मौत की नींद सुलाने वाला 'डॉक्टर डेथ' गिरफ्तार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस डॉक्टर के पास दवा नहीं मौत मिलती है। तीन दर्जन लोग इसके इलाज की बलि चढ़ गए हैं। ये इलाज के बाद मरीज को घर नहीं सीधा स्वर्ग पहुंचाता है। ये बातें हम नहीं, पुलिस कह रही है। इस डॉक्टर को 36 लोगों को मौत की नींद सुलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
भारतीय मूल के मनोचिकित्सक नरेंद्र नागारेड्डी को जॉर्जिया की पुलिस ने 'डॉक्टर डेथ' यानी मौत के डॉक्टर का तमगा दिया है। पुलिस की मानें तो तीन दर्जन मृतकों में 12 ऐसे भी शामिल हैं जिनकी मौत दवाओं के ओवरडोज से हुई है।
मरीजों की मौत के इजाफे ने पुलिस का ध्यान जल्लाद डॉक्टर की तरफ खींच लिया और करीब 40 लोगों की टीम ने दफ्तर और घर में छापा मारकर नागारेड्डी को धर-दबोचा।
पुलिस के मुताबिक नागारेड्डी के ठिकानों से कई ऐसी दवाएं बरामद हुई हैं जिनका एक मनोचिकित्सक के जरिए की किए जाने वाले इलाज में कोई स्थान नहीं हैं। इन दवाओं में कई नशीली दवाएं भी शामिल हैं।
इलाज के लिए दर्द और नशे की दवाएं देता था 'डॉक्टर डेथ'
जानलेवा प्रेसक्रिप्शन लिखने और गलत दवाओं से इलाज करने के जुर्म में गिरफ्तार नागारेड्डी जॉर्जिया के क्लेटाउन काउंटी में बतौर मनोचिकित्सक काम करता है। डॉक्टर पर आरोप है कि गलत इलाज करने के साथ-साथ दवाओं का एक कारखाना भी चलाता है।
मिरर की खबर के मुताबिक नागारेड्डी को गिरफ्तार करने के बाद क्लेटाउन काउंटी के जिला अटॉर्नी ग्राहम लोसन ने बताया कि ये डॉक्टर लोगों दर्द की वो दवा भी लिखता था जो इसके पेशे में शामिल ही नहीं है।
जांच में ये बात भी सामने आई है कि नागारेड्डी ने इलाज में नशे की दवाओं का भी इस्तेमाल किया। वहीं कुछ मौजूदा और कुछ इलाज करा चुके मरीजों के कागजातों को खंगालने पर पता चला कि नागारेड्डी बिना जरूरत के ही उन्हें दवाएं दे रहा था।
क्लेटाउन काउंटी के मुख्य पुलिस अधिकारी ने कहा है कि अगर इस डॉक्टर पर लगे सारे इल्जामात सही है तो बेशक ये मौत की नींद सुलाने वाला डॉक्टर यानी डॉक्टर डेथ है।
'डॉक्टर डेथ' की सारी संपत्ति जब्त
जिला अटॉर्नी के दफ्तर से ये भी पता चला है कि पुलिस ने इस नागारेड्डी की सारी संपत्ति जब्त कर ली है।
नागारेड्डी के एक मरीज, जिसकी पहचान 2 बच्चों की मां ऑडरी ऑस्टिन के रूप में हुई, उसकी मौत उसे दी गई नशे की दवाओं की ओवरडोज से हुई। जिसका प्रेसक्रिप्शन नागारेड्डी ने ही लिखा था।
नागारेड्डी को मेडिकल प्रेक्टिस के लिए साल 1999 में लाइसेंस जारी किया गया था तब से डॉक्टर के प्रेसक्रिप्शन को लेकर कई ऑनलाइन शिकायतें आईं लेकिन इस डॉक्टर ने उन पर अमल नहीं किया।