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दोस्ती और दुश्मनी का गैंगवार में खुला ‘खेल’

Wed, 24 Sep 2014 11:44 AM IST
Updated Wed, 24 Sep 2014 11:44 AM IST
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Fears of gang war

यूपी के मेरठ में योगेश और उधम की दोस्ती और दुश्मनी की तमाम बातों के बीच फिर गैंगवार की बात दोहरायी गई। पुलिस से घिरे उधम सिंह ने खुलेआम दुश्मनी निभाने का ऐलान किया। उसके ऐलान के बाद गैंगवार की आशंका बढ़ गई है। पिछले दिनों कचहरी में हुए नितिन हत्याकांड और रोहटा एवं रतौली में हत्याकांडों के बाद उधम सिंह ने कहा कि उसकी पत्नी को बेवजह फंसाया गया है।

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उधम बोला कि बदला लिया जाएगा। उधम ने यहां तक कह दिया कि योगेश के आगे पीछे घूमने वाली घूमने वाली पुलिस उससे किनारा करती है। दोस्ती और दुश्मनी का गैंगवार में बदमाशों का खुला खेल चलता है। दोनों सरगना जेल में पहुंचते ही समझौते का सिलसिला चलाते है, ताकि फिर एक दूसरे का खून बहा सके। दोनों का गठजोड़ भी गजब का है। जेल में बैठकर अपने अपने शूटरों से हत्या का बदला हत्या से लेते हैं।
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20 साल की उम्र में ऊधमसिंह ने अपराध की दुनिया में कदम रखा था। लूटपाट, जानलेवा हमले और अपहरण जैसी वारदात से ऊधम ने शुरूआत की थी। उसकी दुश्मनी गांव करनावल के सतीश चेयरमैन से चली। दोनों में लंबा सिलसिला चला।
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उधर, भदौड़ा गांव में योगेश और विरेंद्र चौधरी में गैंगवार शुरू हो गई। करनावल और भदौड़ा गांव में खूनखराबा होने लगा। ऊधम, सतीश और योगेश, विरेंद्र को पुलिस ने सलाखों के पीछे पहुंचाया। सन 2004 में दोनों गैंगवारों का खत्म करने की खातिर क्षत्रिय लोगों की पंचायत बैठी। समझौते की मोहर लगने पर चारों जेल से बरी हो गए।

बड़ा भाई, छोटा भाई बने थे दोनों

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उसके बाद बिजेंद्र प्रमुख जिंजोझर गैंग में योगेश भदौड़ा और ऊधमसिंह की एंट्री हो गई। योगेश और ऊधम की दोस्ती लंबी चली। दोनों ने अपने अपने अलग अलग गैंग बना लिए। ऊधम की नजर किनौनी मिल की खोई के ठेके पर गई।

31 अक्टूबर 2011 में ऊधम ने योगेश के भाई प्रमोद की भदौड़ा गांव में धर्मपाल की तेहरवी पर गोलियां बरसाकर हत्या कर दी। उसके बाद योगेश और ऊधम की दुश्मनी गैंगवार में बदली। योगेश ने भाई की हत्या का बदला लेने के लिये ऊधम पर गाजियाबाद की कोर्ट में हमला भी किया। इसके बाद दोनों पुलिस के हत्थे चढ गए।

जेल में फिर एक नाटकीय समझौते की बात चलाई। इसके पीछे रणनीति ये कि किसी तरह जेल से बाहर आ सकें। सलाखों में होने के बावजूद भी दोनों गैंगों के विश्वसनीय शूटरों की हत्या बंद नहीं हुई। दोनों में दोस्ती और दुश्मनी में पुलिस की भूमिका भी कम नहीं है। दोनों गांवों के ग्रामीणों ने पुलिस अफसरों के पास समझौते के शपथ पत्र तक लगाए।

दिसंबर 2013 में भूपेंद्र बाफर ने योगेश और ऊधम का हाथ मिलाने का प्रयास किया था। जेल से कचहरी में पेशी के दौरान ऊधम योगेश को बड़ा भाई बताता था। वहीं योगेश भी ऊधम को छोटा भाई बताया करता था। दोनों ने एक दूसरे के पक्ष में अपने अपने लोगों से बयान भी कराए। डॉ. सुभाष मलिक और नितिन उर्फ गंजा की हत्या के बाद गैंगवार की नींव रखी गई। हालांकि इससे पहले योगेश के भतीजे अजय मलिक की हत्या के बदले में योगेश ने कृष्णपाल प्रधान के बेटे कपिल निवासी भदौड़ा का मर्डर किया था।

ऊधम की चेतावनी, 'बदला लिया जाएगा'

Fears of gang war

ऊधमसिंह कड़ी चौकसी में मंगलवार को कचहरी में लाया गया। प्रमोद भदौड़ा व रश्मि हत्याकांड के मामले में उसकी तारीख थी। पुलिस कस्टडी में ऊधम ने पेशी के दौरान योगेश भदौड़ा के खिलाफ ऐलान किया।

