'वह 13 साल का लड़का नहीं, डरावना बलात्कारी था'
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अलीशिया कोजाकीविक्ज 13 साल की थीं जब वह अपने घर से चुपके से निकलीं और उस शख्स से मिलने चली गईं जिससे वह ऑनलाइन चैटिंग कर रही थीं। इसके बाद जो हुआ वह एक बड़ा दुःस्वपन था।
इसके बाद अलीशिया ने बच्चों को उस जाल से बचाना ही अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है जिसमें वो फंस गई थीं। और अब उनके नाम पर एक नया कानून बनाया गया है।
अलीशिया के नए कानून को अमेरिका में कई राज्य लागू कर रहे हैं। इसमें उन दलों को पैसा देने को प्रोत्साहित किया जाता है जो ऐसे बच्चों की तलाश करते हैं जो इंटरनेट पर फुसलाए जाने के बाद गायब हो गए हैं।
बीबीसी के आउटलुक कार्यक्रम में जो फिजेन ने अलीशिया से बात की और पूछा कि जिस आदमी ने उन्हें फुसलाया था, वो क्या बातें किया करता था।
अलीशिया की आपबीती उनकी ही जुबानी
मुझे लगता था कि वह मेरी ही उम्र का लड़का है। उसे वे ही चीजें पसंद थीं जो मुझे पसंद थीं। वही बैंड, वही फिल्में। दरअसल बच्चों को नहीं लगता कि वो स्मार्ट हैं, या लोकप्रिय हैं, या खूबसूरत हैं और फिर ऑनलाइन कोई मिलता है जो बताता है कि वे हैं- वे खास हैं, वे स्मार्ट हैं, वे सुंदर हैं। उस आदमी ने मेरे साथ यही किया। उसने मेरा विश्वास जीत लिया, मैं पहले भी बहुत जल्दी लोगों पर विश्वास कर लेती हूं।
2002 को नए साल की पार्टी में मैं उससे मिलने को तैयार हो गई। मैं शाम के खाने के दौरान बाहर आ गई। मैंने दरवाजा खुला छोड़ा हुआ था क्योंकि मैं बस हाय कहकर तुरंत वापस आने वाली थी। मैंने अपने माता-पिता को नहीं बताया था कि मैं कहां जा रही हूं या बाहर निकल रही हूं। मैंने अपनी मां को कहा कि मैं टेबल से उठ रही हूं क्योंकि मेरे पेट में दर्द हो रहा है और लेटने की बजाय मैं दरवाजे से बाहर निकल गई।
सड़कें बर्फ से अटी हुई थीं। मुझे याद है कि उस समय बहुत शांति थी, डरावनी किस्म की खामोशी। मैं कुछ दूर ही गई थी कि मन में आया कि अलीशिया तुम क्या कर रही हो, तुम्हें वापस लौट जाना चाहिए।
मैं सोचती हूं कि मेरे अंदर से यह आवाज काफी पहले आनी चाहिए थी। मैं बस मुड़ ही रही थी कि किसी ने मेरा नाम पुकारा और फिर मुझे यही याद है कि मैं गाड़ी में थी। यह सब इतना जल्दी हुआ था कि अपना नाम पुकारे जाने के बाद और गाड़ी में बैठने से पहले का कुछ भी मुझे याद नहीं। और वहां एक आदमी था। डरावना, वयस्क आदमी।
'वह मुझे घर के तहखाने में ले गया और...'
