2 साल, 100 पुलिस वाले और 11 शातिर अंदर
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चलती ट्रेन में वो आते और लोगों के कीमती मोबाइल फोन पर हाथ साफ कर देते। पूरे लंदन में फैला था उनका रैकेट। चोरी के मोबाइलों से उन्होंने करोड़ों के अवैध कारोबार को अंजाम दिया। लेकिन पुलिस की नजरों से ज्यादा दिन नहीं बच पाए। आखिरकार वो 11 अपने असल ठिकाने यानी सलाखों के पीछे पहुंच ही गए। हैरानी की बात है कि तस्वीर में ज्यादातर गुनहगार सिख समुदाय के मालूम होते हैं।
मामला ब्रिटेन के ईस्ट हैम का है। न्यूहैम रिकॉर्डर न्यूज साइट की खबर के मुताबिक साल 2013 में लंदन में सक्रिय मोबाइल चोर गैंग के खिलाफ पुलिस ने कमर कसी थी और करीब दो साल चली तफ्तीश ने उन 11 बदमाशों को कारागार का रास्ता दिखा दिया। अदालत से मिली कुल सजा को आंका जाए तो करीब 30 साल की कैद काटने के लिए गुनहगार हवालात की हवा खा रहे हैं।
मामले में शाबासी देनी होगी लंदन की पुलिस को, जिसने इस रैकेट का भंडाफोड़ करने के लिए 100 पुलिसवालों की टीम को लगा दिया। जिसकी गहन पड़ताल ने न सिर्फ गुनहगारों को सजा दिलाई बल्कि 50 करोड़ के गोरख धंधे पर लगाम भी लगा दी।
सीसीटीवी कैमरों से बच जाते थे लेकिन पुलिस से नहीं बच पाए
मोबाइल चोर गिरोह रेल नेटवर्क के अलावा व्यस्त और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में चलने वाले खचाखच वाहनों में वारदातों को अंजाम देता था।
ऐसे हालात में सीसीटीवी कैमरों की नजर भी बमुश्किल ही चोर और वारदातों पर पड़ती है। ऐसे में केस को सुलझाना पुलिस के लिए नाकों चने चबाने जैसा था।
पुलिस की मानें तो उसका सामना मामूली जेबकतरों या तुच्छ चोरों से नहीं था, बल्कि ऐसे लोगों से था जो मामूली लगने वाली चोरियों के जरिए बड़ी आपराधिक वारदातों को अंजाम दे रहे थे।
11 शातिरों की पूरी कहनी, पुलिस की जुबानी
पुलिस की मानें तो जब 100 पुलिस वालों की टीम इस हाई प्रोफाइल मोबाइल चोर गैंग की तहकीकात में लगी तो साउथैल स्थिक एक घर से भारी मात्रा में चोरी का साजो-सामान बरामद किया गया। इस घर में बदमाशों ने चोरी के सामान का बड़ा भंडार बना रखा था। जिससे हर दिन करीब 10 हजार पाउंड यानी करीब 10 लाख रुपए का अवैध कारोबार किया जा रहा था।
बाद में पुलिस ने 32 वारंट तैयार किए गए। निजी और आर्थिक संपत्तियों पर छापा मारा और 13 लोग पुलिस के हत्थे चढ़ गए। पुलिस ने इस दौरान करीब 1 करोड़ 39 लाख रुपए बरामद किए और 1 हजार चोरी के फोन को सीज कर दिए।
वहीं एक पते पर छापा मारने पर पुलिस को 23 हजार पाउंड यानी करीब 22 लाख रुपए मिले जो कई कमरों में छिपाकर रखे गए थे। बच्चों की जैकेट तक में रुपए छिपाए गए थे।
आखिरकार सारे सुबूत जुटाकर लंदन के ब्लैकफ्रियार्स क्राउन कोर्ट सभी आरोपियों को पेश किया गया और बीती जुलाई से दिसंबर के बीच चले महज दो ट्राइल में ही बदमाशों के गुनाहों का फैसला हो गया।
पुलिस के मुताबिक गुनहगारों में 20 से लेकर 55 साल तक की उम्र के लोग शामिल हैं। ज्यादातर गुनहगारों के नामों और वेशभूषा से वो सिख लगते हैं। सभी लंदन के नॉर्थहोल्ट, हाउंसलो, हैरो, ब्रेंटवुड, सुथौल और लेयटन के निवासी के तौर पर जाने जाते हैं।
कुछ अधिकारियों के मुताबिक गुनहगारों को मिली सजा से पुलिस महकमा गदगद है और सब ने तहे दिल से अदालत के फैसले से स्वागत किया है।