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रेप का आरोपी जेल में, पीड़िता का पता नहीं

Wed, 07 May 2014 05:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अलीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, अलीगढ़ Updated Wed, 07 May 2014 05:20 PM IST
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accused of rape In jail, the victim did not know

पिछले छह माह में अलीगढ़ पुलिस ने क्या-क्या खेल नहीं किए। अब अदालत में ऐसे ही एक खेल से पर्दा उठ रहा है। एनसीआर में एक रीयल स्टेट सोसाइटी के करोड़ों के महाघोटाले की मुखालफत कर रहे सोसाइटी से जुड़े व्यक्ति के खिलाफ महानगर के क्वारसी थाने में दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज हो गया।

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मगर वह दुष्कर्म किसके साथ हुआ, यह स्पष्ट होना बड़ा मुश्किल हो रहा है। पांच माह से जेल में निरुद्ध आरोपी की जमानत में जुटे अधिवक्ताओं ने जब भेद खोला तो अदालत भी दंग रह गई।
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मंगलवार को इस मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी। मगर किन्हीं कारणों से सुनवाई टल गई और अगली तारीख 9 मई मुकर्रर कर दी गई है।

क्या है दुष्कर्म ‘घोटाले’ का फ्लैशबैक

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क्वारसी थाने में मुकदमा अपराध संख्या 1350/2013 के तहत धारा 376, 506 के तहत संतोष भारद्वाज पुत्र आरपी चौबे निवासी ए 24/25 जवाहर पार्क खानपुर थाना नेव सराय दिल्ली के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ।

घटना 21 अक्तूबर 2013 शाम सात बजे की दिखाई गई, जिसमें किशन कुमार निवासी कुंवरनगर गांधीपार्क ने आरोप लगाया कि उसके सगे स्वर्गीय भाई की पत्नी यानि सगी भाभी उस दिन गंगा स्नान को गई थी।

वहां से ऑटो में लौटते समय अतरौली पर ऑटो खराब हो गया। तभी बाइक सवार एक युवक भाभी को लिफ्ट देकर अलीगढ़ तक लाया और क्वारसी के कयामपुर मोड़ पर उनके साथ दुष्कर्म किया और धमकाते हुए भाग गया।

ऐसे खुला दुष्कर्म ‘घोटाला’

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इस घटना के 15 घंटे बाद यानि 22 अक्तूबर को मुकदमा दर्ज कराते हुए उल्लेख किया कि दुबारा मौके पर जाने पर एक पर्स मिला, जिसमें आरोपी के विजिटिंग कार्ड व फोटो मिले, जिसके आधार पर उसे महिला ने पहचान लिया और नामजद मुकदमा दर्ज कराया गया।

इस मुकदमे को दर्ज कर पुलिस ने दिसंबर 2013 में आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। मुकदमे के विवेचक तत्कालीन इंस्पेक्टर क्वारसी मान सिंह यादव रहे।

जेल पहुंचने के बाद संतोष ने अदालत में अपनी पैरवी व जमानत के प्रयास शुरू किए। इसके लिए स्थानीय स्तर पर एक अधिवक्ता की मदद ली और बताया कि उसका अलीगढ़ से कोई नाता नहीं है और वादी पक्ष को किसी स्तर पर नहीं जानता।

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न तो कोई भाई मृत है और न कोई भाभी विधवा

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इस पर अधिवक्ता ने केश डायरी का अवलोकन कर कुछ बिंदुओं पर सवाल उठाए, जिनमें सबसे पहला सवाल था कि नियमानुसार इस मुकदमे में दुष्कर्म पीड़िता के कोर्ट में धारा 164 के तहत बयान दर्ज नहीं कराए गए।

दूसरा दुष्कर्म पीड़िता की चिकित्सकीय परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार 20 अक्तूबर से 22 अक्तूबर के मध्य उसके साथ दुष्कर्म होने के लक्षण ही नहीं मिल रहे हैं। इस पर अधिवक्ता ने प्रयास कर कुंवरनगर कॉलोनी में वादी और उसकी भाभी को तलाशा तो पता चला कि इस नाम पते का कोई व्यक्ति यहां नहीं रहता।

फिर भी खोज नहीं टली तो पता चला कि किशन कुमार नाम का वादी रावणटीला इलाके में रहता है। वह तीन भाई हैं और तीनों जीवित हैं। उसका न तो कोई भाई मृत है और न कोई भाभी विधवा है।

कॉल डिटेल को भी केस डायरी में नहीं लगाया

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साथ ही जिस नाम के मृत भाई-विधवा भाभी का उल्लेख है, उन नामों से किशन के परिवार में कोई सदस्य नहीं हैं।

इसके साक्ष्य के तौर पर वोटर लिस्ट, परिवार का वारिशान प्रमाण पत्र आदि अदालत में दाखिल किया है और अधिवक्ता ने किशन के रेलवे में नौकर भाई राजकुमार शर्मा से संपर्क किया तो वह मंगलवार को अदालत में जमानत याचिका की सुनवाई के समय उपस्थित हुए और शपथ पत्र के साथ कहकर गए कि किशन के हम तीन जीवित भाई हैं।

इसके अलावा हमारा कोई मृत भाई नहीं है। इसके अलावा बड़ा साक्ष्य यह भी है कि पुलिस ने संतोष के मोबाइलों की कॉल डिटेल निकलवाई, जिसमें लोकेशन दिल्ली की थी। इस कॉल डिटेल को भी केश डायरी में नहीं लगाया गया। अब अदालत ने जमानत पर सुनवाई के लिए 9 तारीख तय कर दी है।

मुकदमे की वजह

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अदालत को दिए गए साक्ष्यों में बताया गया है कि संतोष भारद्वाज दिल्ली में अपनी डिटेक्टिव एजेंसी चलाते हैं और वर्ल्ड एसोसिएशन फार स्माल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज नामक सोसाइटी व जीवन बीमा राष्ट्रीय सहकारी आवास समिति से भी जुड़े हैं।

इस सोसाइटी से जुड़े ज्ञानप्रकाश आदि पर करोड़ों के घोटाले के आरोपों को लेकर संतोष पैरवी कर रहे हैं। पूर्व में भी कड़कड़डूमा कोर्ट दिल्ली, एसएसपी गाजियाबाद, एसएसपी नोएडा आदि से शिकायत कर चुके हैं और कुछ मामले विचाराधीन हैं। इसी रंजिश के तहत उन्हें यहां फंसाया गया है।

अब जमानत आवेदन पर जब कोर्ट ने पुलिस से कमेंट मांगे तो जवाब आया है कि शुरू से हमने दुष्कर्म पीड़िता व वादी को देवर-भाभी कहा है। मगर अब जांच में पता चला है कि दोनों में करीबी रिश्ते हैं। इसलिए देवर-भाभी कहा गया है। मगर पता सही न होने या अन्य सवालों पर कोई जवाब नहीं दिया है।

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