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दूध से लेकर 'खून' तक, पढ़िए डीपी यादव की क्राइम कुंडली

Fri, 27 Mar 2015 04:04 PM IST
Updated Fri, 27 Mar 2015 04:04 PM IST
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crime profile of dp yadav jailed on bhati murder case

माफिया डॉन, राजनीतिक बाहुबली, पश्चिमी यूपी का बेताज बादशाह, जैसे संबोधनों से जाना जाने वाला डीपी यादव हत्या के 23 साल पुराने मामले में जेल पहुंच गया। पश्चिमी यूपी से लेकर पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश में भी अपना साम्राज्य फैलाने वाले डीपी यादव की कहानी भी पूरी फिल्मी है।

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चार बार विधायक और दो बार सांसद रह चुके डीपी यादव ने 1970 में अवैध शराब का कारोबार शुरू किया। हालांकि की जैसे-जैसे उसका कारोबार फैला, अपराध की दुनिया में उसका ग्राफ भी बढ़ता गया। उस पर नौ लोगों की हत्या के आरोप लगे।
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1992 में उस पर दादरी के विधायक महेंद्र भाटी की हत्या का आरोप लगा। विधायक की हत्या के बाद उसकी मुसीबतें बढ़ीं, लेकिन राजनीतिक रसूख के चलते वह कानून के शिकंजे से बचता रहा। समाजवादी पार्टी और भाजपा का दामन थाम कर उसने अपना राजनीतिक कद और बढ़ाया। विधानसभा से लेकर संसद तक का सुख भोगने वाले डीपी यादव के काले कारनामों की कुंडली एक नजर में-
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डीपी यादव की अथाह संपत्ति और उसके धंधे

crime profile of dp yadav jailed on bhati murder case

डीपी यादव नोएडा के एक छोटे से गांव शरफाबाद में एक किसान के घर पैदा हुआ था, जो कि जगदीश नगर में दूध की डेयरी चलाता था। दूध के कारोबार से चीनी मिल, पेपर मिल, शराब और शराब से जुड़े अन्य कारोबारों में डीपी यादव ने किस्मत आजमाई। कारोबार और वर्चस्व दोनों को बढ़ाने की धुन में उसके हाथ खून से रंगते गए।

वह होटल, रिसॉर्ट, टीवी चैनल, पॉवर प्रोजेक्ट, खदानें और कंस्ट्रक्शन कंपनी का भी मालिक है। उसने लड़कियों के लिए अपने गांव में स्कूल भी बनवाया।

1989 के बाद से वह कई बार उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रहा और सांसद भी बना, जिससे उसकी ताकत लगातार बढ़ती रही। उसकी पत्नी ने यूपी विधानसभा का चुनाव जीता, लेकिन अक्तूबर 2011 में चुनाव खर्च का ब्यौरा न देने के चलते चुनाव आयोग ने उसकी सदस्यता रद्द कर दी।

उसका बेटा विकास यादव चर्चित नीतीश कटारा हत्याकांड में जेल की सजा काट रहा है। उसका एक और बेटा है जो कि बिजनेस संभालता है।

उसके परिवार ने अपनी कुल संपत्ति 26 करोड़ रुपए घोषित की है। जिसके आधार पर वह यूपी का सबसे अमीर नेता है। यह उसका घोषित संपत्ति है, लेकिन कहा जा रहा है कि उसकी अघोषित संपत्ति करीब पांच अरब है।

अपराधों के दलदल से राजनीति के दंगल तक

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1970 में अवैध शराब का कारोबार शुरू करने वाले डीपी यादव के ही एक ठेके की जहरीली शराब पीकर करीब 350 लोगों की जान चली गई। यह घटना 1990 की शुरुआत में घटी थी। अपराधों के दलदल में फंसते जा रहे यादव को उसके साथियों ने राजनीति में आने की सलाह दी ताकि वह सुरक्षित रहे।

उसने सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव से दोस्ती बढ़ाई और सपा का दामन थाम लिया। सपा की साइकिल पर सवार डीपी यादव ने 1989 में विधानसभा का चुनाव जीता और मुलायम की कैबिनेट में जगह बनाई। इसके साथ ही उसका वर्चस्व बढ़ता गया और उसके खिलाफ लगे आपराधिक मामलों की फाइल दबती गई।

