझाने के लिए स्थानीय विधायक से संपर्क किया था। शहनाज ने पुलिस से कहा कि उसे दिल्ली में डर लगता है। पुलिस इसके पीछे नेताओं का हाथ मान रही है। शहनाज के संपर्क में रहने वाले सभी स्थानीय नेता एक ही पार्टी के हैं।
डीसीपी बीएस त्यागी ने यह भी बताया कि मीना के परिजन भी कोलकाता में मिल गए हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि पुलिस को अनौपचारिक रूप से पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल गई है।
नौकरानी की हत्या का मामला
सांसद धनंजय सिंह व जागृति को कोर्ट ने जेल भेज दिया। सांसद को तिहाड़ जेल नंबर 4 में जबकि डॉ. जागृति सिंह को जेल नंबर 6 में रखा गया है। सोमवार को दोनों ने रात में खाने से ना-नुकुर किया। हालांकि, लेकिन जेल अधिकारियों के समझाने के बाद दोनों ने खाना खाया। रात में धनंजय प उन पर सुरक्षाकर्मियों की विशेष नजर रहेगी। जागृति को अन्य महिला कैदियों के साथ जेल नंबर 6 में उदास देखा गया। दोनों को मनोचिकित्सक से भी मिलवाया गया।
दिवाली पर दिल्ली बुलाया था
राखी ने शहनाज को दिवाली पर दिल्ली बुलाया था। करीब तीन माह पहले राखी ने शहनाज से बात की थी और दिवाली पर उसे दिल्ली बुलाया था। वह यहां आना भी चाहता था लेकिन राखी ने फिर उसे फोन नहीं किया।
समर्थकों से की बातचीत
सांसद को कहने को तो कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत में पेश किया गया था, लेकिन वह बिना किसी रोकटोक के काफी देर तक अपने समर्थकों से बातचीत करते रहे। इस दौरान पुलिसकर्मी व वरिष्ठ अधिकारी मौन खड़े रहे। वहीं, डॉ. जागृति चुपचाप खड़ी रही। उससे न तो किसी ने बात की और न ही कोई मिलने आया।
थाने में गुमसुम रहे सांसद
पुलिस के अनुसार, चाणक्यपुरी थाने के लॉकअप में ज्यादातर समय सांसद शांत रहते हैं। वह हमेशा लॉकअप से बाहर निकालने की बात कहते हैं। वहीं, पांच दिन का रिमांड खत्म होने के बाद पुलिस उन्हें अलग-अलग जिप्सियों में कोर्ट लेकर गई। बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान सांसद और जागृति के बीच बहस होने लगती थी। धनंजय सिंह और जागृति को सोमवार को कोर्ट में पेश किया गया।
मानसिक रूप से फिट है जागृति
सांसद आवास में नौकरानी की हत्या के मामले में सोमवार को रिमांड खत्म होने पर सांसद धनंजय सिंह व जागृति सिंह को कोर्ट में पेश किया गया। पटियाला हाउस कोर्ट स्थित मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट गोमती मिनोचा के समक्ष बहस के दौरान डॉ. जागृति के वकील ने कहा कि उनकी मुवक्किल की हालत काफी खराब है।
रिमांड के दौरान वह आराम नहीं कर पाई और पुलिस का रवैया नकारात्मक रहा। उनकी मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं है। सरकारी वकील ने इस तर्क को गलत बताते हुए कहा कि डॉ. जागृति पूरी तरह से मेडिकल फिट है। अदालत ने सांसद व जागृति के बंद कमरे में बयान भी दर्ज किए।
न्यायिक हिरासत संबंधी आदेश देने के बाद अदालत ने सभी को कमरे से बाहर कर दिया और करीब आधा घंटे बंद कमरे में बयान दर्ज किए। फिर अदालत ने पांच बजे से साढ़े पांच बजे तक संबंधित एसीपी, चाणक्यपुरी थानाध्यक्ष व जांच अधिकारी से जानकारी ली। धनंजय पुन: अदालत में पेश हो गए और कहा कि उनके कुछ बयान रह गए हैं। उन्होंने करीब 10 मिनट तक बयान दर्ज कराए।