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बदायूं गैंगरेप: यहां चलता है दबंगों का कानून

Sat, 31 May 2014 11:22 AM IST
संजीव पाठक/अमर उजाला, बदायूं
संजीव पाठक/अमर उजाला, बदायूं Updated Sat, 31 May 2014 11:22 AM IST
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Badaun gang-rape case

बदायूं के कटरी इलाके में पूरी तरह दबंगों का कानून चलता है। पुलिस भी उन्हीं का साथ देती है। एक बिरादरी सब पर इस कदर हावी है कि दूसरी जातियों के लोग कभी उनका विरोध नहीं कर पाते।

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इसका एक बड़ा कारण कटरी इलाके के थानों और चौकियों पर इस बिरादरी के स्टाफ की तैनाती है। पुलिस भी इन लोगों से बनाकर रखने में ही खुद को सुरक्षित मानती है।
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कटरा सआदतगंज के बाबूराम की मानें तो गरीब-गुरबों की फसल तक यह दबंग काट लेते हैं। इनके जानवर बिना किसी रोक-टोक के खुले चरते हैं। चाहे जिसकी फसल में घुस जाएं। उसे बर्बाद कर दें, मजाल है कोई इसके खिलाफ आवाज उठा दे।

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इन दबंगों के कारण खून का घूंट पीते है लोग

Badaun gang-rape case

दर्जी फूलसिंह ने तो इस बिरादरी की दबंगई के चलते अपना धंधा तक बंद कर दिया था। बोले, कपड़े सिलाने के बाद अगर पैसे मांग लिए तो समझो शामत आ गई। कोई दो साल पहले फूल सिंह ने गांव में अपनी टेलरिंग की दुकान बंद कर दी। अब वह दिल्ली में सिलाई का काम करते हैं।

पड़ोसी गांव भकरौली के बुजुर्ग सूबेदार से आसपास इलाके में अभियुक्तों की बिरादरी की दबंगई के बाबत पूछा तो बोले, साब यह समझ लो कि हम लोग यहां दांतों के बीच जीभ की तरह रहते हैं।

इलाके में यह कोई पहली घटना नहीं है। पहले भी बलात्कार की तमाम घटनाएं हुई हैं लेकिन कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। लोग थाने जाते हैं तो पुलिस डपटकर भगा देती है। ज्यादा पैरवी करते हैं तो दबंग जीने नहीं देते। लिहाजा लोग खून का घूंट पीकर रह जाते हैं।

दो किशोरियों से गैंगरेप, हत्या से चर्चा में गांव

Badaun gang-rape case

दो किशोरियों से सामूहिक दुराचार और फिर पेड़ से लटकाकर उन्हें मार डालने की वीभत्स घटना से चर्चा में आया कटरा सआदतगंज गांव गंगा किनारे बसा है। तकरीबन छह हजार की आबादी वाले इस गांव में पचास फीसदी भागीदारी मौर्य-शाक्य बिरादरी की है।

ज्यादातर लोग खेती-किसानी और छोटे-मोटे व्यापार से जुड़े हैं। बदअमनी और बदचलनी कभी इस गांव की फितरत में नहीं रही। वुजुर्ग बताते हैं कि अगर रात-बिरात कभी कोई घर से डंडा लेकर निकला भी तो कुत्ते के डर से।

कोई पांच साल पहले गांव में बाहर से आकर लोगों के बसने का सिलसिला शुरू हुआ तो फिर गांव की आबोहवा बिगड़ती चली गई। यह शर्मनाक दिन भी इस गांव को इन्हीं बाहरी लोगों की वजह से देखना पड़ा है।

गांव वालों पर रौब झाड़ना आदत थी इनकी

Badaun gang-rape case

इस घटना के मुख्य अभियुक्त पप्पू, अवधेश और उर्वेश यादव भी मूलरूप से कटरा सआदतगंज के रहने वाले नहीं हैं। कोई पांच साल पहले अभियुक्तों के पिता वीरे यादव परिवार के साथ यहां आकर बसे।

यह लोग मूल रूप से बादाम नगला (हुमायूं नगला) के रहने वाले थे। गंगा से गांव कट जाने पर कटरा सआदतगंज आकर बस गए। यह परिवार शुरू से ही दबंग रहा है। वीरे के लड़कों की पुलिस से दोस्ती गांठना और फिर गांव वालों पर रौब झाड़ना आदत में शुमार था।

वुजुर्ग दुर्गपाल बताते हैं कि जब से चौकी पर सिपाही सर्वेश यादव की तैनाती हुई थी तब से तो इस परिवार ने अति ही कर ली थी। दरअसल सर्वेश की इस परिवार से रिश्तेदारी थी, सो उसका ज्यादातर वक्त वीरे के घर ही बीतता था।

दबंगई से कोई खुलकर विरोध नहीं कर पाता

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उसके साथ चौकी स्टाफ के अन्य लोगों का भी आना-जाना लगा रहता था। पुलिस के इस संरक्षण ने वीरे के लड़कों की दबंगई को और बढ़ा दिया। गांव के सीधे-सादे लोगों को यह बात अखरती भी थी।

रामपाल के मुताबिक, गांव के बड़े-बुजुर्गों ने चार-छह बार वीरे को टोका भी। कहा, अपने लड़कों को संभालो। गांव का माहौल खराब न करें लेकिन वीरे ने कभी इस पर ध्यान नहीं दिया।

आरोपियों की दबंगई के चलते कभी कोई खुलकर इनका विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा सका। रामपाल कहते हैं कि गांव में ज्यादातर लोग खेती करते हैं। मौर्य बिरादरी के लोगों पर थोड़ी-थोड़ी काश्तकारी है। उनका मुख्य पेशा सब्जी-तरकारी पैदा करना और फिर बाजार में उसे बेचना है।

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