रेप और हत्या की सजा, बीच सड़क काटा महिला का सिर
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हत्या और रेप के आरोप में एक महिला को बीच सड़क पर गिराकर उसका सिर कलम कर दिया गया। इसके बाद लोगों ने इस घटना की तस्वीरों को इंटरनेट पर डाल दिया। तस्वीरें वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया।
मामला सऊदी अरब का है। मक्का की एक महिला लैला पर पूर्व पति की बेटी की हत्या और उसके साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा था। इस मामले में उसे सुनवाई के बाद दोषी करार दिया गया था।
लैला को सिर कलम करने की सजा दी गई, जिसके बाद मक्का में एक जल्लाद ने बीच सड़क पर उसका सिर काट दिया। हालांकि इसके बाद शहर में बवाल शुरू हो गया। लेकिन यह बवाल सरेआम महिला का सिर काटने या इस सजा के विरोध में नहीं था। इसके पीछे की वजह और भी चौंकाने वाली है।
वो चीखती रही पर जल्लाद नहीं रुका
डेली मेल के मुताबिक, महिला का सिर काटने के बाद जब लोगों ने उसका वीडियो इंटरनेट पर डाला तो हंगामा शुरू हो गया। इस खौफनाक सजा के बजाए लोग तस्वीरों को इंटरनेट पर डालने का विरोध करने लगे। मामला बढ़ता देख प्रशासन ने कार्रवाई की और घटना का वीडियो बनाने के आरोप में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।
वीडियो में साफ तौर पर दिखा कि मरने से पहले लैला किस तरह गिड़गिड़ा कर अपनी जान की भीख मांगती रही। वह बार-बार खुद को बेकसूर बता रही थी, लेकिन जल्लाद ने एक झटके में उसका सिर धड़ से अलग कर
दिया।
वह आखिरी वक्त तक चीखती रही, "मैंने बच्ची को नहीं मारा। इस जहां में खुदा नहीं है, लेकिन खुदा मैंने उसे नहीं मारा। मैं तुम्हें कभी नहीं माफ करूंगी। यह अन्याय है।"
इस साल अब तक 10 लोगों को मिली ये सजा
उसका आखिरी शब्द यही था कि मैंने नहीं मारा और तभी जल्लाद ने तलवार से वार करके उसका सिर अलग कर दिया। यह सऊदी अरब में मौत की सजा देने की परंपरा है।
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद ट्विटर पर लोगों ने यह कहते हुए विरोध जताया कि वीडियो को महिला के घरवालों ने भी देखा होगा। लेकिन किसी ने इस तरीके से सजा देने का विरोध नहीं किया।
लैला उन 10 लोगों में से एक है जिनका इस साल सिर कलम किया गया है। पिछले साल यहां 87 लोगों को मौत की सजा दी गई थी जबकि 2013 में 78 लोग को यह सजा मिली। 2013 में ईरान और इराक के बाद मौत की सजा देने के मामले में यह तीसरा देश था।
यहां इन मामलों में मिलती है मौत की सजा
बताया जा रहा है कि बीते सप्ताह उसे पूर्व पति की बेटी की हत्या व रेप का दोषी ठहराते हुए यह सजा दी गई थी। हालांकि संयुक्त राष्ट्र संघ ने सऊदी अरब में मौत की सजा को पूरी तरह असंगत बताया है।
बता दें कि खाड़ी देशों में रेप, मर्डर, हथियार और ड्रग तस्करी के अलावा धर्म छोड़ने पर भी मौत की सजा का प्रावधान है।
प्रशासन के मुताबिक लैला मूल रूप से बर्मा की रहने वाली है। हालांकि वे यह नहीं बता पाए कि क्या वह रोहिंग्या मुस्लिम समुदाय से है। संयुक्त राष्ट्र ने इस समुदाय को सताए हुए अल्पसंख्यकों की श्रेणी में रखा है।