रिकॉर्ड है अच्छा तो मिलेगा 10 साल तक के लिए कर्ज
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निर्यातकों को अपनी निर्यात जरूरतों के लिए अब बैंकों से लंबी अवधि के लिए कर्ज मिल सकेगा। अच्छा रिकॉर्ड रखने वाले निर्यातक 10 साल की अवधि तक का कर्ज ले सकेंगे। अभी यह सुविधा एक साल की अवधि के लिए मिलती थी।
रिजर्व बैंक के अनुसार बैंक उन्हीं निर्यातकों को लंबी अवधि के लिए कर्ज दे सकेंगे, जिनका पिछले तीन साल में भुगतान का रिकॉर्ड संतोषजनक रहा है। बैंक इसके तहत कर्ज की राशि भविष्य में होने वाले निर्यात के तहत समाहित कर सकेंगे।
किन नियमों को मानना होगा जरूरी?
बुधवार को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों को जारी निर्देश के मुताबिक इस तरह के कर्ज पर बैंक ब्याज दर लिबोर (लंदन इंटरबैंक ऑफर्ड रेट) से 2 फीसदी से ज्यादा नहीं ले सकेंगे।
निर्यातक को कर्ज देते समय बैंक एंटी मनीलांड्रिग और केवाईसी नियमों का भी पूर्ण पालन करेंगे। रिजर्व बैंक के अनुसार निर्यातकों को यह कर्ज रुपये में लिए गए कर्ज को समाप्त करने के लिए नहीं दिया जाएगा, जो कि गैर निष्पादित संपत्ति के रूप में शामिल हो गया है।
10 करोड़ के कर्ज की जानकारी देगी होगी
इसी तरह निर्यात आर्डर को पूरा करने के लिए वर्किंग कैपिटल पर दोबारा भी कर्ज बैंक नहीं दे सकेंगे। यदि निर्यातक को 10 करोड़ डॉलर से ज्यादा कर्ज मिलता है, तो उसे लेन-देन की जानकारी आरबीआई को तुरंत देनी होगी।
इसके अलावा, रिजर्व बैंक ने बैंकों से कहा है कि लंबी अवधि का कर्ज देते समय वह इस बात का भी ध्यान रखें कि जिस निर्यातक को कर्ज दिया जा रहा है, उसे प्रवर्तन निदेशालय या दूसरे किसी नियामक से किसी तरह का नोटिस नहीं मिला हो।