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उत्पीड़न मामले की जांच करेंगे सुप्रीम कोर्ट के तीन जज

Tue, 12 Nov 2013 09:19 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 12 Nov 2013 09:19 PM IST
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Intern_sexual harassment_Supreme Court_judge

अपने ही जजों में से एक के दामन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगने के मामले को सुप्रीम कोर्ट ने काफी गंभीरता से लिया है। सर्वोच्च अदालत ने मामले की पूरी जांच के लिए तीन जजों की समिति गठित कर दी है।

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एक महिला प्रशिक्षु वकील ने अपने ब्लॉग और एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। यह जज पिछले साल ही रिटायर हुए हैं।
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इस घटना से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पी सदाशिवम भी काफी चिंतित दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यौन उत्पीड़न के मामले को हम कतई हल्के में नहीं ले सकते।

अटार्नी जनरल जीई वाहनवती ने यह मसला मंगलवार को चीफ जस्टिस सदाशिवम, जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस एसके सिंह की पीठ के समक्ष उठाया।

इस पर पीठ ने कहा कि हम इस पर कदम उठा रहे हैं और बयान व तथ्यों की सच्चाई का पता लगाने के लिए जस्टिस आरएम लोढ़ा, जस्टिस एचएल दत्तू व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की समिति गठित की गई है।
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चीफ जस्टिस ने कहा, ‘संस्था का मुखिया होने के नाते मैं इन आरोपों से चिंतित हूं। मैं जानना चाहता हूं कि बयान सही है या नहीं।’ उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों से संबद्ध होने वाले प्रशिक्षुओं और वकीलों का रिकॉर्ड रखा जाता है।

सुप्रीम कोर्ट आने वाले व्यक्तियों के बारे में भी प्रविष्टियां होती हैं और समिति इसकी भी जांच करेगी। एक युवा महिला प्रशिक्षु ने सर्वोच्च अदालत के हाल ही में रिटायर होने वाले एक जज पर अपने ब्लॉग में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है।

ब्लॉग के मुताबिक पिछले साल दिसंबर में एक होटल के कमरे में न्यायाधीश ने उसके साथ तब दुर्व्यवहार किया जबकि राजधानी में एक महिला से सामूहिक दुष्कर्म की घटना के खिलाफ पूरा राष्ट्र जूझ रहा था।

इस महिला ने इसी साल कोलकाता की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरीडिकल साइंस से स्नातक किया है। अटार्नी जनरल ने मीडिया में आई खबरों की ओर भी पीठ का ध्यान दिलाया।

इस मामले को सुबह अधिवक्ता एमएल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखा। इस पर चीफ जस्टिस ने उन्हें आश्वासन दिया कि हम तथ्यों के प्रति सचेत हैं।

सर्वोच्च अदालत परिसर में यौन उत्पीड़न के मामलों से निपटने और इस बुराई को खत्म करने के लिए दिशानिर्देश तैयार हो चुके हैं। इन्हें राजपत्र में अधिसूचित कर दिया गया है।

इस समिति में अभी सदस्यों को शामिल किया जाना है। इस बारे में सुप्रीम कोर्ट बार संघ और विधि क्लर्क संघ के सदस्यों के चयन के लिए संदेश भेजा गया है। लेकिन अभी तक जवाब नहीं आया है।


उन्होंने कहा कि समिति में सदस्यों के मनोनयन के लिए 30 नवंबर की समय सीमा निर्धारित की गई है। शर्मा ने अनुरोध किया था कि कोर्ट को मीडिया की रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच करानी चाहिए।

हालांकि उस समय अदालत ने कोई आदेश नहीं जारी किया। लेकिन दोपहर में आदेश लिखाए जाने के दौरान शर्मा की ओर से मसले को उठाए जाने का जिक्र किया।

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