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'मैं 45 मिनट चिल्लाती रही, किसी ने मेरी नहीं सुनी'

Fri, 26 Feb 2016 03:52 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 26 Feb 2016 03:52 PM IST
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Egged on by cops, crew lock Bengaluru girl in bus

''मैं 45 मिनट तक बस में चिल्लाती रही। लेकिन किसी ने मुझे बाहर नहीं आने दिया। मुझे घंटे भर बस में जबरन कैद रखा। बस मैन रोड पर पुलिस स्टेशन के सामने थी। बाहर पुलिस भी खड़ी थी। मेरी मदद करने के बजाय पुलिस वालों ने मेरे खिलाफ ही बाहर खड़ी भीड़ को उकसा दिया। बिना महिला पुलिस के मुझे जबरन पुलिस स्टेशन में जाने के लिए मजबूर किया गया।''

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बेंगलुरू के येहलांका स्थित डिजाइन स्कूल की छात्रा ने जब अपनी आपबीती फेसबुक पर कुछ यं बयां की तो बेंगलुरू पुलिस बगलें झांकने को मजबूर हो गई। आला अधिकारियों ने मामले पर तुरंत संज्ञान लेते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी।
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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक स्कूल से लौटते वक्त छात्रा को '402B, KA8022' नंबर की बस में करीब घंटे भर बंद रखा गया।
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छात्रा के मुताबिक उसके उत्तर भारतीय मित्र और बस के कंडक्टर का आपस में झगड़ा हो गया था। जिसके चलते ये सब बखेड़ा खड़ा हो गया।

छात्रा कि मुताबिक वो महिला आरक्षित सीट पर बैठी हुई थी, उसका मित्र उसी की सीट के पास खड़ा था। दोनों आपस में बातें करते हुए जा रहे थे। तभी कंडक्टर ने उसके मित्र को टोका। दोनों में बहस हुई। गाली गलौच हुई। बात मारपीट पर आ गई।

'पुलिस ने मदद करने के बजाय धमकी दी'

Egged on by cops, crew lock Bengaluru girl in bus

छात्रा के मुताबिक कंडक्टर पर उसके मित्र का दांव लगा तो उसने भी धक्का दिया और बस छोड़कर भाग गया। इस बात पर बस कंडक्टर ने एनईएस पुलिस स्टेशन के सामने बस को रोका और बस में सवार लोग नीचे उतर गए। छात्रा को बस में ही बंद कर दिया गया। पुलिस भी मौके पर आ गई।

छात्रा के मुताबिक पुलिस को देखते ही उसे मदद की उम्मीद हुई लेकिन पुलिस ने मदद करने के बजाय उसे धमकाया कि जब तक उसका मित्र लौटकर नहीं आता तब तक वो बस में ही बंद रहेगी।

छात्रा की मानें तो पुलिस ने ताने दे रही भीड़ को भी छात्रा के खिलाफ उकसाया, जिन्होंने उसे खूब बुरा-भला कहा। छात्रा के मुताबिक शाम के साढ़े सात बज चुके थे और कानूनन साढ़े छह बजे के बाद किसी महिला को बिना महिला सिपाही के थाने में नहीं ले जाया जा सकता, फिर भी उसे जबरन थाने में जाने के लिए पुलिसवालों ने दबाव डाला।

छात्रा ने हालात बेकाबू होते देख बस के अंदर से ही अपने कुछ मित्रों से फोन पर संपर्क किया, थोड़ी देर में वे आए और छात्रा को बचाने में मदद की।

फेसबुक पोस्ट से पुलिस हरकत में आई

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मामले की शिकायत लेकर छात्रा येहलांका स्थित पुलिस स्टेशन में पहुंची तो पुलिस अधिकारी एनआर नागराज ने उससे कहा कि वो मामले की शिकायत न करे। इससे कोई फायदा नहीं है। उसे वर्षों तक कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ेंगे।

लेकिन छात्रा ने अपनी आपबीती फेसबुक पर बयां की तो पुलिस के आला अधिकारियों ने उसकी पोस्ट को मामले का आधार बनाकर बतौर शिकायत दर्ज किया और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया।

डीसीपी पीएस हर्षा के मुताबिक इस केस में आरोपी कंडक्टर उमाशंकर को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने पीड़िुत छात्रा से प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए कहा लेकिन छात्रा ने एफआईआर दर्ज न करने का फैसला किया है।

बस सर्विस देने वाली बीएमटीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर ने कहा है कि कंडक्टर के ऊपर लड़के ने भी हमला किया। ऐसे में कानून किसने तोड़ा? इस केस में दो वर्जन निकल रहे हैं। फिर भी अगर कंडक्टर की गलती पाई जाती है तो हम उसके खिलाफ एक्शन लेंगे।

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