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हत्याकांड: प्रॉपर्टी, पार्टनरशिप और पैसा है वजह?

Sat, 17 Jan 2015 12:19 PM IST
Updated Sat, 17 Jan 2015 12:19 PM IST
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Murder conspiracy of BSP leader Dharmendra Chaudhary

सियासत में नया-नया कदम रखने वाले बसपा के अतरौली प्रत्याशी धर्मेंद्र चौधरी की हत्या का खुलासा पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है। बस एक ही सवाल आखिर क्यों और किसने? कहीं न कहीं जवाब एक ही आ रहा कि तीन साल में खड़ा किया गया इतना बड़ा कारोबार। यानि प्रापर्टी, पार्टनरशिप और पैसा।

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यही तीन बड़ी वजह हैं, जिनके सहारे पुलिस की पांच टीमें पांच अलग-अलग सवालों को लेकर मंथन और अध्ययन में जुट गई हैं। शनिवार को हुए बिल्डर एसोसिएशन एपीसोड को भी गंभीरता से देखा जा रहा है।
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पुलिस बस इस उम्मीद के सहारे पर्सनल से लेकर प्रोफेशनल लाइफ तक में कोशिश कर रही है कि शायद कोई क्लू मिल जाए।

कैसे हुई वारदात?

Murder conspiracy of BSP leader Dharmendra Chaudhary

क्या है घटनाक्रम
बात दोपहर करीब पौने तीन बजे की है। जब बिल्डर एसोसिएशन की बैठक में धर्मेंद्र चौधरी अपने पार्टनर राजेश अग्रवाल के साथ पहुंचे और वहां इस्तीफा देने के साथ तल्ख लजहों में अपनी बात कहकर चले आए। इसके कुछ घंटे बाद यानि साढ़े आठ बजे उनकी हत्या हो गई। हमलावरों को यह सटीक जानकारी थी कि वह सवा आठ बजे किशनपुर स्थित ग्लोबल रेजीडेंसी के ऑफिस से अकेले अपने ड्राइवर के साथ बारहद्वारी की ओर जा रहे हैं।

क्या हुआ पहले
सभी जानते हैं कि सितंबर 2011 में जेल जाने से पहले तक धर्मेंद्र चौधरी सिक्योरिटी एजेंसी चलाते थे और जब जेल से छूटे तो इसके बाद अचानक बड़े प्लेटफार्म के साथ उन्होंने राजेश अग्रवाल के साथ महानगर में सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी ग्लोबल रेजीडेंसी जैसे प्रोजेक्ट को लांच किया।

लांचिंग पार्टी को देख लोग दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हुए। मगर धीरे-धीरे पता चला कि शहर के तमाम नामी-गिरामी लोगों का पैसा इस प्रोजेक्ट में लगा है। इसके बाद धर्मेंद्र चौधरी का कैरियर परवान चढ़ता गया।

क्या हुआ पर्दे में?

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व्यापारिक पहलू पर बातचीत करें तो पुलिस जांच में सामने आ रहा है कि कयामपुर इलाके की किसी साढ़े पांच करोड़ की जमीन को लेकर धर्मेंद्र चौधरी का किसी से विवाद फंसा था। उस विवाद को निपटाने के लिए धर्मेंद्र पर दबाव था। मगर वह पीछे हटने को राजी न थे।

इसके अलावा एक अन्य प्रमुख बिल्डर व खुद धर्मेंद्र के पार्टनर से भी उनका विवाद हुआ। बाद में उस प्रमुख बिल्डर पर दुष्कर्म की कोशिश का मुकदमा गांधीपार्क में दर्ज कराया गया, जो अब समझौते के कगार पर आ गया। इसमें भी धर्मेंद्र की भूमिका जगजाहिर हुई। इसके अलावा किसी पार्टनर से 28 करोड़ों का विवाद भी चर्चाओं में है।

कुछ पुराने विवाद
धर्मेंद्र चौधरी की सिक्योरिटी एजेंसी में एक व्यक्ति से पार्टनरशिप थी। मगर दोनों में विवाद के बाद अलगाव हुआ। उसी व्यक्ति की शिकायत पर यूपी एसटीएफ ने उनके खिलाफ किसी धर्मेंद्र के नाम की मार्कशीट अपनाने का आरोप लगा और उन्हें व उनके पिता को गिरफ्तार कर सिविल लाइंस से जेल भेजा गया। यह मुकदमा अभी अदालत में विचाराधीन है और उसमें धर्मेंद्र के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी। इसके अलावा एक महिला से करीबी भी चर्चाओं में है।

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ड्राइवर के इर्द-गिर्द घूम रही कहानी

