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साईं के पुलिस से लुका-छिपी के 58 दिन

Thu, 05 Dec 2013 03:19 PM IST
पुरुषोत्तम वर्मा/अमर उजाला, दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा/अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 05 Dec 2013 03:19 PM IST
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 58 days of absconding of narayan sai

दो बहनों से यौन उत्पीड़न के मामले में आरोपी नारायण साईं एक व्यक्ति से बात करने के लिए एक सिम कार्ड प्रयोग करता था। नारायण को जिससे बात करनी होती थी, वह उसे खुद फोन करता था। उसके पास किसी का फोन नहीं आता था।

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पुलिस के अनुसार, नारायण साईं के पास 27 सिम और छह मोबाइल फोन मिले हैं। इनमें से एक फोन खुला रखता था जबकि बाकी बंद रहते थे। नारायण के पास मिले सिम ज्यादातर रिलायंस कंपनी के हैं।
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नारायण साईं की कुकर्म कथा, पत्नी की जुबानी
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पुलिस के अनुसार, आसाराम के आश्रम से जुड़े एक व्यक्ति के चलते नारायण दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ा। यह व्यक्ति उसके चालक रमेश मल्होत्रा के संपर्क में था।

नारायण ने बताया कि पिता को बचाने के लिए वह पुलिस से छुप रहा था। उसकी योजना थी कि पहले उसके पिता की जमानत हो जाए, इसके बाद वह पुलिस के सामने सरेंडर कर देगा।

नारायण्ा साईं: प्रवचन से पाप की दुनिया तक!

पुलिस के अनुसार, नारायण ने पिता के केस से जुड़े मामले और वकीलों आदि से बात करने के लिए सिम ले रखे थे।

लुधियाना में सबसे ज्यादा दिन छुपा
नारायण सबसे ज्यादा करीब 40 दिन लुधियाना में छुपकर रहा। वह वहां पंकज अग्निहोत्री की गौशाला में रहा। दुष्कर्म का आरोप लगने के समय वह जयपुर में था।

वहां से वह यूपी के सीतापुर स्थित नीमकसी आश्रम, फिर आगरा, फरीदाबाद, दिल्ली स्थित रजोकरी आश्रम, हरिद्वार, मुंबई, बलसाड, अंबाला व लुधियाना आदि शहरों में भागता रहा। वह ज्यादातर आश्रम और गौशाला में छुपा।

छह लाख रुपए लेकर भागा था

अपराध शाखा के अनुसार, नारायण के खिलाफ जब सूरत की दो सगी बहनों ने दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया तो उस समय वह जयपुर में था। नारायण ने बताया कि जब वह जयपुर से भागा था, तब उसके पास छह लाख रुपए थे। उसके कब्जे से मिले 2.61 लाख रुपये उसी में से बचे हैं।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तारी के समय आरोपी ट्रैक सूट में था। पुलिस ने जब उसे गिरफ्तार किया तो उसकी दाढ़ी बढ़ी हुई थी और सिर पर साफा बंधा था। वह देखने में सिखों की तरह लग रहा था। जब वह आगरा और सीतापुर पहुंचा तो उसने दाढ़ी बनवा ली थी।


चुनाव की आड़ में आ रहा था राजधानी
पुलिस के अनुसार, नारायण दिल्ली में रहने से बचता था। उसको यहां एक वकील से मिलना था। उसने सोचा था कि पुलिस तो चुनाव में व्यस्त रहेगी और वह वकील से आसानी से मिल सकेगा। उसकी यह भी योजना था कि अगर वह राजधानी नहीं पहुंच पाया तो वकील को पानीपत के आसपास बुला लेगा।

नारायण को यह नहीं पता था कि अपराध शाखा की कई यूनिटों को चुनाव में नहीं लगाया गया है। पुलिस के अनुसार, ईको स्पोर्ट्स कार मेरठ के एक दीवान व्यवसायी की है। उनकी फैक्टरी के अलावा स्कूल व कॉलेज चलते हैं। व्यवसायी ने करीब आठ से दस दिन पहले नई गाड़ी खरीदकर नारायण को दी थी।

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