3 युवकों की क्रूरतम तरीके से हत्या, बवाल
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मुजफ्फरनगर जिले के सिखेड़ा थाना क्षेत्र के बहादरपुर गांव में शनिवार देर रात तीन युवकों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। दो लाशें रात में जबकि तीसरी रविवार सुबह पुलिस सहायता केंद्र के पीछे मिली। तीनों के कपड़े उतारकर डंडों और धारदार हथियारों से मारा गया था।
तिहरे हत्याकांड की खबर फैलते ही ग्रामीण भड़क गए और पानीपत-खटीमा मार्ग पर जाम लगा दिया। मौके पर पहुंचे थानेदार को लोगों ने दौड़ा लिया। बाद में फोर्स के साथ पहुंचे अफसरों ने आश्रितों को मुआवजा और नौकरी की संस्तुति भेजने का आश्वासन देकर जाम खुलवाया।
सिखेड़ा के बहादरपुर निवासी सुरेंद्र कश्यप (35) पुत्र ईश्वर अपने भाई कंवरपाल के साथ जानसठ रोड स्थित गुलशन केमिकल में काम करता था। शनिवार रात करीब 8.30 बजे सुरेंद्र भाई का खाना लेकर फैक्ट्री जा रहा था, लेकिन नहीं लौटा। देर रात करीब 10.30 बजे कंवरपाल फैक्ट्री से लौटा तो भाई के लापता होने की जानकारी मिली। सुरेंद्र की तलाश शुरू की गई। रात करीब 11.30 बजे गांव से करीब 200 मीटर की दूरी पर टीटू के ईख के खेत में सड़क किनारे गांव के ही दलित सुंदर (32) पुत्र बिरमा की लाश मिली।
इसके बाद रात करीब एक बजे हितेंद्र के खेत में सुरेंद्र की भी लाश मिल गई। सुबह करीब पांच बजे गांव के मुख्य मार्ग पर पुलिस सहायता केंद्र के पीछे लाला निहालचंद के बाग से एक और युवक की लाश मिली। गांव के ही अंजू और उसके बेटे ऋतिक ने चप्पल, ताबीज और सामान से उसकी पहचान दलित कुंवरपाल के रूप में की। उसकी हत्या भी इसी तरीके से की गई थी।
कातिलों ने पार की क्रूरता की सारी हदें
मुजफ्फरनगर जिले के सिखेड़ा थाना क्षेत्र के गांव बहादरपुर के तीन युवकों की हत्या के दौरान कातिलों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। तीनों युवकों के कपड़े उतारने के बाद थर्ड डिग्री देते हुए उनके गुप्तांगों पर प्रहार किए। तीनों के सिर और चेहरों को कुचला गया था। एक युवक की आंखें भी फोड़ दी गईं। ग्रामीणों ने समुदाय विशेष के लोगों पर साइलेंट वार में हत्या करने का आरोप लगाया।
बहादरपुर निवासी दलित सुंदर, कुंवरपाल वाल्मीकि और सुरेंद्र कश्यप 32 से 35 वर्ष के थे। तीनों विवाहित थे और उनकी आमदनी का जरिया मेहनत-मजदूरी थी। गांव वालों के मुताबिक तीनों की न किसी से रंजिश थी और न ही उनसे कोई लूटपाट की गई। इसके बावजूद तीनों युवकों का बेरहमी से कत्ल कर दिया गया। हत्यारों ने तीनों कत्ल रात 8.30 से 9.30 बजे के बीच किए। मौके पर लाशों की स्थिति हत्यारों की दरिंदगी की कहानी कह रही थी।
देर रात एक बजे मिली सुरेंद्र और सुंदर की लाशें जिसने भी देखीं, वह कांप गया। तीनों की लाशें औंधे मुंह पड़ी थी और उनके अंतरंग वस्त्र उतरे हुए थे। उनके नाजुक अंगों, सिर और चेहरे पर डंडों एवं धारदार हथियारों से वार किए गए थे। एक युवक के चेहरे पर नुकीले हथियार से आंखों को फोड़ डालने के भी निशान थे। रविवार सुबह पुलिस सहायता केंद्र के पीछे मिली कुंवरपाल वाल्मीकि की लाश भी कमोवेश इसी हालात में थी, जिसे पुलिस बिना शिनाख्त कराए ही मौके पर मौजूद कुछ लोगों के विरोध के बावजूद जबरन जीप में डालकर ले गई।