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पुलिस हिरासत में मौजूद धर्मेंद्र चौधरी के ड्राइवर संजय निवासी नगला तिकौना के इर्द-गिर्द काफी कुछ कहानी घूम रही है। पुलिस की एक टीम ड्राइवर को ही रडार पर लिए हुए है। उसके विषय में साफ हुआ है कि पहले वह चोरी के आरोप में भी जेल जा चुका है।

पुलिस के कुछ ऐसे सवाल हैं, जिनके वह जवाब नहीं दे पा रहा। पहला तो यह कि सवा आठ बजे जब वह धर्मेंद्र को लेकर चला तो सिक्योरिटी गार्ड क्यों नहीं थे।

अगर नहीं थे तो इसकी सूचना हमलावरों तक कैसे लीक हुई। अगर धर्मेंद्र की लोडेड पिस्टल संजय के पास थी तो गाड़ी से निकलकर भागने के बाद उसने चलाई क्यों नहीं। फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ में जुटी हुई है।

एसएसपी जे रंविदर गौड़ मे बताया कि बिल्डर धर्मेंद्र चौधरी के पिता की तहरीर पर अज्ञात में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पांच टीमों को अलग-अलग एंगल से जांच के लिए खुलासे में लगाया गया है। सभी पहलुओं को टटोला जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द घटना खुलेगी। रहा सवाल कारण तक पहुंचने का तो किसी एक कारण पर अभी स्पष्ट नहीं कहा जा सकता।

इस घटना के बाद पुलिस की एक टीम अलग से ऐसे शार्प शूटरों की सूची तैयार करने में जुट गई है, जो रुपये लेकर हत्याएं करते हैं। हर थाने से ऐसे शूटरों की सूची मांगी गई है। फिर पुलिस उनकी लोकेशन के अलावा उनकी गतिविधियों आदि पर काम शुरू करने जा रही है। कुछ मोबाइल नंबर भी सर्विलांस पर लिए गए हैं।

शरीर में पाए गए 18 गोलियां घुसने के छेद

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जिस बेरहमी से धर्मेंद्र चौधरी को मारा गया, उसे देख और सुन यही लगता है कि हमलावर मौत के घाट उतारने के इरादे से ही आए थे। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो एक गोली लगने के बाद दौड़ते धर्मेंद्र को पैर मारकर गिराया गया। फिर गोलियां मारी गईं। हमलावर इतने पर भी नहीं थमे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हमलावरों ने चौधरी के सिर पर पैर रखकर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। रविवार को दिन के उजाले में मोरचरी पर जब लाश का पंचनामा भरा गया तो कारतूसों के 18 एंट्री प्वाइंट पाए गए। मगर पोस्टमार्टम में डॉक्टर पांच कारतूस व एक कारतूस कैप ही बरामद कर सके।

प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो हमलावरों ने पहले ड्राइवर साइड से गाड़ी रुकवाई और एक गोली मारी। इसके बाद धर्मेंद्र की साइड से गोली चलाई। मगर धर्मेंद्र उतरकर भागने लगे तो सफेद स्कूटी पर सवार हमलावरों ने उन्हें दौड़ाकर गिराया। इसके बाद ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। रात को शरीर पर दस गोलियों के निशान देखने को मिले थे।

मगर दिन में पंचनामे में 18 छेद पाए गए। पोस्टमार्टम के दौरान शव को दीनदयाल अस्पताल एक्सरे के लिए भेजा गया। उसके बाद भी तीन डॉक्टरों का पैनल पांच कारतूस व एक कैप तलाश पाया। इसके बाद डॉक्टरों ने फिर से एक्सरे की बात कही। मगर पिता ने इंकार कर दिया। इस दौरान वीडियोग्राफी भी कराई गई।

हत्या के दूसरे दिन खुलकर बोले, धर्मेंद्र के पिता

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बिल्डर एसोसिएशन, पार्टनर, कर्मचारी इस हत्या में पहले नंबर पर शक में हैं। व्यापारिक रंजिश पहली बड़ी वजह है और राजनीतिक रंजिश दूसरे पायदान पर है।

ताबड़तोड़ फायरिंग में ड्राइवर का बचना और उसके खरोंच तक न आना भी बड़ा सवाल है। उसकी भूमिका सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में है। यह कतई संभव नहीं है कि उसकी मदद के बिना यह घटना हो जाती। यह कहना है धर्मेंद्र चौधरी के पिता चंद्रपाल सिंह का।

शनिवार को हुई घटना के बाद रविवार दोपहर उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि पिछले तीन साल से वह अपनी पत्नी गीता देवी के साथ गांव बड़ौदा में रह रहे हैं। उन्हें धर्मेंद्र के कारोबार या अन्य किसी से कोई ज्यादा लेना-देना नहीं रहता। हां, हर दिन बातचीत जरूर होती है।

