ऑनर किलिंग में तीन सगे भाइयों को फांसी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
14 साल पहले हुई ऑनर किलिंग की घटना में तीन सगे भाइयों को फांसी की सजा सुनाई गई है। घटनाक्रम हाटा के मंगुरही पैकौली गांव का है। यहां रहने वाले रामजीत की 22 मई 2000 को हत्या कर दी गई थी।
मृतक के भाई रमेश की ओर से दर्ज कराए गए केस के मुताबिक रामजीत के गांव में ही रहने वाले सुरेंद्र की बहन से करीबी संबंध थे। दोनों मुंबई जाकर पति-पत्नी की तरह रहने लगे थे।
रामजीत की हुई थी हत्या
इस बीच उनके दो बच्चों का जन्म हुआ लेकिन कुछ साल बाद रामजीत और बच्चों को छोड़कर सुरेंद्र की बहन कहीं और चली गई। अकेले रामजीत पर दोनों बच्चों की परवरिश का जिम्मा आया तो 14 मई 2000 को वह वापस गांव आ गए।
रमेश की तहरीर के मुताबिक वह 22 मई 2000 की दोपहर भाई रामजीत के साथ खेत पर जा रहे थे। रास्ते में मौजूद सुरेंद्र और उसके भाई वीरेंद्र, गुड्डू उर्फ सत्येंद्र ने हमला कर दिया और तमंचे से गोली मारकर रामजीत की जान ले ली।
सिर काट कर खुले में दिखाया गया
यही नहीं मरने के बाद रामजीत के सिर को धड़ से अलग करके आबादी के बीच प्रदर्शित भी किया गया। पुलिस की तरफ से तीनों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल होने के बाद केस की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (छह) की अदालत में चल रही थी।
13 फरवरी को अदालत ने हत्या के आरोपी तीनों भाइयों को दोषी करार दिया था लेकिन तीनों फरार हो गए।
सजा ए मौत का फैसला
अदालत के आदेश पर तीनों के खिलाफ वारंट और कुर्की का आदेश जारी होने पर तीनों ने आत्मसमर्पण किया, जिसके बाद सोमवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश धनेंद्र प्रताप सिंह ने तीनों को फांसी और तीस-तीस हजार अर्थदंड की सजा सुनाई।
सजा में साक्ष्य मिटाने पर सात साल की कैद और बीस-बीस हजार रुपये के अर्थदंड का प्रावधान भी किया गया है। इस मामले की पैरवी शासकीय अधिवक्ता अभय त्रिपाठी और गोरख प्रसाद यादव ने की।