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कोलकाता: टॉयलेट में बंद करने से छात्रा की मौत, बवाल

Thu, 12 Sep 2013 09:25 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 12 Sep 2013 09:25 PM IST
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child girl locked up in school toilet

सीनियरों द्वारा रैगिंग से सहमी पांचवीं कक्षा की छात्रा के दम तोड़ने के बाद बृहस्पतिवार को उसके परिजनों ने स्कूल में जमकर बवाल किया। 11 वर्षीय ओइनद्रिला दास क्राइस्ट चर्च गर्ल्स हाई स्कूल में पढ़ती थी।

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पिछले हफ्ते सीनियरों ने इस बच्ची को पहले धमकाकर पैसे मांगे और बाद में उसे टॉयलेट में बंद कर दिया था। इसके चलते बच्ची बुरी तरह से सहम गई थी। बुधवार को एक निजी अस्पताल में आखिरकार उसकी मौत हो गई।
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मौत के बाद जमकर हंगामा

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने छात्रा की मां रेखा दास को उचित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। बच्ची की मौत से गुस्साए परिजनों ने बृहस्पतिवार को स्कूल में जमकर तोड़फोड़ की।
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यहां तक कि उन्होंने स्कूल प्रिंसिपल को बर्खास्त करने और उन्हें भीड़ के हवाले करने की मांग भी की। हालांकि पुलिस बल ने तुरंत मौके पर पहुंचकर हालात को काबू में किया। पुलिस अधिकारियों ने परिजनों को कानून में हाथ नहीं लेने का निवेदन भी किया।

इसके बाद मुख्यमंत्री ने लड़की की मां से फोन पर बात सांत्वना बंधाई और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रात्या बासु पहले ही घटना की जांच के आदेश दे चुके हैं।

उन्होंने इस घटना को काफी भयावह और दर्दनाक बताया। बाद में स्कूल प्रिंसिपल हेलेन सरकार व छह अन्य टीचरों ने परिजनों से माफी मांगते हुए उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

सुरक्षा की दृष्टि से अभिभावक अपने बच्चों को हॉस्टल से घर ले गए। छात्रा की मां ने एफआईआर में आरोप लगाया है कि स्कूल प्रशासन को इस बात की जानकारी थी कि कुछ सीनियर रैगिंग करते हैं।

क्या था मामला

दरअसल कोलकाता के क्राइस्ट चर्च स्कूल में पढ़ने वाली इस छात्रा को 100 रुपए के लिए कुछ सीनियर छात्राएं परेशान कर रही थीं। पैसे नहीं देने पर छात्रा को स्कूल के टॉयलेट में बंद कर दिया। डर से सदमे में आई लड़की की अस्पताल में मौत हो गई थी।

ओइनड्रिला दास की मां ने बताया कि चार सितंबर को कुछ सीनियर छात्राओं ने उनकी बेटी से 100 रुपए मांगे थे। न देने पर उन्होंने उसे टॉयलेट में बंद कर दिया।

स्कूल से छुट्टी होने पर वे घर चली गईं और ओइनड्रिला को टॉयलेट से बाहर निकालना भूल गईं। काफी देर बाद बच्ची की रोने की आवाज सुनकर एक सफाई कर्मचारी ने उसे बाहर निकाला।


उसे घर भेजा गया। वह डर के मारे बीमार हो गई, अस्पताल में इलाज के दौरान 11 सितंबर को उसकी मौत हो गई। लड़की की मां और मामा ने स्कूल प्रशासन पर लापरवाही का अरोप लगाया है।

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