शनिवार सुबह भी बेटे से उस समय बात हुई, जब वह लखनऊ से लौट रहा था। हालांकि उसे आना रविवार को था, मगर किन्हीं कारणों शनिवार को ही वापसी हो गई।

प्रत्याशी की हत्या से बसपा में उबाल

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महानगर के बारहद्वारी चौराहे के पास बसपा के अतरौली प्रत्याशी व ग्लोबल रेजीडेंसी के जेएमडी धर्मेंद्र चौधरी की शनिवार देर शाम हुई हत्या से बसपा में उबाल है। रविवार को पार्टी ने डीआईजी को राज्यपाल के नाम ज्ञापन देकर घटना के खुलासे के लिए तीन दिन का अल्टीमेटम दे दिया है।

इधर, इस हत्या के संबंध में पिता ने अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज कराते हुए किसी व्यापारिक रंजिश में हत्या का अंदेशा जताया है। रविवार को दिन भर चली पोस्टमार्टम प्रक्रिया के बाद शाम को शव परिजनों के सुपुर्द किया गया, जिसका नुमाइश मैदान स्थित शमशान गृह में अंतिम संस्कार किया गया।

हत्या के बाद रात को ही शव मोरचरी पर रखवा दिया गया था। जहां सुबह होते ही परिचितों, रिश्तेदारों व सियासी लोगों की भीड़ जुटने लगी। दोपहर में बसपा के जोन कोआर्डिनेटर सुनील चित्तौड़, पूर्व मंत्री ठा.जयवीर सिंह, रामवीर उपाध्याय, प्रताप सिंह बघेल, रणवीर कश्यप, सूरज सिंह, संघरत्न सेठी, अशोक प्रजापति, मंडल कोआर्डिनेटर सुरेश गौतम, मुकेश चंद्रा, गजराज विमल, जिलाध्यक्ष अरविंद आदित्य, उपेंद्र सिंह नीटू, बच्चू सिंह, मनोज सक्सेना, मो.सगीर आदि मोरचरी पहुंचे।

दिन भर रही भीड़, जिले भर का फोर्स लगा

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पोस्टमार्टम केंद्र पर सुबह सात बजे से ही लोगों का आना शुरू हो गया। मित्र, परिचित, रिश्तेदारों के अलावा सियासी लोग आ रहे थे। पुलिस प्रशासन भी किसी आशंका को लेकर पहले से सतर्क था।

इसके चलते मोरचरी पर क्वारसी, देहली गेट, गांधीपार्क, सासनी गेट, लोधा, जवां, गोंडा, बन्नादेवी थानों के फोर्स के अलावा पीएसी, सीओ द्वितीय, सीओ तृतीय को लगाया गया। खुद एडीएम सिटी, एसपी सिटी, एसपी ट्रैफिक, एएसपी पूरे समय मौजूद रहे। इसके अलावा धर्मेंद्र के कनक रेजेंसी स्थित घर पर एसओ गभाना की ड्यूटी लगाई गई।

शाम चार बजे शव पोस्टमार्टम के बाद घर ले जाया गया। जहां संस्कार की औपचारिकताओं के बाद नुमाइश मैदान पहुंचा। जहां धर्मेंद्र के बेटों दीपक व वैभव ने संयुक्त रूप से मुखाग्नि दी। शव के घर पहुंचने पर परिवार की महिलाओं का हाल बेहाल रहा।

करोड़ों के प्रोजेक्ट के साझेदार सकते में

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इस घटना के बाद सबसे ज्यादा परेशान करोड़ों की कीमत के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ग्लोबल के वह साझेदार सकते में हैं, जिनका रुपया धर्मेंद्र चौधरी के इशारे पर कंपनी में लगा हुआ था। उन्हें अपनी रकम के भविष्य को लेकर चिंता सता रही है। क्योंकि उनकी सभी डील धर्मेंद्र चौधरी को लेकर थी।

यही वजह है कि कहीं वह पुलिस जांच के दायरे में न आ जाएं, इसके चलते वह लोग खुद को पूरे एपीसोड से दूर रखे हुए हैं। रविवार को पूरे दिन मोरचरी पर और उनके घर पर ऐसे चेहरे नहीं दिखाई दिए, जो साझेदार या धर्मेंद्र के इशारे पर रकम लगाने वाले माने जाते हैं।

रीयल इस्टेट कारोबार में यह बात हर जुबान पर थी कि धर्मेंद्र चौधरी की जुबान पर इस कारोबार में शहर के तमाम नामचीन लोगों, सियासी हस्तियों, अधिकारी लॉबी आदि का रुपया लगा था। मगर रविवार को देखा गया कि ऐसे लोग खुद को हर चर्चा से दूर ही रखे हुए थे और पूरे मामले पर नजर रखे हुए थे।

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