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क्या सिर्फ हेलमेट खिलाड़ी की जान बचा सकता है?

Mon, 01 Dec 2014 09:11 AM IST
Updated Mon, 01 Dec 2014 09:11 AM IST
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Can helmet save life of player?

सिर पर बाउंसर लगने से ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर फ़िलिप ह्यूज़ की मौत से एक सवाल फिर खड़ा हो गया है कि क्या सचमुच हेलमेट से सुरक्षा मिलती है। क्रिकेट को आमतौर पर एक धीमे खेल के रूप में दिखाया जाता है जिसमें सक्रियता सिर्फ़ कुछ वक़्त के लिए ही रहती है।

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पढ़ें जस्टिन पार्किंसन का विश्लेषण
मगर ऊँचे दर्जे के बल्लेबाज़ को एक सख़्त बॉल के सामने खड़ा होना होता है, जिसका वज़न 155।9 से 163 ग्राम के बीच हो सकता है और जो कई बार तो 145 किमी/घंटा से भी तेज़ रफ़्तार से फेंकी जाती है।
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ह्यूज़ की मौत सिडनी के एक अस्पताल में इन्ड्यूस्ड कोमा में रखे जाने के दो दिन बाद हो गई। ह्यूज़ के सिर के पिछले हिस्से के बाईं ओर चोट लगी थी। साफ़ है कि इस हिस्से में हेलमेट की सुरक्षा नहीं थी, क्योंकि यह हेलमेट के ठीक नीचे था।
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हेलमेट की अनिवार्यता
अन्य खेलों के साथ क्रिकेट में भी सुरक्षात्मक प्रबंध बढ़े हैं और तुलनात्मक रूप से हाल ही में हेलमेट मानक बने हैं। मगर ये सुरक्षात्मक प्रबंध क्या उपकरणों को भारी किए बिना बेहतर हो सकते हैं? सिडनी विश्वविद्यालय में क्रिकेट बायोमैकेनिक्स रिसर्च के प्रमुख रेने फ़र्डिनेंड्स कहते हैं, "मुझे लगता है कि ऐसा बहुत कुछ है, जो किया जा सकता है। हेलमेट के बाहर के हिस्से को ढंकने के लिए सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं।"

हेलमेट पूरी सुरक्षा नहीं दे सकता

Can helmet save life of player?

फ़र्डिनेंड्स का ख्याल था कि मिश्रित फ़ोम या किसी अन्य पदार्थ से बनी सिर से चिपकी टोपी हेलमेट के नीचे पहनी जाए जो हेलमेट के ढकने के स्थान के बाहर तक रहे। एक शोध के अनुसार ऐसे पदार्थ बेसबॉल की चोट को 50 से 70 फ़ीसदी तक सोख लेते हैं। फ़र्डिनेंड्स कहते हैं कि इससे गतिशीलता पर भी असर नहीं पड़ता।

ह्यूज़ का हेलमेट बनाने वाली ब्रिटिश कंपनी मसूरी का कहना है कि उन्होंने कंपनी का नवीनतम मॉडल नहीं पहना था जो उस जगह पर भी 'अतिरिक्त सुरक्षा' देता है, जहां उन्हें बॉल लगी थी और इसके बावजूद 'सुविधाजनक गतिशीलता' प्रदान करता है।

हालांकि कंपनी का कहना है, "यह सिर और गर्दन का वह नाज़ुक हिस्सा है, जिसे हेलमेट पूरी सुरक्षा नहीं दे सकता क्योंकि बल्लेबाज़ को पूरी और उचित गतिशीलता चाहिए"।

हॉकी में हेलमेट

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साठ के दशक से ही ख़तरनाक़ समझे जाने वाले खेलों में हेलमेल को अनिवार्य बनाना शुरू कर दिया गया था। क्रिकेट उन कई खेलों में है, जहां हेलमेट का इस्तेमाल होता है।