2004 में उसने भाजपा का दामन थामा और राज्यसभा से सांसद बन गया लेकिन आलोचना का शिकार होने के बाद भाजपा ने चंद दिनों में उसकी छुट्टी कर दी।

2007 में उसने राष्ट्रीय परिवर्तन दल बनाया। इसके दो सदस्यों ने विधानसभा चुनाव जीता। जिनमें से सहसवान विधानसभा से वह खुद था और बिसौली से उसकी पत्नी उमलेश यादव ने जीत दर्ज की।

2009 में वह मायावती की बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गया और लोकसभा का चुनाव लड़ा, हालांकि हार गया। उसने 2012 में यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बसपा छोड़ दी। वह सपा में शामिल होना चाहता था लेकिन आपराधिक रिकॉर्ड के चलते उसे वहां भी जगह नहीं मिली। उसने खुद अपनी पार्टी से चुनाव लड़ा लेकिन फिर हार गया।

ये है डीपी यादव के अपराधों की काली डायरी

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गाजियाबाद के ब्लॉक प्रमुख रहे महेंद्र सिंह भाटी के सहयोग से डीपी यादव ने 1970 में शराब का कारोबार शुरू किया। यादव के खिलाफ पहला आपराधिक मामला 1979 में गाजियाबाद के कविनगर थाने में दर्ज किया गया।


उसके बाद डीपी यादव की क्राइम कुंडली लंबी होती चली गई। उसके खिलाफ हत्या के नौ मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा हत्या के प्रयास के तीन, डकैती के दो, अपहरण और फिरौती के कई मामलों समेत, उत्पादन शुल्क एक्ट के तहत भी मामले दर्ज हुए। यही नहीं, उस पर गैंगस्टर, आतंकी और विघटनकारी गतिविधियों के मामले में भी केस दर्ज हुए।

उसके खिलाफ गाजियाबाद, मोदीनगर, बुलंदशहर, मुरादाबाद, बदायूं समेत पश्चिमी यूपी के कई जिलों में आपराधिक मामले दर्ज हुए। इसके साथ ही हरियाणा के जींद और सिरसा में भी उसका खौफ बढ़ा।

1990 हरियाणा में ही उसके खिलाफ अवैध शराब की सप्लाई का केस दर्ज हुआ, जिसमें 350 लोगों की जान गई। 1991 तक उसके ऊपर 25 आपराधिक मामले दर्ज हो चुके थे।

जब कल्याण सिंह यूपी के मुख्यमंत्री थे तो डीपी यादव को रासुका के तहत गिरफ्तार किया गया। 1992 में सीबीआई ने उसे महेंद्र भाटी की हत्या का आरोपी बनाया। भाटी उस समय दादरी से विधायक थे।

कभी जिगरी यार थे भाटी और डीपी यादव

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कहा जाता है कि महेंद्र भाटी और डीपी यादव दोनों काफी गहरे मित्र थे। भाटी ने 1991 में बुलंदशहर विधानसभा सीट से उसे जनता दल का टिकट भी दिलवाया। यादव को विधायक बनवाने के लिए भाटी ने पूरा दम लगा दिया।

हालांकि डीपी यादव की निजी महात्वाकांक्षा उसे ले डूबी और वह भाटी का जानी दुश्मन बन गया। दादरी (गाजियाबाद) के तत्कालीन विधायक महेंद्र सिंह भाटी की 13 सितंबर 1992 में हत्या कर दी गई थी। भाटी गाजियाबाद क्षेत्र में अपने साथियों के साथ जा रहे थे।

घटना वाले दिन भंगेल रोड पर रेलवे फाटक बंद होने के कारण विधायक और उनके साथी फाटक खुलने का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान कुछ हथियारबंद बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। इसमें महेंद्र सिंह भाटी और उनके साथी उदय प्रकाश की मौत हो गई, जबकि ड्राइवर और गनर घायल हो गए।

सीबीआई के मुताबिक, यादव ने विधायक की हत्या के लिए बदमाशों को गाड़ियां उपलब्ध कराई थीं, जिन्हें घटना के बाद जला दिया गया। कोर्ट में अभियोजन पक्ष की ओर से 41 गवाह पेश किए गए और 28 फरवरी, 2015 को यादव को हत्या का दोषी ठहराया गया।

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