फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   Business archives ›   Will free trade agreement negotiations with Germany: PM

मुक्त व्यापार समझौते पर होगी जर्मनी से बातचीत: पीएम

Mon, 08 Apr 2013 08:29 PM IST
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली/अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 08 Apr 2013 08:29 PM IST
विज्ञापन
Will free trade agreement negotiations with Germany: PM

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के जर्मनी दौरे के दौरान भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा।

विज्ञापन


इसके अलावा दोनों देश आपसी संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के कदमों पर चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री तीन दिवसीय यात्रा पर बर्लिन के लिए 10 अप्रैल को रवाना होंगे।
विज्ञापन


पीएम की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच शिक्षा, विज्ञान प्रौद्योगिकी, व्यावसायिक प्रशिक्षण, ऊर्जा आदि क्षेत्रों में कई समझौते होने की उम्मीद है।   
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रधानमंत्री बर्लिन में भारत-जर्मनी के बीच दो साल में एक बार होने वाले शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे। प्रधानमंत्री जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल के साथ यूरोपियन यूनियन (ईयू) के साथ मुक्त व्यापार संबंधी मामले को भी उठाएंगे।

इस यात्रा का मकसद जर्मनी को यह आश्वासन देना है कि भारत ने पिछले कुछ सालों में आर्थिक सुधार के कारगर कदम उठाएं हैं और यहां का माहौल निवेश के लिए अनुकूल है।

जर्मनी ईयू का प्रमुख सदस्य है और उसका मानना है भारत, यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते की बातचीत बहुत लंबी खिंच गई है। वह चाहता है कि यह समझौता शीघ्र हो।

जर्मनी एक मात्र ऐसा देश है जिसका भारत के साथ इस स्तर की बातचीत का करार है। जर्मनी के साथ अंतर सरकारी स्तर की यह दूसरी वार्ता है। पहली बातचीत 2010 में हुई थी।

अक्षय ऊर्जा, विज्ञान व तकनीक, उद्योग व व्यापार, विदेश, कपड़ा और भू विज्ञान मंत्री प्रधानमंत्री के साथ जा रहे हैं। विदेश सचिव रंजन मथाई ने उम्मीद जताई है कि जर्मन सरकार इस बातचीत में हुए करारों को अमली जामा पहनाने में तत्परता दिखाएगी।


भारत और जर्मनी अपने राजनयिक रिश्तों की 60वीं सालगिरह भी मना रहे हैं। यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला जर्मनी ईयू में भारत का सबसे पड़ा व्यापारिक साझेदार है। इस लिहाज से प्रधानमंत्री की यह यात्रा काफी अहम मानी जा रही है।

दूसरे विश्वयुद्ध के बाद भारत उन पहले देशों में से एक था जिसने जर्मनी के साथ स्टेट ऑफ वार को खत्म कर 1951 में ही राजनयिक रिश्ता कायम किया था।

उसके बाद से जर्मनी के साथ भारत के रिश्तों में लगातार प्रगाढ़ता आई है। यह साल जर्मनी में भारत का साल मनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री बर्लिन में 12 अप्रैल को इस महोत्सव का समापन भी करेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed