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आखिर क्यों नहीं खरीद रहे हैं लोग घर, टीवी और फ्रिज?

Thu, 09 Oct 2014 09:21 AM IST
Updated Thu, 09 Oct 2014 09:21 AM IST
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why indian people are taking loan for home and consumer products?

त्योहारों का मौसम चरम पर है, लेकिन अभी भी ‘अच्छे दिनों’ की तरह घर, टीवी, फ्रिज, वाहनों की मांग भी रफ्तार पकड़ती नहीं आ रही है।

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ताजा आंकड़ों के मुताबिक सभी प्रमुख सेगमेंट में पिछले साल के मुकाबले या तो कर्ज में बढ़ोतरी की रफ्तार घटी है या फिर फ्लैट रही है। ऐसे में में साफ है कि ऊंची ब्याज दरों की वजह से लोग कर्ज लेने से बच रहे है। जो कि घर, वाहन आदि खरीदने का प्रमुख जरिया होता है।

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक साल 2014 में मार्च से अगस्त तक पर्सनल लोन सेगमेंट के तहत लिए गए कर्ज की मांग में केवल 4.1 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल अगस्त में यह 6.6 फीसदी की दर से बढ़ी थी। इसके तहत आरबीआई होम लोन, वाहन लोन और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन को प्रमुख रूप से शामिल करता है।
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होम लोन की रफ्तार सुस्त

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मार्च से अगस्त के दौरान होम लोन की मांग को देखा जाए, तो यह साल 2014 में 6.2 फीसदी की दर से बढ़ी थी, जबकि साल 2013 में यह 9 फीसदी थी।

अगस्त 2014 तक कुल 5,743 अरब रुपये का कर्ज होम लोन के लिए लिया गया है। होम लोन की मांग उम्मीद के मुताबिक न आने पर पंजाब नेशनल बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अभी निवेशक घर खरीदने के लिए नहीं आ रहे हैं।

साथ ही ऊंची ब्याज दरों की वजह से लोग कर्ज सस्ता होने का भी इंतजार कर रहे हैं। इससे भी मांग उम्मीद के मुताबिक इंडस्ट्री में नहीं है।

भले ही कार, दुपहिया सहित दूसरी वाहन कंपनियां और बैंक ढेर सारे डिस्काउंट और ऑफर दे रहे हैं, लेकिन उसके मुताबिक अभी तक मांग नहीं आई है।

टीवी, फ्रिज की मांग सुस्त

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वाहन लोन में वृद्धि मार्च से अगस्त तक फ्लैट रही है। इस अवधि में साल 2014 के दौरान यह 5.7 फीसदी बढ़ी, जो कि साल 2013 में भी 5.7 फीसदी ही बढ़ी थी। आरबीआई के मुताबिक इस साल अगस्त में 1,379 अरब रुपये का वाहन लोन दिया गया है।

त्योहारों में खरीदारी के प्रमुख उत्पादों से एक फ्लैट टीवी, रेफ्रीजरेटर, एसी आदि भी कर्ज के जरिए कम खरीदे जा रहे हैं, जबकि कंपनियां जीरो बैलेंस डाउन पेमेंट से लेकर, गिफ्ट आदि के ऑफर दे रही हैं।

आरबीआई के अनुसार मार्च से अगस्त 2014 की अवधि में कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन 10.7 फीसदी की दर से बढ़ा है, जबकि साल 2013 में यह 12.3 फीसदी की दर से बढ़ा था।

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