10 मिनट में 25.66 लाख लूट ले गए छह बदमाश
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यूपी के आगरा में खंदौली कस्बा के मुख्य बाजार स्थित बैंक ऑफ इंडिया की शाखा में शुक्रवार दोपहर पौने तीन बजे फिल्मी स्टाइल में डाका डाला गया। दो काली पल्सर बाइक पर आए छह बदमाश महज 10 मिनट में 25.66 लाख रुपये लूट ले गए। लंच के तुरंत बाद घुसे 20-22 साल के इन डकैतों ने पहले बैंक स्टाफ पर तमंचे ताने।
फिर वारदात से अनजान बाहर खड़े लोगों को अंदर बुलाकर उन्हें भी बंधक बना लिया। इसके बाद कैशियर से कैशियर रूम खुलवाकर रकम पिट्ठू बैग में भरी। जाते समय सीसीटीवी की मैनेजर के ऑफिस में लगी डीवीआर भी अपने साथ ले गए। सादाबाद की तरफ भागे बदमाशों के बहुत दूर चले जाने के बाद गार्ड श्याम सिंह ने अपनी बंदूक से हवा में फायर किया, तब आसपास के लोगों और पुलिस को घटना का पता चला।
चश्मदीदों ने बताया कि लंच के तुरंत बाद जैसे ही बैंक का गेट खुला, पांच बदमाश अंदर चले गए। उनके पास पिट्ठू बैग थे। एक बदमाश बाहर गेट पर खड़ा रहा। बैंक में ही एटीएम भी है। बाहर खड़े बदमाश ने एटीएम गार्ड रघुनाथ से कहा कि उसे मैनेजर ने बुलाया है। जैसे ही वह अंदर पहुंचा, उस पर तमंचा तान दिया।
इससे पहले ही बदमाशों ने मैनेजर रीना शर्मा, असिस्टेंट मैनेजर अंशू, कैशियर भारत राय यादव, क्लर्क गोल्डन कुमार समेत पूरे स्टाफ को तमंचों से कवर कर रखा था। बैंक के दूसरे गार्ड रघुनाथ से बंदूक छीनकर और उसके सिर पर तमंचे की बट मारकर उसे घायल कर दिया था। बाहर खड़े लोगों से एक बदमाश ने कहा कि लंच टाइम खत्म हो गया है, अंदर आ सकते हैं। एक -एक कर जैसे ही लोग अंदर जाते गए, बदमाश तमंचे तानकर उनके हाथ ऊपर खड़े करवाकर उन्हें एक साइड में खड़ा करते रहे।
इसी बीच एक बदमाश ने कैशियर से कैश रूम खुलवाया और अलमारी खुलवाकर उसमें रखे 25 लाख रुपये बैग में रखे। फिर कैशियर रूम से 65 हजार 920 रुपये लिए। यहां 27 लाख और रखे थे। ये लुटने से बच गए। 10 मिनट में पूरी वारदात अंजाम देने के बाद जाते समय एक बदमाश नेमैनेजर आफिस से सीसीटीवी की डीवीआर लेकर अपने बैग में रख ली। इसके बाद बदमाश बाइकों से चले गए।
बाद में डीआईजी लक्ष्मी सिंह, एसएसपी डा. प्रीतिंदर सिंह भी पहुंचे। बदमाशों की तलाश कराई गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। उधर, बैंक के सूत्रों ने बताया कि एक कैमरे में रिकार्डिंग चिप लगी है। इसमें बदमाशों के चेहरे कैद मिल सकते हैं। उधर, बैंक में बंधक रहे लोगों ने बताया कि बदमाश बुलंदशहर क्षेत्र की बोली बोल रहे थे।
पुलिस बैंक के बाहर और अंदर पड़ गया डाका
बैंक आफ इंडिया की जिस शाखा में डाका पड़ा है, वह बीच बाजार में है। बैंक के दायीं ओर भी दुकान हैं और बायीं तरफ भी। सामने ठेले वाले खड़े रहते हैं। पूरे दिन बैंक में भीड़भाड़ रहती है। इसके बावजूद दिनदहाड़े डाका पड़ गया। आस-पास के लोग यह जानकर तो और हैरान रह गए कि डकैती के दौरान संयोग से पुलिस न केवल बैंक के सामने से गुजरी, बल्कि एक पल के लिए रुककर बैंक की तरफ देखा भी। लेकिन शायद जरा भी अहसास नहीं हुआ कि अंदर इतनी बड़ी वारदात हो रही है।
