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ये हैं पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की असल वजह

Mon, 01 Dec 2014 10:59 AM IST
Updated Mon, 01 Dec 2014 10:59 AM IST
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why petrol and diesel price down, know?

जून 2014 और जुलाई 2014 के बीच में ब्रैंट क्रूड (ऑयल) की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर थी। पर धीरे-धीरे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत कम होने लगी।

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अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमत कम होने की वजह अमेरिका, यूरोप और चीन में ब्रैंट क्रूड की मांग में कमी आना था। अमेरिका, चीन और यूरोप के देशों ने अपने यहां ही क्रूड ऑयल का उत्पादन शुरू कर दिया।
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इससे ऑर्गनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज(ओपेक)देशों के ब्रैंट क्रूड ऑयल की मांग कम हो गई। इसका नतीजा यह हुआ कि ओपेक देशों के सदस्य देशों कुवैत और इराक ने क्रूड ऑयल पर भारी डिस्काउंट देना शुरू कर दिया। इसके चलते दूसरे देशों को सस्ता ब्रैंट क्रूड मिलने लगा। भारत भी खाड़ी देशों से भारी मात्रा में क्रूड ऑयल का आयात करता है। इसका सीधा फायदा भारत के लोगों को मिलने लगा है।
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जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए वर्ष 2005 तक 60 फीसदी क्रूड ऑयल का आयात करता था। वर्ष 2013 तक अमेरिका ने यह आयात घटाकर 35 फीसदी कर दिया है।

कितना सस्ता हुआ तेल?

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अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ब्रैंट क्रूड की कीमत 1 अगस्‍त 2014 को 103.45 डॉलर प्रति बैरल थी। 22 अगस्त को यह कीमत घटकर 100.99 डॉलर प्रति बैरल हो गई।

अक्टूबर 2014 में ब्रैंट क्रूड की कीमत 88.66 डॉलर, 3 नवंबर को यह कीमत 84.9 डॉलर, 27 नवंबर को 72.68 डॉलर और 28 नवंबर को यह कीमत घटकर 72.58 डॉलर प्रति बैरल हो गई। एक बैरल में 158.98 लीटर तेल होता है। वर्ष 2013-14 के आकड़ों के मुताबिक भारत प्रति दिन 385,000 बैरल तेल का आयात करता है।

तेल की मांग कम होने के बावजूद ओपेक देशों ने यह फैसला किया है कि वह तेल का उत्पादन नहीं घटाएंगे। तेल की कीमतें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कम होने से भारत मे थोक महंगाई दर से खुदरा महंगाई दर में कमी देखने को मिली है। अंतर्राष्ट्रीय जगत में तेल की कीमत कम होने के चलते भारत की तेल विपणन कंपनियों को घाटा भी कम हु‌आ है।

सरकार के बचेंगे करोड़ों रुपए

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मई 2014 में जहां भारत की तेल विपणन कंपनियों का घाटा 318 करोड़ रुपए था। नवंबर 2014 में वह घटकर 188 रुपए के स्तर पर आ गया है। आने वाली 2 दिसंबर को भारतीय रिजर्व बैंक पर भी इसका असर दिख सकता है। कीमतों में कमी आने से भारतीय रिजर्व बैंक 2 दिसंबर को मौद्रिक नीति में बैंक दरों में कटौती कर सकता है।

अगर तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आती हैं तो सरकार को बड़ी राहत मिल सकती है। सरकार को अपना वित्तीय घाटा कम करने में भी मदद मिलेगी।

आपको बताते चले कि केंद्र सरकार ने अपने बजट 2014-15 में ऑयल सब्सिडी पर 63,427 करोड़ रुपए का आवंटन किया है। आने वाले समय में इसका फायदा भी सरकार को मिलेगा। क्योंकि तेल की कीमत कम होने से सरकार को सब्सिडी में बचत होगी।

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