घटनास्थल से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर दंगा पीड़ितों की बस्ती है। लाशों की स्थिति देख लोगों ने इसे साइलेंट वार से जोड़ते हुए आरोपियों की जल्द से जल्द गिरफ्तारी किए जाने की मांग की। हालांकि एसपी सिटी श्रवण कुमार ने सांप्रदायिक आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि फिलहाल हत्याओं का मोटिव प्रकाश में नहीं आया है। कई बिंदुओं पर जांच की जा रही है और बहुत जल्द आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
सुरेंद्र की तलाश में खुला ‘खूनी खेल’
भाई का खाना लेकर फैक्ट्री गए सुरेंद्र कश्यप के घर नहीं लौटने पर उसकी तलाश में निकले ग्रामीणों ने जंगल छाना तो खूनी कहानी से पर्दा उठा।
एक-एक कर तीन लाशें मिलीं। ग्रामीण जंगल नहीं पहुंचते तो दिन निकलने तक किसी को इस वारदात की भनक भी नहीं लगती। सिखेड़ा थाना क्षेत्र के बहादरपुर गांव निवासी कंवरपाल कश्यप के परिवार के कई सदस्य फैक्ट्री में काम करते हैं। शनिवार को तबीयत खराब होने के कारण सुरेंद्र फैक्ट्री नहीं गया था। शाम करीब सात बजे वह फैक्ट्री में काम करने वाले दूसरे भाई कंवरपाल का खाना पहुंचाने के लिए घर से निकला था।
रात साढ़े दस बजे कंवरपाल घर लौटा तो उसने परिजनों से खाना नहीं भिजवाने का कारण पूछा। परिजनों ने बताया कि खाना लेकर तो सुरेंद्र चला गया था। सुरेंद्र न तो फैक्ट्री पहुंचा था और न ही घर लौटा। इस पर मोहल्ले के लोग भी एकत्र हो गए। तलाशी के लिए सभी जंगल में निकले।
करीब एक घंटे तक जंगल की खाक छानने के बाद ग्रामीणों को गांव के निकट ही सुंदर की लाश मिली। पुलिस को जानकारी दी गई। थोड़ी देर बाद कुछ ही दूर सुरेंद्र की लाश मिली। हंगामे और विरोध के बीच रात के करीब तीन बजे पुलिस दोनों शवों को कब्जे में लेकर रवाना हो गई। करीब एक घंटे बाद पुलिस सहायता केंद्र के पीछे एक अन्य युवक की लाश मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई। सुरेंद्र की तलाश न की जाती तो दिन निकलने तक खूनी कहानी से पर्दा नहीं उठता।
तिहरे हत्याकांड में हैं कई अनसुलझे सवाल
तिहरे हत्याकांड की इस वारदात में गहरी साजिश भी है और कई अनसुलझे सवाल भी। मसलन कत्ल हुए, लेकिन इतनी बेरहमी क्यों? क्राइम सीन से यह तो साफ जाहिर है कि कातिलों का लूट का कोई इरादा नहीं था। जैसी हैवानियत की गई, उससे तो दुश्मनी की ओर इशारा है। बहरहाल, पुलिस का इस ब्लाइंड मर्डर केस में किसी नतीजे पर पहुंचना चमत्कार से कम नहीं होगा।
जानसठ हाईवे से बहादपुर को मुड़ने वाला रास्ता तीन हत्याओं की वारदात का गवाह है। कत्ल किसने किए, क्या मकसद था और इतनी क्रूरता क्यों बरती गई। ऐसे ही अनगिनत सवाल खड़े हैं। गांव से निकलते ही सबसे पहले सुंदर की लाश मिली। माना जा रहा है कि कातिल गांव की ओर से चले और पहला शिकार सुंदर ही बना। यहां से लगभग 500 मीटर आगे सुरेंद्र कश्यप कातिलों के हत्थे चढ़ा। तीसरा कत्ल हाईवे की पुलिस चौकी के ठीक पीछे हुआ। मृतक कुंवरपाल वाल्मीकि था। मौका ए वारदात इस ओर भी इशारा करते हैं कि कातिल तीन या चार से ज्यादा थे। जिसे भी दबोचा गया, उसे भागने का मौका नहीं दिया। कातिल इतने शार्प थे कि उनका वार किल प्वाइंट पर था। गर्दन, सिर और चेहरे को टारगेट कर वार किए गए। ऐसे में उनकी चीखें भी अंधेरी रात के जंगल में गूंजकर रह गईं। वारदात में लूट का मकसद नहीं है। मरने वाले तीनों मजदूर पेशा थे।
