CBI रिपोर्ट के बाद भी अनसुलझे हैं ये सवाल
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बदायूं कांड पर सीबीआई की रिपोर्ट आने के बाद अब उस पर सवाल खड़े होने लगे हैं। अब तक गैंगरेप, मर्डर और ऑनर किलिंग के आसपास घूम रही इस मिस्ट्री को सीबीआई की रिपोर्ट में सुसाइड का नया एंगल दिए जाने से नया ट्विस्ट आ गया है।
सीबीआई की रिपोर्ट आने के बाद कई सवाल अभी भी अनसुलझे हैं। एजेंसी ने अपनी जांच में उस व्यक्ति की बातों पर ज्यादा भरोसा किया जिस पर साजिश रचने का आरोप लग चुका है।
नजरू दोनों नाबालिग लड़कियों का मामा है। जांच में पता चला कि नजूर ने बड़ी बहन को उसके प्रेमी पप्पू यादव के साथ देखा था। इस मामले में नजरू की भूमिका शुरूआत से ही सवालों के घेरे में रही है।
नजरू ने पहले गांव के लोगों को बताया था कि गांव में कुछ चोर देखे गए हैं और बाद में उसने मामले को घुमाते हुए फिर बयान बदला और कहा कि उसने बड़ी लड़की को पप्पू के साथ देखा था।
आखिर 5 घंटे किसके साथ रहीं लड़कियां?
यही नहीं, नजूर ने मुआवजे के तौर पर दोनों लड़कियों के परिजनों को मिले एक लाख रुपए भी ले लिए। सीबीआई को अपनी क्लोजर रिपोर्ट में दोनों लड़कियों के परिजनों की राय और उनके बयान भी देने होंगे। जिसके बाद अदालत का फैसला अंतिम होगा।
सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दोनों लड़कियों ने 28 मई की रात करीब 2 बजे फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। उनकी लाश अगले दिन सुबह आम के पेड़ से लटकती मिली थी।
सवाल यह भी उठता है कि रात 9 बजे घर से गायब होने के बाद लड़कियां कहां गई और 2 बजे रात को आत्महत्या करने तक वह किसके साथ थीं? इस सवाल का जवाब सीबीआई के पास भी नहीं है। सीबीआई ने साफ किया कि कोई भी गवाह न होने के कारण यह बात अभी भी साफ नहीं हो सकी है। हांलाकि बड़ी बहन के पास मौजूद फोन रात करीब पौने 12 बजे तक ऑन था। टॉवर की लोकेशन के आधार पर वे दोनों उसी इलाके में मौजूद थीं। ऐसे में सीबीआई की थ्योरी पर सवाल उठ रहे हैं।
झूठी रिपोर्ट को सच मान बैठी सीबीआई?
सवाल यह भी है कि सीबीआई जांच से पहले ही यूपी पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम करा दिया था और उनकी लाश को गंगा किनारे दफना भी दिया गया था।
बाद में जब सीबीआई को जांच मिली तो दबाव में आकर शवों को दोबारा निकाला जाना था, लेकिन बाढ़ के चलते दोनों शव पानी में डूब चुके थे। सीबीआई ने पहले पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी आधार पर ही जांच को आगे बढ़ाया। इस कारण कई राज दब जाने का भर अंदेशा है।
सीबीआई की रिपोर्ट पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी और घटनास्थल के वीडियो और फोटो को के आधार पर ही बनाई गई है। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने लड़कियों के गले पर मिले निशान के जरिए घटना को सुसाइड बताया है लेकिन फोरेंसिक रिपोर्ट में इस बात को नकार दिया गया। ऐसे मामलों में घावों की माइक्रोस्कोपी जरूरी होती है जिसे नजरअंदाज किया गया है।
किसके डर से तोड़ दिया मोबाइल?
वहीं, सीबीआई ने यह भी कहा कि बड़ी लड़की और पप्पू यादव के बीच प्रेम संबंध का पता चलने के बाद परिजनों ने लड़की का मोबाइल तोड़ दिया था ताकि किसी को इस बारे में पता न चले। उन्होंने इसे सीबीआई और पुलिस से भी छिपाया।
हालांकि यह बात साबित हो चुकी है कि दोनों के प्रेम संबंध के बारे में पूरे गांव को पता चल चुका था। और उनकी खोज के दौरान दूसरे मोबाइल पर पप्पू और बड़ी लड़की की बातचीत भी कई लोगों को सुनाई गई थी।
ऐसे में अगर पूरे गांव को पता था कि उन दोनों के बीच संबंध है तो फिर किससे छिपाने के लिए परिजनों ने मोबाइल तोड़ दिया इस सवाल का जवाब भी नहीं मिला है।