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इंफोसिस में इसलिए लौटे नारायण मूर्ति!
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Mon, 03 Jun 2013 01:06 PM IST
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एन आर नारायण मूर्ति दो साल बाद जब एग्जिक्यूटिव भूमिका में इंफोसिस लौटे, तो बाजार ने झूमकर इस कदम का स्वागत किया। लगातार पिटाई खा रहा इंफोसिस का शेयर सोमवार के शुरुआती कारोबारी सत्र में 9 फीसदी की लंबी छलांग लगा गया।
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जाहिर है इंफोसिस के निवेशकों ने मूर्ति के लौटने की खबर को हाथोंहाथ लिया। 10,000 रुपए से शुरुआत करने से लेकर इस कंपनी को आईटी सेक्टर का सिरमौर बनाने तक का श्रेय उन्हीं को जाता है।
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लेकिन सवाल उठता है कि आखिर मूर्ति को लौटने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या उनके अलावा कोई नहीं था जो यह जिम्मेदारी संभाल सकता था?
दरअसल, इंफोसिस की हालत इन दिनों बेहद खराब है। चौथी तिमाही में उसका मुनाफा 44.4 करोड़ डॉलर लुढ़का और कारोबारी साल 2013-14 को लेकर भी कुछ खास संभावनाएं नहीं दिख रही।
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उस वक्त कंपनी ने इसके लिए आईटी इंडस्ट्री के सामने खड़ी अनिश्चितता को जिम्मेदार ठहराया। लेकिन हकीकत यह है कि इन्हीं हालात में टीसीएस और दूसरी आईटी कंपनियां इंफोसिस से बढ़िया प्रदर्शन करने में कामयाब रही हैं। इन पांच वजहों से मूर्ति को लौटना पड़ाः
इंफोसिस अब शीर्ष पर नहीं
इंफोसिस को किसी वक्त 100 अरब डॉलर वाली आईटी इंडस्ट्री का सरताज माना जाता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है। तिमाही दर तिमाही उसका मुनाफा गिर रहा है और शेयर पिट रहा है।
ग्रोथ पर सवाल
पिछली कुछ तिमाहियों से इंफोसिस अपने प्रतिद्वंद्वी से कमजोर साबित हुई है। कारोबारी साल 2013 में वह केवल 6.6 फीसदी की दर से बढ़ी, जबकि उद्योग ने 12-14 फीसदी का अनुमान लगा रखा था।
निवेशकों का भरोसा डिगा
निवेशक भी परेशान हैं, क्योंकि कंपनी ने लगातार दूसरे साल अपने गाइडेंस से कमजोर प्रदर्शन किया है। नतीजों के एलान के दिन इंफोसिस के शेयरों में 21 फीसदी गिरावट दर्ज की गई थी।
कर्मचारियों का हौसला भी डगमगाया
टैलेंट बनाए रखने के लिए ईसॉप लॉन्च करने वाली इंफोसिस को अपने कर्मचारियों को बनाए रखने में काफी दिक्कतें पेश आ रही हैं और एट्रीशन रेट मार्च तिमाही में बढ़कर 10 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
मैनेजमेंट का रुख
निवेशकों का कहना है कि इंफोसिस मैनेजमेंट का रुख काफी रक्षात्मक है। उसे अधिग्रहण्ा करने चाहिए, लेकिन वह अपने मोटे कैश का सही इस्तेमाल नहीं कर रही। मूर्ति के लौटने के बाद इस मोर्चे पर भी स्थिति साफ होगी।