तीनों ही कत्ल में कोई समानता भी नहीं दिख रही। न तीनों साथ आए और न ही कोई दोस्ती थी। तीनों अलग-अलग वक्त पर पहुंचे और शिकार बनते गए। सवाल कई हैं। हत्याओं के पीछे लूट नहीं तो फिर वजह क्या है? तीनों के मोबाइल तक हत्यारे नहीं ले गए। जेब की रेजगारी भी ज्यों की त्यों थी। सुंदर की जेब से तो पोस्टमार्टम के वक्त आठ हजार रुपये भी निकले। यानी बदमाशों ने उनकी जेब को हाथ तक नहीं लगाया। उनका मकसद सिर्फ मौत के घाट उतारना था। वारदात दहशत फैलाने के इरादे से भी अंजाम दी जा सकती है। तीनों ही मृतकों के कपड़े खुले मिलना भी घटना को दूसरा रंग देने की साजिश हो सकती है। वारदात ऐसी जगह हुई है, जहां से महज कुछ ही दूरी पर दंगा पीड़ितों की बस्ती है।
डंडे और रॉड से हुई हत्याएं
तीनों हत्याओं में मोटे डंडे अथवा लोहे की रॉड का इस्तेमाल किया गया है। देर रात आई पीएम रिपोर्ट में तीनों के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं हैं। घटनास्थल के निकट स्थित बाग लोहे की चारपाई के टूटे पाइप मिले हैं, लेकिन उन पर खून के निशान नहीं हैं। वहीं कुंवरपाल की साइकिल भी बाग में पड़ी मिली। एसपी सिटी श्रवण कुमार के मुताबिक कुछ सुराग हाथ लगे हैं, जिन पर कई टीमों को लगाया गया है। रातभर की कार्रवाई में काफी कुछ स्पष्ट हो जाएगा।
घूमकर लौट आया डॉग
वारदात के बाद डॉग स्कवॉयड को भी मौका ए वारदात पर लाया गया। घटनास्थल पर डॉग को खून आलूदा मिट्टी और अन्य सामान सुंघाकर छोड़ा गया, लेकिन वह कुछ ही दूरी पर घूमकर वापस लौट आया।
तलाश में जुटी कई टीमें
हत्याकांड के खुलासे के लिए क्राइम ब्रांच प्रभारी सचिन मलिक, क्रिमिनल इंटेलीजेंस प्रभारी जसवीर सिरोही और सर्विलांस के देवसिंह रावत के नेतृत्व में टीमों को लगाया गया है। हालांकि देर रात तक लाख प्रयासों के बावजूद किसी भी तरह के सुराग पुलिस टीमों को नहीं मिल सके हैं।
ट्रिपल मर्डर : ढाई-ढाई लाख की तत्काल सहायता
बहादुरपुर के जंगल में हुई दिल दहला देने वाली हत्या के बाद शासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। शासन ने तत्काल सहायता के रूप में तीनों मृतकों के आश्रितों को ढाई-ढाई लाख के चेक रविवार शाम को दे दिए। संडे में ही ट्रेजरी खुलवाई गई और चेक तैयार कराए गए। एडीएम प्रशासन डॉ इंद्रमणि त्रिपाठी, तहसीलदार रजनीकांत के साथ रविवार शाम बहादरपुर पहुंचे और मृतकों के परिजनों को सहायता राशि सौंपी।
सुरेंद्र कश्यप को यह पैसा किसान दुर्घटना बीमा योजना के तहत दिया गया, जबकि सुंदर और कंवरपाल को अनुसूचित जाति अत्याचार उत्पीड़न के अंतर्गत यह रकम दी गई। एडीएम प्रशासन ने बताया कि बाकी सहायता राशि कुछ समय बाद दे दी जाएगी।
तीनों को मिलेंगे पांच-पांच लाख
मुजफ्फरनगर। जिन योजनाओं में प्रशासन मृतकों के परिजनों को पैसा दे रहा है, इनमें मृतक आश्रितों को पांच लाख रुपये मिलते हैं। किसान दुर्घटना बीमा योजना में सरकार पांच लाख रुपये देती है। इसी तरह अनुसूचित जाति अत्याचार उत्पीड़न में कमाऊ व्यक्ति के मरने पर पांच लाख और अन्य व्यक्ति के मरने पर ढाई लाख दिए जाते हैं। इस योजना में 75 प्रतिशत पैसा तत्काल और 25 प्रतिशत मुकदमा फाइनल होने पर मिलता है।