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'प्रेमी के साथ भागती हैं, फिर रेप की फर्जी कहानी बनाती हैं'

Fri, 18 Oct 2013 01:57 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 18 Oct 2013 01:57 PM IST
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delhi court comments on fake rape and kidnaping cases

अदालत ने अपहरण व रेप के फर्जी मामले दर्ज करवाने की प्रक्रिया पर नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों के कारण ही रेप और अपहरण के असली मामलों में अपराध की गंभीरता कम हो जाती है।

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अदालत ने रेप के आरोप से युवक को रिहा करते हुए कहा कि स्पष्ट है कि शिकायतकर्ता अपने प्रेमी के साथ स्वेच्छा से गई थी लेकिन माता-पिता की डांट से बचने के लिए फर्जी मामला दर्ज करवा दिया।
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दिल्ली की द्वारका अदालत में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विरेंद्र भट्ट ने फैसले में ऐसे मामलों पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि लड़की अपनी इच्छा से अपने प्रेमी के साथ भाग जाती है। वे दोनों अपने रिश्ते बनाते है और फिर घर लौट आते हैं। इसके बाद लड़की माता-पिता की डांट से बचने के लिए आसानी से अपने अपहरण व रेप की फर्जी कहानी बना देती है।
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अदालत ने कहा इस प्रकार के फर्जी मामलों से रेप के मामले भी तुच्छ हो जाते हैं और अपराध की गंभीरता कम हो जाती है। अदालत ने मामले में आरोपी बनाए गए युवक को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।


उस युवक पर अपनी गर्भवती पत्नी की देखभाल के लिए गांव से आई उसकी बहन से रेप और अपहरण का आरोप था।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, वर्ष 2008 में आरोपी युवक पीड़िता को जम्मू ले गया और उसकी मांग में सिंदूर भर दिया कि वह उसकी पत्नी हो गई। पीड़िता ने स्वयं को उसकी पत्नी मान लिया और दोनों ने शारीरिक संबंध बनाए।

अदालत ने पीड़िता के बयानों को संदेह के दायरे में लेते हुए आरोपी को बरी कर दिया।

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