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सचिन का सपना ओलंपिक 2020 में मिलें 20 मेडल
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 10 Oct 2012 12:00 AM IST
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मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर देश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने तथा खेलों की दुनिया में छा जाने के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है। सचिन ने मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल तथा खेल मंत्री अजय माकन को इस बारे में एक पत्र भेजकर जरूरी कदम उठाने की मांग की है।
तेंदुलकर ने इस अभियान में सहयोग की पेशकश के साथ ही देश के सभी प्रमुख खिलाड़ियों को इससे जोड़ने का सुझाव दिया है। जल्द ही सचिन दोनों मंत्रियों से मिलकर इस योजना पर चर्चा भी करेंगे। सचिन ने कहा कि वह चाहते हैं 2020 के ओलंपिक में देश को करीब 20 मेडल मिलें।
सचिन ने अपने पत्र में पिछले दो ओलंपिक खेलों का जिक्र करते हुए कहा कि 119 करोड़ की आबादी वाले हमारे देश को मिल कर इन सपनों का पीछा करने की जरूरत है। उन्होंने देश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए वर्तमान पिरामिड सिस्टम की जगह त्रिस्तरीय व्यवस्था किए जाने का सुझाव दिया। पहले खेल व खिलाड़ियों के प्रति सम्मान, फिर खेल को जीवन का हिस्सा बनाना तथा अंत में ऐसे समर्पित संस्थान जहां प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रतिभा के रूप में निखारा जा सके।
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सचिन की तीन स्तरीय फार्मेट योजना
स्कूलों में खेल को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए जिससे बच्चों में हमारे हीरो रहे ध्यानचंद जैसे खिलाड़ियों तथा खेल के प्रति सम्मान की भावना बने। बच्चे भी उन जैसा बनना चाहें। उन्होंने खेल मंत्रालय द्वारा तत्काल दिल्ली में एक नेशनल स्पोर्ट्स म्यूजियम बनाने का सुझाव दिया है। सचिन ने कहा कि इससे हमारे नायक खिलाड़ियों की उपलब्धियों को अक्षुण्ण बनाया जा सकेगा। सचिन ने स्कूल स्तर पर खेलों को बढ़ावा देने के साथ जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया है।
सचिन ने खेलों की तैयारी के दूसरे क्रम में कॉलेज व विश्वविद्यालय स्तर पर अमेरिका की तर्ज पर व्यवस्था किए जाने का सुझाव दिया। उन्होंने कॉलेज व विश्वविद्यालों में खेल सुविधाओं को तय समय पर आम लोगों के लिए भी खोले जाने का सुझाव दिया है।
उन्होंने यूजीसी द्वारा खेलों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि एक साथ सभी संस्थाओं में खेल सुविधाओं को उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा इसलिए सरकार उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम तथा उत्तर-पूर्व पांच स्थानों पर संस्थाओं की स्थापना करे। बाद में इन संस्थाओं से फीडबैक के स्थान पर और स्थानों पर नए खेल संस्थान खोले जाएं। सचिन ने कहा कि उन्हें कुछ कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल संस्थान स्थापित करने में सहयोग का आश्वासन भी दिया है।
तीसरे चरण में सचिन ने ऐसे संस्थानों को स्थापित करने का सुझाव दिया है जो सिर्फ चैंपियन को तराशने का काम करें। इसके लिए उन्होंने अलग अलग खेलों के लिए विशेष सेंटर स्थापित करने पर जोर दिया है। यहां विश्वविद्यालय तथा कालेज स्तर से चुने गए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण दिए जाने का सुझाव है।
यही खिलाड़ी ओलंपिक 2020 में भारत के सपनों को पूरा करेंगे। सचिन ने इसके अलावा देश में एक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स साइंस की स्थापन पर भी जोर दिया है। यह खिलाड़ियों के इलाज के साथ ही उनके पुनर्वास आदि का भी काम करे।
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तेंदुलकर ने इस अभियान में सहयोग की पेशकश के साथ ही देश के सभी प्रमुख खिलाड़ियों को इससे जोड़ने का सुझाव दिया है। जल्द ही सचिन दोनों मंत्रियों से मिलकर इस योजना पर चर्चा भी करेंगे। सचिन ने कहा कि वह चाहते हैं 2020 के ओलंपिक में देश को करीब 20 मेडल मिलें।
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सचिन ने अपने पत्र में पिछले दो ओलंपिक खेलों का जिक्र करते हुए कहा कि 119 करोड़ की आबादी वाले हमारे देश को मिल कर इन सपनों का पीछा करने की जरूरत है। उन्होंने देश में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए वर्तमान पिरामिड सिस्टम की जगह त्रिस्तरीय व्यवस्था किए जाने का सुझाव दिया। पहले खेल व खिलाड़ियों के प्रति सम्मान, फिर खेल को जीवन का हिस्सा बनाना तथा अंत में ऐसे समर्पित संस्थान जहां प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रतिभा के रूप में निखारा जा सके।
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सचिन की तीन स्तरीय फार्मेट योजना
स्कूलों में खेल को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए जिससे बच्चों में हमारे हीरो रहे ध्यानचंद जैसे खिलाड़ियों तथा खेल के प्रति सम्मान की भावना बने। बच्चे भी उन जैसा बनना चाहें। उन्होंने खेल मंत्रालय द्वारा तत्काल दिल्ली में एक नेशनल स्पोर्ट्स म्यूजियम बनाने का सुझाव दिया है। सचिन ने कहा कि इससे हमारे नायक खिलाड़ियों की उपलब्धियों को अक्षुण्ण बनाया जा सकेगा। सचिन ने स्कूल स्तर पर खेलों को बढ़ावा देने के साथ जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया है।
सचिन ने खेलों की तैयारी के दूसरे क्रम में कॉलेज व विश्वविद्यालय स्तर पर अमेरिका की तर्ज पर व्यवस्था किए जाने का सुझाव दिया। उन्होंने कॉलेज व विश्वविद्यालों में खेल सुविधाओं को तय समय पर आम लोगों के लिए भी खोले जाने का सुझाव दिया है।
उन्होंने यूजीसी द्वारा खेलों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि एक साथ सभी संस्थाओं में खेल सुविधाओं को उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा इसलिए सरकार उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम तथा उत्तर-पूर्व पांच स्थानों पर संस्थाओं की स्थापना करे। बाद में इन संस्थाओं से फीडबैक के स्थान पर और स्थानों पर नए खेल संस्थान खोले जाएं। सचिन ने कहा कि उन्हें कुछ कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल संस्थान स्थापित करने में सहयोग का आश्वासन भी दिया है।
तीसरे चरण में सचिन ने ऐसे संस्थानों को स्थापित करने का सुझाव दिया है जो सिर्फ चैंपियन को तराशने का काम करें। इसके लिए उन्होंने अलग अलग खेलों के लिए विशेष सेंटर स्थापित करने पर जोर दिया है। यहां विश्वविद्यालय तथा कालेज स्तर से चुने गए प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण दिए जाने का सुझाव है।
यही खिलाड़ी ओलंपिक 2020 में भारत के सपनों को पूरा करेंगे। सचिन ने इसके अलावा देश में एक नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स साइंस की स्थापन पर भी जोर दिया है। यह खिलाड़ियों के इलाज के साथ ही उनके पुनर्वास आदि का भी काम करे।