उसने मेरा हाथ पकड़ा हुआ था और मेरा हाथ मुझे कह रहा था कि चुप रहो, तुम्हारे लिए ट्रंक खाली कर दिया गया है। मुझे तुरंत अपनी जान के लिए खतरा महसूस होने लगा। मैं सड़कों के नाम देख रही थी और वह जाने-पहचाने से अनजाने में बदलते गए। वह गाड़ी चलाता रहा, चलाता रहा और आखिरकार वह एक टोल बूथ पर पहुंच गया।
जब भी मैं अपने मां-पिता के साथ टोल बूथ पर पहुंचती थी तो बूथ के अंदर बैठे महिला या पुरुष बहुत प्यार से बात करते, हाल-चाल पूछते और कभी लॉलीपॉप जैसा कुछ दे देते। मुझे उस समय सचमुच लगा कि अब मुझे बचा लिया जाएगा, वे आगे की सीट पर रोती हुई लड़की को देखेंगे और पूछेंगे कि क्या हुआ और मुझे मौका मिल जाएगा।
लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। पैसे लिए-दिए गए, छोटा सा गेट खुल गया और गाड़ी आगे निकल गई। आप उस डर को बयान नहीं कर सकते। शब्द ही नहीं हैं कि आप उस भावना को बता सकें जिससे आप गुजर रहे हैं कि कब यह आदमी गाड़ी रोकेगा और कब मुझे मार देगा, आगे क्या होगा?
वह लगातार पांच घंटे तक गाड़ी चलाता रहा और पीट्सबर्ग, पेन्सिल्वेनिया में मेरे घर से वर्जीनिया में अपने घर ले गया। वहां वह मुझे घर के तहखाने में ले गया, मेरे कपड़े उतार दिए, मेरे गले में कुत्ते का पट्टा डाल दिया और कहा कि तुम्हारे लिए बहुत मुश्किल होने वाली है, कोई बात नहीं रो लो।
'4 दिनों तक बलात्कार करने के बाद उसने खाना खिलाया'
मुझे याद आता है कि मैं कितनी बुरी तरह से रोना चाहती थी, दया की भीख मांगना चाहती थी, चीखना चाहती थी और उसे वह नहीं देना चाहती थी जो वह चाहता था। उसके बाद वह मुझे ऊपर ले गया और मेरा बलात्कार किया।
मैं जानती थी कि मेरे मां-पिता मुझे ढूंढ रहे होंगे। आज भी वह मेरे लिए जमीन-आसमान एक कर देंगे। मैं जानती थी कि वह मुझे प्यार करते हैं और चाहे कुछ भी हो जाए वह मुझे ढूंढ ही लेंगे। सवाल यह था कि वह मुझे जिंदा ढूंढ पाते हैं या मरा हुआ।
तब तक जिंदा रहने के लिए जो भी किया जा सकता था मैंने वह किया था, चाहे वह कितना भी घिनौना क्यों न रहा हो। आखिरी दिन उसने कहा कि मैं तुम्हें इतना पसंद करने लगा हूं कि मैं चाहता हूं कि तुम मेरे साथ घूमने चलो। और मैं समझ गई थी कि अब खेल खत्म हो गया। फिर चार दिन में उसने मुझे पहली बार खाना खिलाया और मेरे लिए यह आखिरी खाने की तरह था।
मैं वहां चुपचाप बैठी रही और अपने मां-पिता के बारे में सोचती रही कि उन पर क्या गुजर रही होगी। मैं उन्हें बताना चाहती थी कि मैं उन्हें कितना प्यार करती हूं और सोच रही थी कि पिछली बार मैंने कब उनसे कहा होगा कि वह चाहते हैं कि मैं उन्हें छोड़ दूं, मैं उनसे प्यार नहीं करती।
मेरी नींद दरवाजे को पीटने और चिल्लाने की आवाजों से टूटी। उस समय मैं उसके बेडरूम के पलंग से बंधी हुई थी। दरवाजा पीटने वाले लोग बंदूकों के बारे में कुछ बात कर रहे थे। मैंने सोचा कि वे लोग भी मुझे तकलीफ देने आ रहे हैं। मैं उनसे बचने के लिए बेड के नीचे घुस गई।