स्वीडन ने 1963 में कई खिलाड़ियों को चोटें लगने के बाद 1963 में आइस हॉकी में हेलमेट ज़रूरी कर दिया था। अमरीका समेत अन्य देशों में भी 1979 में हेलमेट ज़रूरी कर दिया गया। चेहरे के सुरक्षा उपकरण 1970 में जोड़े गए और गले को बचाने वाले 1980 में।

हेलमेट अमरीकन फ़ुटबॉल, घुड़सवारी के खेलों, प्रतियोगी स्कीइंग और दूसरे कई खेलों- जिनमें रफ़्तार और हिंसात्मक शारीरिक संपर्क शामिल हो- में अनिवार्य है। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय शौकिया बॉक्सिंग एसोसिएशन ने पिछले साल पुरुषों की अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हेलमेट पर प्रतिबंध लगा दिया जिससे यह खेल के व्यावसायिक संस्करण के समान हो गया।

एसोसिएशन का कहना है कि इसके सुबूत हैं कि इससे दरअसल मस्तिष्काघात होने की आशंका कम हो जाती है, क्योंकि इससे प्रतियोगी ख़तरनाक बर्ताव कम करते हैं।

'बॉडीलाइन श्रृंखला'

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इंग्लैंड क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान माइक गैटिंग। इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेट कप्तान माइक गैटिंग की नाक वेस्ट इंडीज़ के मैल्कम मार्शल की एक तेज गेंद से 1986 में टूट गई थी।

वह कहते हैं, "दुख यह है कि फ़िल को गेंद उन बहुत कम जगहों में से एक में लगी, जहां उससे भारी नुक़सान हुआ, यह बहुत दुख की बात है।"

पिछले साल छपे एक शोध के अनुसार, लॉबोरो और कार्डिफ़ मेट्रोपॉलिटन विश्वविद्यालयों ने प्रथम श्रेणी क्रिकेटरों के हेलमेट पहनने के बावजूद घायल होने के 35 वीडियो का विश्लेषण किया। इनमें से ज़्यादातर को चोट फ़ेसगार्ड या हेलमेट के सिरे पर लगी या फिर बॉल उनके बीच निकल गई। ज़्यादातर खिलाड़ियों की हड्डियां टूट गईं, कट लगे या अंदरूनी चोट लगीं। डेनिस एमिस (पृष्ठभूमि में गैरीफ़ील्ड सोबर्स) की हेलमेट पहने हुए यह तस्वीर 1978 की है।

लेकिन छह (17 फ़ीसदी) चोटें बॉल के हेलमेट के पिछली ओर ढांचे पर लगने और दो (छह फ़ीसदी) अरक्षित गर्दन या सिर के पिछले हिस्से में लगीं। शोध के मुताबिक, इन क्षेत्रों में चोट से मस्तिष्काघात का अंदेशा रहता है। इससे अमरीका में बेसबॉल में बल्लेबाज़ों के सिरों पर असर को लेकर किए गए शोध निष्कर्षों की पुष्टि होती है।

मज़बूत हेलमेट बनाने चाहिए

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बर्मिंघम विश्वविद्यालय में ट्रॉमा न्यूरोसर्जरी के प्रोफ़ेसर अंटोनिया बेली कहते हैं, "हमें तकनीकी रूप से जितना संभव हो, उतने मज़बूत हेलमेट बनाने चाहिए।" "पर हमें यह मानना होगा कि क्रिकेट और अन्य खेलों, जिनमें ठोस वस्तुएं या शारीरिक संपर्क होता है, वहां हमेशा अजीब दुर्घटनाएं होती रहेंगी। फ़िलिप ह्यूज़ से साथ हुई दुर्घटना को इसी श्रेणी में रखना चाहूंगा।"

"जितने घंटे क्रिकेट खेला जाता है, उसके हिसाब से इसे तुलनात्मक रूप से मस्तिष्काघात के लिए सुरक्षित खेल माना जाता है।" पर सिर पर चोट लंबे वक़्त से चिंता का विषय रही हैं। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच 1932 की कथित 'बॉडीलाइन' श्रृंखला के दौरान ऑस्ट्रेलिया के बर्ट ओल्डफ़ील्ड की खोपड़ी एक बाउंसर से टूट गई थी।

