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मां ने लाडले को धनुष के लिए सौंप दी थी सारी जमा पूंजी

Sat, 27 Sep 2014 11:15 PM IST
एजेंसी/इंचियोन
एजेंसी/इंचियोन Updated Sat, 27 Sep 2014 11:15 PM IST
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Mother gave all her savings to bow to abhishek

यह वह पल था जब किसी भी खिलाड़ी की आंखों में खुशी के आंसू होंगे, लेकिन दिल्ली का यह तीरंदाज साल 2005 के उस लम्हे को याद कर रहा था जब उन्हें मॉडल टाउन के सरकारी स्कूल में तीरंदाजी शुरू किए हुए दो साल हुए थे।

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वह मां के पास गए और बोले उन्हें आधुनिक धनुष चाहिए। इसके बिना तीरंदाजी संभव नहीं है। यह उनकी मां सुनीता वर्मा ही थीं जिन्होंने भविष्य के लिए जोड़ी गई इकलौती एफडी को तुड़वाकर बेटे के हाथ में 80 हजार रुपये रख दिए।
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सच्चाई यह है कि 15 साल पहले अभिषेक जब समझदार हुए तभी उनके पिता को मानसिक बीमारी ने घेर लिया। नौबत यहां तक आ गई कि घर में रोटी के लाले पड़ गए।

मजबूरन उनकी मां को अपने भाई दिनेश वर्मा की शरण लेनी पड़ी, लेकिन मां ने अभिषेक के तीरंदाजी कैरियर से कोई खिलवाड़ नहीं किया और इंचियोन में गोल्ड और सिल्वर के रूप में उसका परिणाम सभी के सामने है।
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2013 की एशियाई चैंपियनशिप के गोल्ड मेडलिस्ट अभिषेक खुलासा करते हैं कि पिता अब ठीक हैं, लेकिन अब भी कुछ नहीं करते हैं। यह तो तीरंदाजी की बदौलत उनकी बीते वर्ष इनकम टैक्स में नौकरी लगी तब जाकर सब ठीक हुआ।

अब हालात बिल्कुल सामान्य हैं लेकिन मां के संघर्ष को वह नहीं भूल सकते हैं। उन 80 हजार रुपयों ने उनकी जिंदगी बदल दी। अगर उस वक्त मां पैसे नहीं देतीं जो उन्होंने बचाकर रखे थे तो शायद वह तीरंदाजी जारी नहीं रख पाते।

इसी साल अर्जुन अवॉर्ड जीतने वाले अभिषेक कहते हैं कि दरअसल पहले वह रिकर्व तीरंदाजी करते थे लेकिन इसी साल में उन्होंने कंपाउंड तीरंदाजी शुरू करने का निर्णय लिया था और इसके लिए उन्हें नया धनुष चाहिए था। अभिषेक  ने व्यक्तिगत फाइनल के वक्त अपने कोच लोकेश भी काफी मिस किया।


फेल हुए, पिता ने डांटा तो अपना ली तीरंदाजी
अभिषेक के साथ टीम में जयपुर के रजत चौहान भी थे। रजत नौवीं कक्षा में फेल हुए तो पिता ने उन्हें बेहद डांटा और कहा कि तू पढ़ाई कर चुका अब जाकर कुछ काम देख।

रजत ने साइकिल उठाई सवाई मान सिंह स्टेडियम की ओर चल पड़े। रजत बताते हैं कि उन्होंने सोचा जो भी पहला ग्राउंड दिखेगा वहीं खेल शुरू कर देंगे।

पहला ग्राउंड तीरंदाजी का था और और इसी खेल को उन्होंने अपना कैरियर बनाया।

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