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बहादुर किशोरीः बच्चों को बचाने के लिए खुद को कराया किडनैप

Fri, 06 Dec 2013 12:34 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 06 Dec 2013 12:34 PM IST
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brave girl saved ten kids in assam

कहते हैं कि बहादुरी के लिए उम्र मोहताज नहीं होती। इसकी एक मिसाल पेश की है असम के शिवसागर जिले की रहने वाली 14 वर्षीय गुंजन शर्मा ने।

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गुंजन ने 10 स्कूली बच्चों की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी। दरअसल सिमलुगुड़ी में बुधवार को एक हथियारबंद अपहरणकर्ता स्कूली बच्चों को अगवा करने पहुंचा था। इस पर गुंजन ने उससे बच्चों को छोड़कर उसे अगवा करने को कहा। उस स्कूल वैन में कुल 11 बच्चे थे।
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अपहरणकर्ता उसे अपने साथ लेता गया, लेकिन उसने गुंजन को गुरुवार को असम-नागालैंड सीमा पर एक घने जंगल में छोड़ दिया। वह चाय बगान में काम करने वाले व्यक्ति के घर पहुंच गई। उसने पुलिस को सूचना दी।
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टीओआई के अनुसार, गुंजन ने बताया कि अपहरणकर्ता ने एक बच्ची को जैसे ही उठाया, वह रोने लगी। इस पर उसने खुद को अगवा करने की बात कही। वह उसका हाथ पकड़ कर जंगल की ओर लेकर चल दिया।

उसने बताया कि अपहरणकर्ता के साथ उसने एक नदी को पार किया। कुछ समय तक दोनों जंगल में चलते रहे और फिर एक जगह रुक गए। वहां काफी अंधेरा था, कुछ भी दिख नहीं रहा था। वह उस रात कुछ नहीं खाई। सुबह हुई तो वहां उसके सिवाय कोई नहीं था। वह वहां से एक गांव में आ गई। वहां लोगों ने पुलिस को सूचना दी और फिर वह घर पहुंची।


'घर पर ही सुरक्षित है'
डीएसपी विजय कलिंगम ने बताया कि जब उन्होंने गुंजन से बात की तो वह शांत थी। वह अपहरणकर्ता को अंकल संबोधित कर रही थी।

गुंजन के पिता शंकर ने कहा कि जब उसके अपहरण की खबर में मिली तो वह परेशान हो गए थे। हर बार यही सोचते कि अब उसे कभी स्कूल नहीं भेजना है। वह घर पर ही सुरक्षित है।

केंद्रीय विद्यालय से वैन में 11 बच्चे बुधवार को घर लौट रहे थे। तभी बीच रास्ते में अपहरणकर्ता धमक गया। उसने वैन को अपने कब्जे में ले लिया।

बच्चों को बचाने के लिए ड्राइवर ने वैन को एक जगह पर रोक दिया। इस पर अपहरणकर्ता ने सभी बच्चों को साथ चलने की धमकी दी। तभी गुजंन ने पहल की।

पुरस्कार
मुंख्यमंत्री तरूण गोगोई ने गुंजन को दो लाख रुपए का पुरस्कार देने की घोषणा की है। शिक्षा विभाग ने गुंजन को 25 हजार और ड्राइवर को 10 हजार का पुरस्कार देने की घोषणा की है।

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