ऐसे मामलों के बाद शरीर को निशाना बनाकर की जाने वाली शॉर्ट-पिच गेंदों को लेकर बहुत हंगामा मचा। अगली गर्मियों में मिडलसेक्स और इंग्लैंड के बल्लेबाज़ पैट्सी हेनड्रेन ने वेस्टइंडीज़ के खिलाफ़ खेलते हुए लॉर्ड्स के मैदान में एक सुरक्षात्मक टोपी पहनी, जो उनकी पत्नी ने बनाई थी।

यह शिकारियों की टोपी जैसी थी। इसके तीन कोने थे जिनमें से दो कान और कनपटी को ढंकते थे और जिनकी किनारियों पर स्पंज रबर लगी थी। मगर असली क्रिकेट हेलमेटों का विकास मुख्यतः पिछले 40 साल में हुआ है।

'पहले से बेहतर'

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भारत के सुनील गावस्कर ने अपने सिर का सुरक्षा कवच खुद तैयार किया था। हालांकि उन्होंने हेलमेट न पहनने का फ़ैसला किया। साल 2009 में उन्होंने कहा, "मुझे रात को सोने से पहले पढ़ने की आदत है और अक्सर मैं पढ़ते हुए ही सो जाता हूं। इसके चलते मेरी गर्दन की मांसपेशियां कमज़ोर हो गईं और मुझे डर लगा कि (अगर मैं हेलमेट पहनूंगा तो) बाउंसर के आगे मेरी प्रतिक्रिया धीमी पड़ जाएगी।"

क्रिकेट इतिहासकार गिडियन हेग के अनुसार, जब ऑस्ट्रेलिया के डेविड हुक्स का जबड़ा वेस्टइंडीज़ के तेज गेंदबाज़ एंडी रॉबर्ट्स की गेंद से टूटा तो सत्तर के दशक के उत्तरार्द्ध में हेलमेट मशरूम की तरह बाज़ार में छा गए। ऑस्ट्रेलिया के खब्बू बल्लेबाज़ ग्राहम येलोप को तब विरोध का सामना करना पड़ा, जब उन्होंने 1978 में बारबाडोस में पहली बार पूरा हेलमेट पहना।

यह एक संशोधित मोटरसाइकिल हेलमेट था, जिसमें एक प्लास्टिक वाइज़र भी था। उसी समय विश्वकप में इंग्लैंड के डेनिस एमिस ने उसी प्रकार का हेलमेट पहना, जिसमें ग्रिल लगी थी।

18 साल के क्रिकेटरों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य

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आजकल प्रथम श्रेणी के खिलाड़ी किसी मध्यम या तेज़ गति के गेंदबाज़ का सामना करते हुए सामान्यतः हेलमेट पहनते हैं। ब्रिटेन में 18 साल के क्रिकेटरों के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य है, चाहे बॉलिंग की गति कोई भी हो। आधुनिक हेलमेट बॉल लगने पर टेढ़े होकर या पिचककर चोट को सोख लेते हैं। इसके लिए उनके अंदरूनी और बाहरी हिस्सों के बीच फ़ोम भरा रहता है।

इंग्लैंग के ऑल राउंडर स्टुअर्ट ब्रॉड को भारत के हालिया दौरे में हेलमेट के कोने और ग्रिल के बीच से निकलकर एक बॉल जा लगी, जिससे उनकी नाक में चोट लगी। फ़र्डिनेंड कहते हैं इस क्षेत्र में काम करने की ज़रूरत है, हालांकि बल्लेबाज़ के लिए ज़्यादा से ज़्यादा दृश्यता बनाए रखना भी ज़रूरी है। वह कहते हैं, "अब हेलमेट डिज़ाइन पहले के मुकाबले कई गुना बेहतर हैं, लेकिन यह विकास प्रक्रिया का एक हिस्सा हैं। हमें अब अगला क़दम उठाने की ज़रूरत है"।

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