फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Crime Archives ›   Ahmedabad a favourite destination for criminals

पढ़िए, मोदी के गुजरात की खौफनाक सच्चाई

Thu, 12 Feb 2015 01:22 PM IST
Updated Thu, 12 Feb 2015 01:22 PM IST
विज्ञापन
Ahmedabad a favourite destination for criminals

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृहराज्य गुजरात में विकास और रोजगार के दावों के बीच एक ऐसी सच्चाई सामने आई है जिसे जानकर खुद मोदी भी हैरान रह जाएंगे। राज्य के सबसे बड़े शहर अहमदाबाद में कारोबार के लिए दुनियाभर के बिजनेसमैन आते हैं लेकिन इस शहर ने अपराधियों को भी खूब लुभाया है।

विज्ञापन


असम के ग्वाला गैंग, तमिलनाडु के टुक-टुक गैंग, बिहार के मोतिहारी गैंग, ठाणे का ईरान गैंग और यूपी के शार्प शूटरों के अलावा भी कई शातिर अपराधियों ने यहां हत्या, लूट, फिरौती समेत तमाम वारदातों को अंजाम दिया।
विज्ञापन


क्राइम ब्रांच की ओर से पहली बार किए गए ऐसे विश्लेषण में ये आंकड़े सामने आए हैं। आंकड़ों के मुताबिक अहमदाबाद में कारोबार के साथ अपराध का ग्राफ भी दिनोंदिन बढ़ा है और यह देश के खतरनाक शहरों में से एक बन चुका है।

विज्ञापन
विज्ञापन

ये गैंग बने पुलिस के लिए सिरदर्द

Ahmedabad a favourite destination for criminals

वर्ष 2014 में हुए अपराधों के आंकड़ों के मुताबिक, 1889 मामलों में शुरुआती जांच के दौरान पकड़े गए 50 फीसदी अपराधी दूसरे राज्यों से थे जबकि 24 फीसदी अहमदाबाद के बाहर के थे।

यूपी के कई गैंग अहमदाबाद में आतंक का पर्याय बन चुके हैं। चाहे वह शिवरंजनी क्रॉसिंग पर हितेश जावेरी हत्याकांड हो या फिर वेजलपुर में 18 लाख की लूट, हर जगह यूपी के अपराधियों ने वारदातों को अंजाम दिया। इनके अलावा असम और तमिलनाडु के गैंग छिनैती की घटनाओं में ज्यादा शामिल रहे।

ठाणे के एक गैंग ने अहमदाबाद में 'स्पेशल 26' की तर्ज पर वारदातों को अंजाम दिया जबकि एक विदेशी नागरिक साथ लेकर चलने वाले गैंग ने मुंबई में बैठकर शहर के कारोबारियों को निशाना बनाया। ये गैंग कारोबारियों से मोटी रकम वसूलते थे।

अपराधियों ने कैसे जमाया अड्डा?

Ahmedabad a favourite destination for criminals

आंकड़ों के मुताबिक, 60 फीसदी अपराधियों ने अहमदाबाद में ही किराए के घर लेकर अड्डा जमाया जबकि 59 फीसदी ने खुद को गुजरात का स्थाई निवासी बताकर सिमकार्ड भी ले लिए।

58 फीसदी घटनाओं में अपराधियों ने किसी भी स्थानीय व्यक्ति या अपराधी की मदद नहीं ली, ताकि वे कभी पकड़े न जाएं। 48 फीसदी मामलों में शहर से ही चिराए गए वाहनों को वारदात के लिए इस्तेमाल किया गया।

डीसीपी (क्राइम) हिमांशु शुक्ला के अनुसार, यह विश्लेषण अपराधियों के बदलते तरीकों को समझने के लिए कराया गया है, ताकि उन्हें रोकने के लिए नई रणनीति पर काम किया जा सके। इससे पुलिस की खामियां और अपराधों को भी समझने में मदद मिली है। पुलिस ने कई स्थानों को भी चिन्हित किया है जहां पीसीआर की निगरानी बढ़ाई जाएगी।

(टाइम्स ऑफ इंडिया से साभार)

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed