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सामने थे आरोपी, गिरफ्तारी में लगे सात साल
धीरज बेनीवाल/दिल्ली
Updated Fri, 22 Nov 2013 07:40 AM IST
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नई दिल्ली के महिला की हत्या के आरोपियों को गिरफ्तार करने में पुलिस को सात साल लग गए, जबकि आरोपी उसकी आंखों के सामने थे।
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शाहदरा पुलिस ने आरोपियों को पहले संदिग्ध की सूची में रखा, लेकिन फिर क्लीन चिट दे दी। मामले की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई, लेकिन पुलिस की ढिलाई जारी रही।
जांच का आलम यह था कि नौ जांच अधिकारी बदले जाने के बाद भी आरोपी गिरफ्तार नहीं हुए। कोर्ट की फटकार के बाद क्राइम ब्रांच ने आरोपियों को अब गिरफ्तार किया है।
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कड़कड़डूमा अदालत की सीएमएम रविंद्र बेदी ने गिरफ्तार आरोपी प्रदीप बैंसला, अरुण कुमार उर्फ कल्लू और मूलचंद को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
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अदालत ने 15 अक्तूबर 2013 को क्राइम ब्रांच को फटकार लगाते हुए कहा था कि यह मामला वर्ष 2007 का है। अदालत ने पुलिस को कुछ खास बातों की जांच के लिए कहा था, लेकिन पुलिस ढिलाई बरत रही है।
अदालत ने नाराजगी जताते हुए क्राइम ब्रांच संयुक्त आयुक्त से रिपोर्ट तलब कर ली। इसके तुरंत बाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।
पेश मामला मंजू नामक शादीशुदा महिला की हत्या से जुड़ा है। मंजू का शव 24 सितंबर 2007 को शाहदरा इलाके में अंबेडकर कॉलेज के पीछे मिला था।
मंजू ने अपनी हत्या की आशंका जताते हुए पुलिस आयुक्त और महिला आयोग को शिकायत दी थी। मृतका की बहन लक्ष्मी ने अपने बयान में प्रदीप बैंसला का नाम लिया था।
पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता आरके चौधरी का आरोप है कि पुलिस ने सबूत होते हुए भी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया। बैंसला के कई जानकार पुलिस में बड़े पदों पर थे।
उनके संरक्षण के चलते ही उसे गिरफ्तार नहीं किया गया। पुलिस ने तीनों आरोपियों को संदिग्धों की सूची में डालकर कोर्ट में आरोप पत्र पेश किया था।
क्राइम ब्रांच ने भी क्लोजर रिपोर्ट दी थी। अदालत ने पुलिस की रिपोर्ट खारिज कर कई पहलुओं पर दोबारा जांच करने का निर्देश दिया था।