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धोनी की कप्तानी पर उठे सवाल

Tue, 19 Aug 2014 10:13 AM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 19 Aug 2014 10:13 AM IST
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Questions raised on Dhoni captaincy

विदेश में खेले गए पिछले 17 टेस्ट मैचों में से 13 में हार। यह शर्मनाक रिकॉर्ड कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया का है जिसके बाद पूर्व दिग्गज ही नहीं बल्कि क्रिकेट प्रशंसक भी माही से टेस्ट कप्तानी छोड़ने की मांग करने लगे हैं।

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 2011 में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में लगातार आठ टेस्ट मैच हारने वाली भारतीय टीम ने जब चंद रोज पहले लॉर्ड्स में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी तो ऐसा लगा जैसे अब भारतीय टेस्ट क्रिकेट का चेहरा बदलने वाला है लेकिन यह जीत शायद एक तुक्का थी।
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इसके बाद भारतीय टीम फिर पुराने ढर्रे पर आ गई और इसका नतीजा इंग्लैंड के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में 3-1 से सामने आया। पिछले तीन टेस्ट मैचों में इंग्लैंड ने भारत को चौथे टेस्ट मैच में तीन और पांचवें टेस्ट मैच में सिर्फ ढाई दिन में घुटे टेकने पर मजबूर कर दिया। इससे पहले भारत को 2013-14 में दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड में भी शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था।
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धोनी के गलत फैसलों और खिलाड़ियों का गलत चयन तो पहले से ही विवादों में था, उस पर धोनी के तंज भरे बयानों ने क्रिकेट जगत को और ज्यादा चौंका दिया। इंग्लैंड के खिलाफ पांचवां टेस्ट मैच हारने के बाद जब धोनी से कप्तानी छोड़ने के बारे में कहा गया तो उन्होंने कहा, ‘आपने 2011 में भी मुझसे यही सवाल किया था। आपको इसके लिए इंतजार करना होगा और फिर देखिए कि क्या मैं इस हार का सामना करने के लिए मजबूत हूं या नहीं। आपको इसकी खबर मिल जाएगी।’

इसके बाद जब धोनी से पूछा गया कि कुछ खिलाड़ियों को भारत के टेस्ट भविष्य के रूप में टीम में चुना गया, क्या वे अपने टेस्ट क्रिकेट को मजबूत करने के लिए आईपीएल छोड़ सकते थे। इस पर धोनी का जवाब बेहद ही बेशर्मीं भरा था। धोनी ने कहा, ‘आईपीएल से ईर्ष्या मत करो।’

धोनी के इस रवैये से साफ पता चलता है कि विदेशी धरती पर भारतीय टीम कितना भी शर्मनाक प्रदर्शन क्यों न करे लेकिन उससे उनकी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता है। धोनी जानते हैं कि इस समय टीम में खेलने वाले सभी खिलाड़ी उनके रहमोकरम पर हैं और आईसीसी अध्यक्ष एन श्रीनिवासन के साथ उनके रिश्ते कितने मजबूत हैं यह भी जगजाहिर है।


ऐसे में न टीम के अंदर और न ही बीसीसीआई में किसी में इतनी हिम्मत है कि वह धोनी को कप्तानी से हटाने के बारे में आवाज बुलंद कर सके। धोनी के अलावा कोच डंकन फ्लेचर पर भी अंगुलियां उठ रही हैं। फ्लेचर इंग्लैंड की परिस्थितियों से भलीभांति परिचित है लेकिन इसके बावजूद भारतीय टीम का प्रदर्शन गर्त में जा रहा है, तो फिर ऐसे विदेशी कोच का क्या फायदा? अगर टीम में जल्द बदलाव के लिए कदम न उठाए गए तो आगामी ऑस्ट्रेलिया दौरे पर एक और शर्मनाक हार के लिए हमें तैयार रहना होगा।

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