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20 हजार फाइलों में छिपा है हत्या का राज

Wed, 16 Apr 2014 10:59 AM IST
Updated Wed, 16 Apr 2014 10:59 AM IST
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curious case of murder

आरटीआई एसोसिएशन के कार्यकर्ता मंगत सिंह त्यागी की हत्या क्यों और किसलिए की गई, इसका राज उनके कमरे में बंद 20 हजार फाइलों में छिपा है। इस कमरे में अमूमन वह किसी को नहीं जाने देते थे। उनके नजदीकियों का मानना है कि इन फाइलों में कई विभागों-अफसरों का काला चिट्ठा है जिनमें उनसे रंजिश रखने वालों की जानकारी मिल सकती है।

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गौरतलब है कि सात वर्षों से गरीब, मजदूर और मजबूरों के लिए संघर्ष करने वाले मंगत सिंह त्यागी की जान  भी भ्रष्टाचार के बड़े खुलासे के डर से की गई है। त्यागी ने करीब 14000 से अधिक आरटीआई दाखिल कर विभिन्न विभागों में होने वाले भ्रष्टाचार का खुलासा किया था।
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उनकी एसोसिएशन की हापुड़ इकाई की जिलाध्यक्ष बबली सिंह व जिला उपाध्यक्ष विजय पाल जाटव का कहना था कि पुलिस इन फाइलों को खंगाले तो उनकी हत्या की गुत्थी आसानी से सुलझ सकती है। बिजली निगम में करोड़ों रुपये के घोटाले की महत्वपूर्ण फाइल भी इसी कमरे में है।
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20 हजार लोग जुड़े थे 9 राज्यों में

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पूर्व प्रधानमंत्री और किसानों के मसीहा स्व.चौधरी चरण सिंह के साथ राजनीति की शुरुआत करने वाले मंगत सिंह त्यागी रालोद के सच्चे सिपाहियों रहे थे। सियासी दलों में पनप रहे भ्रष्टाचार को देख उन्होंने राजनीति से तौबा कर ली। करीब सात वर्ष पहले मंगत सिंह त्यागी ने आरटीआई संगठन खड़ा कर भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल फूंका था।

वर्ष 2007 में त्यागी ने आरटीआई एसोसिएशन ऑफ इंडिया नाम से संस्था का गठन किया। इसका मुख्यालय उन्होंने गांव बनखंडा में ही बनाया। जबकि पंजीकृत कार्यालय 40 (ए) गौतमबुद्धनगर में बनाया। वर्ष 2012 में एसोसिएशन रजिस्टर्ड हुई तो उन्होंने यूपी, उत्तराखंड, बिहार, कर्नाटक, राजस्थान, जम्मू एंड कश्मीर, मध्यप्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में इसकी शाखाएं खोली। इस संगठन को नौ राज्यों में 20 हजार से कार्यकर्ता हैं। जबकि संस्था 30 हजार से आरटीआई दाखिल कर चुका है।

आरटीआई एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने बताया कि वह दो सालों से त्यागी के साथ्‍ा काम कर रहा था। इस दौरान उन्होंने विद्युत निगम, सिंभावली शुगर मिल और गढ़मुक्तेश्वर में डिफेंस की जमीन पर अवैध कब्जे के मामले को जोरशोर से उठाया। इसके लिए कई बार उन्हें जान से मारने की धमकी भी मिल चुकी थी।

तीन के खिलाफ मामला दर्ज

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आरटीआई कार्यकर्ता मंगत सिंह त्यागी हत्याकांड में छोटे भाई अशोक की शिकायत पर बाबूगढ़ पुलिस ने तीन अज्ञात हमलावरों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। हत्यारोपियों की तलाश के लिए पुलिस की दो टीमों का गठन किया गया है।

मंगलवार सुबह जिलाधिकारी और अपर पुलिस अधीक्षक मौका-ए-वारदात पर पहुंचे। इस मौके पर आरटीआई कार्यकर्ताओं ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की तो जिलाधिकारी ने उन्हें एसटीएफ से जांच कराने का आश्वासन दिया।

जिलाधिकारी आरके सिंह ने प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह को मंगत सिंह त्यागी हत्याकांड के संबंध में रिपोर्ट और मामले की जांच एसटीएफ से कराए जाने का अनुरोध किया है।

दो सीसीटीवी कैमरे बताएंगे घटनाक्रम

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मंगत सिंह त्यागी के हत्यारे कौन सी गाड़ी में आए..., उनकी संख्या कितनी थी.... वह किस रास्ते से फरार हुए... इन तमाम सवालों के जवाब पुलिस गांव बनखंडा में मृतक के घेर के पास स्थित भारत गैस गोदाम और पेट्रोल पंप पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में तलाश रही है।

गोदाम में कुल चार कैमरे लगे हैं। इनमें से एक गोदाम के बाहर लगा हुआ है। दूसरी ओर गांव के पास पेट्रोल पंप पर भी सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। सोमवार रात की इनकी फुटेज में मंगत सिंह त्यागी के हत्यारों की सुरागरसी की जा रही है।

हालांकि इन कैमरों को चलाने वाला इंजीनियर दिल्ली से बुलवाया गया है।  सीओ विशाल यादव ने बताया कि फुटेज के आधार पर हमलावरों की पहचान करने में आसानी होगी। साथ ही हमलावरों की कार का रंग और नंबर के आधार पर भी पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगेंगे।

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