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इस खास कारण से आम बजट के साथ पेश नहीं किया जाता है रेल बजट

Sun, 28 Feb 2016 01:23 PM IST
Updated Sun, 28 Feb 2016 01:23 PM IST
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Why Rail And Union Budget Presented Seperate From Union Budget

25 फरवरी को रेल बजट पेश हो चुका है और 29 फरवरी को आम बजट पेश होना है। ऐसे में हर किसी के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि आखिर रेल बजट आम बजट से अलग क्यों पेश किया जाता है। आइए जानते हैं इसका कारण।

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1921 में ब्रिटिश रेलवे अर्थशास्त्री विलिमय एक्वर्थ को इंडियन रेवले कमेटी का चेयरमैन बनाया गया, जिसके बाद एक्वर्थ ने पाया कि रेलवे सिस्टम में बेहतर मैनेजमेंट की जरूरत है।
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कमेटी की तरफ से रेलवे को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की गई, जिसे एक्वर्थ रिपोर्ट कहा गया। इस रिपोर्ट में रेलवे के पुनर्संगठन के बारे में कुछ बिंदुओं पर सुझाव दिए गए।
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इन सुझावों को ध्यान में रखते हुए 1924 में रेलवे को आम बजट से अलग करने का निर्णय लिया गया। अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही ये प्रक्रिया आज भी लागू है और रेल बजट आम बजट से अलग पेश किया जाता है।

70% थी रेल बजट की हिस्सेदारी

Why Rail And Union Budget Presented Seperate From Union Budget

आपको बता दें कि जिस समय रेल बजट को आम बजट से अलग किया गया उस समय आम बजट में इसकी हिस्सेदारी 70 प्रतिशत की थी।

बजट में रेलवे की इतनी बड़ी हिस्सेदारी के चलते ही इसे आम बजट से अलग करने का निर्णय लिया गया है। तभी से रेल बजट को आम बजट से अलग पेश किया जाता है।

जब रेल बजट को आम बजट से अलग किया गया था, उस समय रेलवे का प्रयोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट में 75 फीसदी और माल ढुलाई में 90 फीसदी तक होता था।

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