शायद अपनी तमाम कोशिशों के बावजूद मैंने कोई आवाज निकाली होगी। मैंने देखा कि कुछ बूट बेड के पास आए और एक आदमी ने मुझे बाहर निकलने का आदेश दिया और हाथ ऊपर करने को कहा। मुझे याद है कि मैं बेड के नीचे से निकलकर बाहर आ रही थी, अपने हाथ उठा रही थी और उसके साथ ही खुद को ढकने की कोशिश भी कर रही थी क्योंकि मैंने कपड़े नहीं पहने हुए थे और बंदूक की नाल को घूर रही थी।
'एक चमत्कार की तरह एफबीआई के लोग मुझे बचाने पहुंचे'
फिर वह पलटा और मैंने उसकी पीठ पर एफबीआई लिखा हुआ देखा। फिर एफबीआई एजेंट अंदर आए और मुझे जिंदगी का दूसरा मौका दिया। दरअसल मैं उस आदमी के कब्जे में थी तो मेरा यौन शोषण करते हुए उसने वीडियो को ऑनलाइन ब्रॉडकास्ट किया था। उसे देख रहे एक आदमी को लगा कि यह तो सचमुच एक बच्ची का यौन शोषण किया जा रहा है और वह उसे देखने की वजह से फंस सकता है।
वह डर गया और एक फोन से एफबीआई को सूचना दी। उस आदमी का एक स्क्रीननाम था, जिसके जरिए उसके आईपी एड्रेस का पता चला और फिर उसके कंप्यूटर तक और फिर मुझ तक एफबीआई पहुंच गई।
यह एक विशुद्ध चमत्कार था। अगले दिन मेरे माता-पिता आ गए। मुझे याद है कि मेरे पिता दौड़कर आए और मुझे गले लगा लिया। और अगर कभी आपको मेरे पिता से बात करने का मौका मिले तो वह आपको सबसे अच्छा पिता वाला जुमला दे सकते हैं।
वह बताते हैं कि यह गले लगाना एक जादुई चीज थी और वह सचमुच थी। मैं तब तक सुरक्षित नहीं थी, तब तक उस नरक से मुक्त नहीं हुई थी, जब तक मैं अपने पिता की बांहों में नहीं आ गई थी। क्योंकि मैं जानती थी कि कोई भी, कभी भी मुझे तब तक तकलीफ नहीं पहुंचा सकता जब तक वह मेरे पास हैं।
इंटरनेट के खतरों से बच्चों को बचाने की मुहिम
इस घटना के एक साल बाद मैंने इंटरनेट के खतरों के बारे में सार्वजनिक रूप से बोलना शुरू किया (स्कूल के विद्यार्थियों और अन्य लोगों से) क्योंकि यह एकदम नई तरह की परिस्थिति है। लोग यह नहीं समझ सकते कि इंटरनेट पर बच्चों को कैसे फुसलाया जाता है? लोग उनके बारे में अच्छी बातें नहीं करते।
मुझे और मेरे परिवार को यह समझ आया कि ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इंटरनेट सुरक्षा को लेकर कोई शिक्षा नहीं है। इसलिए हमने तय किया कि हम बच्चों को इस बारे में बताएं।
मुझे याद है कि जब पहली बार मैं इस बारे में बता रही थी तो मुझे बहुत शर्म आ रही थी और मैं अपनी कहानी को अच्छी तरह से बयां नहीं कर पाई। मुझे लगता है कि मैं वहां बस खड़ी रही और बस कुछ शब्द ही कह पाई और रोती रही। उसके बाद बहुत सारे बच्चे मेरे पास आए और कहा कि वाह, हम समझ गए।
और मुझे बहुत अच्छा लगा कि मैं इन बच्चों की मदद कर पा रही हूं। हमारे साथ बहुत भयावह घटनाएं होती हैं और हमें उस अफरा-तफरी में ही एक उद्देश्य तय करना होता है। मैंने भी यही किया- इस भयावह घटना को एक उद्देश्य में बदल दिया।