उसने कहा कि रोहटा में डॉ. सुभाष मलिक, रतौली के शैलेंद्र उर्फ शालू व रमेश की हत्या में उसकी पत्नी गीतांजलि को फर्जी फंसाया है। पुलिस से योगेश की अच्छी दोस्ती है, जिसके चलते उसकी पत्नी को बेवजह फंसाया गया। गैंगवार की शुरूआत बताकर ऊधम ने चेतावनी दी कि बदला लिया जाएगा।

पुलिस के मुताबिक ऊधम ने बताया कि कचहरी में नितिन उर्फ गंजा का मर्डर में उसके परिजनों ने योगेश और उसके परिवार को नामजद किया है। लेकिन डॉ. सुभाष मलिक, शैलेंद्र व रमेश में योगेश की साठगांठ से गीताजंलि को नामजद किया गया। इंस्पेक्टर सिविल लाइन आलोक सिंह ने बताया कि ऊधम ने योगेश को धमकी दी है। जिसका तस्करा जीड़ी में दर्ज किया गया।

अभी तो शुरूआत है
ऊधम ने योगेश से चली गैंगवार को शुरूआत बताते हुए कहा कि इसका खात्मा मरते दम तक होगा। गैंगवार में कितने लोग मरेंगे, कौन नहीं जानता। ऊधम की खुली चेतावनी सुन पुलिस ने उसको हड़काया। इसके बावजूद भी ऊधम के चेहरे पर फर्क नहीं था। पुलिस कस्टडी में ऊधम ने एक पुलिसकर्मी पर टिप्पणी भी की। उसने कहा कि पुलिस योगेश के इशारे पर आगे पीछे चलती है।

धमकी के पीछे क्या है रण्नीति

Fears of gang war

ऊधम की खुली चेतावनी के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच हुआ है। पुलिस जिला जेल में जाकर योगेश के बयान दर्ज करेंगी। योगेश के बयानों के आधार पुलिस ऊधम के खिलाफ केस दर्ज कर सकती है। पुलिस ऊधम पर ओर शिकंजा कस सकती है।

उधम सिंह के इस ऐलानिया बयान के पीछे कई मतलब निकाले जा रहे हैं। यह भी माना जा रहा है कि उधम सिंह की धमकी के बीच कचहरी में उसकी सुरक्षा भी उसके गैंग के लिए महत्वपूर्ण मामला है। पिछले दिनों नितिन को बड़ी आसानी से कचहरी में मार दिया गया।

जिस तरह से पिछले दिनों कई हत्याएं हुईं, उससे संभव है कि उधम सिंह को अपनी सुरक्षा का डर भी सता रहा हो। उधम सिंह ने इसी बाबत पुलिस पर योगेश के इशारों पर काम करने का आरोप लगाया। ऐसे में यह संभव है कि उधम सिंह की इस धमकी के बाद पुलिस गैंगवार की आशंका के बीच उधम सिंह की सुरक्षा को और कड़ा कर दे।

इससे कम से कम पेशी पर आने के दौरान उधम सिंह को सुरक्षित रहने में मदद मिलेगी। वहीं दूसरी और यह भी माना जा रहा है कि उधम सिंह गैंगों की इस दुश्मनी के बीच अपने गैंग को मजबूत दिखाने के लिए ऐलानिया धमकी दे रहा हो। उसकी पत्नी के जेल जाने के बाद भी उसके गैंग का दबदबा कायम रहे, इसलिए भी यह बयान दिया सकता है।

योगेश और ऊधम की गैंगवार थामने में पुलिस ‘फेल’

Fears of gang war

योगेश और ऊधम की गैंगवार थामने में पुलिस ‘फेल’ हो चुकी है। जेल व कचहरी में हत्या की प्लान बनाकर शूटरों को टारगेट सौंप देते है। कौन, कहां और कब मारना है, यह सब पहले से तय होता है। वारदात के बाद जागती और कुछ दिन बाद फिर सो जाती है।

योगेश और ऊधम पर शिकंजा कसने में पुलिस की सांस फूल जाती है। नितिन उर्फ गंजा की हत्या के बाद गैंगवार को देखते दोनों की जेल में पेशी वीड़ियों कांफ्रेसिंग से कराने की बात चली थी। लेकिन पुलिस और प्रशासन के इस दावे की भी हवा निकल गई।

कचहरी में पेशी के दौरान दोनों बदमाशों से खुलेआम बातचीत होती थी। हालांकि नितिन की हत्या के बाद पुलिस ने कुछ शिकंजा जरूर कसा, लेकिन फर्क कुछ नहीं पड़ा। सच्चाई तो यह है कि दोनों के गैंगवार खत्म करने का पुलिस ने अभी तक प्लान ही नहीं बताया।

कौन से अपराधी के पास कितने शूटर है, इसकी सही जानकारी पुलिस को नहीं है। पुलिस कहती योगेश पूर्वाचल के शूटरों से हत्याएं कराता है। सवाल उठता है कि जब पुलिस को इसकी जानकारी है तो उन पर शिकंजा क्यों नहीं करती।

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