बैंक एक कांप्लेक्स में फर्स्ट फ्लोर पर है। ग्राउंड फ्लोर केदुकानदारों को भी पता नहीं चला कि बैंक में वारदात हो रही है। बैंक के ठीक सामने खड़े ठेले वाले भी कुछ समझ नहीं पाए। सभी को जानकारी तब मिली जब गार्ड ने गोली चली। बदमाशों के जाने के काफी देर तक तो बैंक से कोई बाहर ही नहीं निकल रहा था। बाहर खड़े लोगों को भनक इसलिए नहीं लगी क्योंकि बदमाश पूरी तैयारी से आए थे।
पुलिस कुछ पल रुकने के बाद आगे बढ़ गई। करीब पांच मिनट बाद जब गार्ड ने गोली चलाई, तब पुलिस बैंक लौटी। बदमाशों का होमवर्क इतना तगड़ा था कि उन्हें इतना तक मालूम था कि सीसीटीवी का डीवीआर कहां लगा है? वे बैंक में लंच के तुरंत बाद इसलिए घुसे, क्योंकि तब बैंक में स्टाफ के सिवाय कोई और नहीं होता है। अगर बाहर खड़े ग्राहकों को अंदर नहीं बुलाते, तो वे लोग हंगामा कर सकते थे।
पुलिस की लापरवाही सामने आई
पुलिस भले ही इत्तफाक से बैंक के सामने गुजरी, लेकिन शुक्रवार को बैंक ड्यूटी पर सिपाही तक नहीं आया था। बैंक अधिकारियों ने बताया कि बैंक चेकिंग पर आने वाली पुलिस टीम शुक्रवार को नहीं आई थी। पुलिस अधिकारियों को यह बता दिया गया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि बैंक ड्यूटी वाली टीम पर गाज गिरनी तय है।
कैशियर की ‘लात’ से बचे 27 लाख
पुलिस को पहले बताया गया था कि डाका 52 लाख का पड़ा है। लेकिन थोड़ी देर बाद जब फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम पहुंची तो रकम 27 लाख कम हो गई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि 27 लाख कैशियर की अलमारी में रखे मिल गए। जब बदमाश कैशियर के पास पहुंचे तब 65 हजार रुपये टेबिल पर रखे थे।
बदमाश ने इन्हें उठाकर बैग में रख लिया। इसके ठीक नीचे खुली दराज में 27 लाख रखे थे। कैशियर भरत यादव ने बड़ी होशियारी से बदमाश के आते ही दराज में लात मार दी। यह बंद हो गई। इसके चलते बदमाश की उस पर नजर नहीं पड़ी। यह रकम लुटने से बच गई। हालांकि कैशियर के चेंबर में ही अलार्म सिस्टम भी लगा है। लेकिन डर के चलते वे इसका बटन नहीं दबा पाए।
थोड़ी देर में ही टूट गई ‘स्मार्ट कैमरे’ से बंधी उम्मीद
बदमाशों के प्लान में सीसीटीवी की डीवीआर को अपने साथ ले जाना शामिल था। उन्हें मालूम था कि इसके बगैर सीसीटीवी कैमरे किसी काम के नहीं। शायद इसीलिए उन्होंने चेहरे खुले रखे, क्योंकि कैमरे में कैद हो जाने का तो डर ही नहीं था। फिर भी पुलिस को उनकी पहचान होने की उम्मीद लग रही थी क्योंकि बैंक में मैनेजर ऑफिस के बाहर स्मार्ट कैमरा लगा है। इसकी रिकार्डिंग इसमें लगी चिप करती है।
पुलिस को यह चिप मिल गई। पुलिस अधिकारियों के चेहरे पर राहत साफ दिखाई देने लगी। लेकिन कंप्यूटर एक्सपर्ट ने इसे खोलने की कोशिश की तो पुलिस की उम्मीद को झटका लगा। यह काम नहीं कर रही थी। एक्सपर्ट ने बताया कि यह 15 फरवरी 2015 से बंद पड़ी है। तभी से यह कैमरा भी काम नहीं कर रहा। बैंक हर तीसरे महीने कैमरे चेक कराता है। रिपोर्ट में कैमरे ठीक हैं। लेकिन अब साफ हो गया कि बैंक ने सिर्फ रिपोर्ट लगाई, जांच नहीं कराई।
‘बंदूक दे रहे हैं, गोली मत चलाना’
बदमाशों ने गार्ड श्याम सिंह से उसकी लाइसेंसी बंदूक और कारतूस लूट लिए थे। लेकिन जाते समय लौटा गए। बोले, तेरी बंदूक हमारे किसी काम की नहीं, तुझे वापस दे रहे हैं, पर गोली मत चलाना। श्याम सिंह ने फायर तब किया, जब बदमाश बहुत दूर निकल गए।