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क्या याकूब मेमन ने खुद को गिरफ्तार कराया था?

Thu, 30 Jul 2015 10:50 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 30 Jul 2015 10:50 AM IST
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how yakub memon  was arrested in 1994

मुंबई ब्लास्ट के आरोपों में नेपाल पुलिस ने याकूब को काठमांडू एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर सीबीआई को सौंपा दिया था हालांकि सीबीआई दावा किया था कि उसने याकूब को दिल्ली से गिरफ्तार किया था।

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जुलाई 1994 में याकूब मेमन को तब पकड़ा गया, जब वह नेपाल में एक वकील से भारत वापसी के बारे में सलाह लेने गय था। वकील याकूब का रिश्तेदार था। रॉ के आतंकवाद विभाग के प्रमुख बी रमन के लिखे एक लेख के मुताबिक, 1994 में याकूब को भारत लाया गया था और मामले में शामिल किया गया था।
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2007 में याकूब को मौत की सजा दिए जाने और अभियोजन पक्ष द्वारा इस मामले में वाजिब तथ्यों को न रखे जाने से रमन नाखुश हुए थे।

यह भी मान लिया जाए कि याकूब खुद भारत नहीं आया बल्कि उसे नेपाल में गिरफ्तार के बाद भारत भेज दिया गया तो उसके पास पाकिस्तान में होने का सबूत भी था।

याकूब की गिरफ्तारी से जांच में मिली मदद

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याकूब को गिरफ्तार करने से पहले भारत सरकार के पास वास्तव में सिवाय इसके कुछ जानकारी नहीं थी कि सीरियल धमाके को कराने में याकूब के भाई टाइगर मेमन ने अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम की मदद से साजिश रची थी। मेमन परिवार धमाके की सुबह दुबई में छुट्टियां मनाने मुंबई से फरार हो गया था।

टाइगर को छोड़कर उन सभी ने दावा किया था कि उन्हें इस भयंकर अपराध के पारे में कुछ भी पता नहीं था जिसमें 257 लोग मारे गए थे और 700 लोग घायल हो गए थे और कई ज‌िंदगी भर के लिए अपंग हो गए।

मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में याकूब ही सुरक्षा एजेंसियों के लिए वह कड़ी निकला जिससे मामले की कई कड़ियां जुड़ीं और सबूत मिले।

किस हाल में है मेनन का परिवार?

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याकूब की गिरफ्तारी से पहले उसके परिवार को पाकिस्तान के कराची में एक सुररक्षित स्‍थान रखा गया था। लेकिन गिरफ्तारी के बाद याकूब ने अपने परिवार और पत्नी को भारत आने के लिए तैयार किया।

मामले को देख रहे वकीलों के अनुसार, याकूब के परिजनों को 25 अगस्त 1998 को गिरफ्तार किया गया था। याकूब की पत्नी रहीन, उस समय गर्भवती थी और पांच सितम्बर को दुबई से भारत आने के बाद उन्होंने एक लड़की को जन्म दिया।

याकू का पिता अब्दुल रज्जाक सुनवाई के दौरान गुजर गया और उसकी मां हनीफ, पत्नी रहीन और भाई सुलेमान कोर्ट से बरी हो गए।

दो अन्य भाई एसा और यूसुफ को बीमारी के कारण उम्रकैद हो चुकी है और भाभी रुबीना भी उम्रकैद की सजा भुगत रही है क्योंकि धमाकों के दिन विस्फोटक ले जाने वाली जो वैन पकड़ी गई थी वो इन्हीं के नाम पर रजिस्टर्ड थी। टाइगर को छोड़कर एक अन्य भाई अयूब फरार है। बाकी परिवार भारत में है।

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याकूब को फांसी सही या गलत?

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रॉ के आतंकवाद विभाग के प्रमुख रमन लिखते हैं कि याकूब ने जांच एजेंसियों के साथ सहयोग किया और भारत वापस आने के लिए परिवार के कुछ सदस्यों को राजी भी किया था।

उनके मुताबिक, वो महसूस करते हैं कि  सबूतों की कमी है। सीरियल धमाका मामले में, हालांकि फैसला हो चुका है, कम से कम एक अभियुक्त गवाह बन गया और उसने सबूत दिए, छोड़ा जा चुका है।

जिस सह अभियुक्त ने याक़ूब के ख‌िलाफ बयान दिया, वो मुकर चुका है। मौत की सजा की मांग करते हुए अभियोजन पक्ष ने कोई भी वाजिब सबूत नहीं दिया, जिनका उल्लेख रमन और अन्य कई खबरों में किया जा चुका है।

ऐसा माना जा रहा है कि मेमन का परिवार धमाके के बारे में जानते था लेकिन वो वापस आया और जांच में मदद की। दूसरा मुख्य मुद्दा फांसी की सजा का है। हर समय जब भी मौत की सजा होती है, तो इस बात पर बहस होती है कि क्या भारत में इस पर पाबंदी लगानी चाहिए या नहीं।

इसलिए ‌मिली याकूब को फांसी

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याकूब पर भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी के तहत साजिश रचने का आरोप है। इसके अलावा चरमपंथियों की मदद करने और गैरकानूनी रूप से हथियार और गोली रखने के लिए उसपर टाडा के तहत आरोप लगाए गए हैं।

साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा पर मुहर लगाई और शीर्ष अदालत ने माना कि धमाके की साजिश रचने में याकूब की मुख्य भूमिका थी।

चरमपंथी हमले के लिए हवाला के जरिए पैसे के लेनेदेन, पाकिस्तान में ट्रेनिंग के लिए युवाओं को भेजने की व्यवस्‍था करने और सह आरोपियों को हथियार और गोला बारूद देने के आरोप याकूब पर लगाए गए थे। हालांकि याकूब ने आरोपों का खंडन किया और लगातार कहते रहे कि उन्हें कुछ भी पता नहीं था।

चार्टर्ड अकाउंटेट के रूप में दोस्त चेतन शाह के मांस निर्यात बिजनेस में उनकी सफल साझेदारी थी, जिसके बूते उनके परिवार ने माहिम में अल हुसेनी बिल्डिंग में फ्लैट खरीदा।

संदेह इस बात पर है कि मेमन परिवार क्यों दुबई चला गया, क्या वो ईद की छुट्टियां मनाने के लिए गए थे तो क्यों और क्या याकूब अपने भाई की योजना के बारे में पूरी तरह निर्दोष था?

अदालतों ने उन्हें दोषी पाया है और अब सर्वोच्च अदालत ने भी फांसी से रोक लगाने से मना कर चुकी है।

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