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क्यों पड़ी भारती और वालमार्ट के बीच दरार?

Thu, 10 Oct 2013 11:47 AM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 10 Oct 2013 11:47 AM IST
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why bharti and wallmart split own business

जिस साझेदारी से भारत में रिटेल क्षेत्र के कायापलट की उम्मीद थी, उस पर पूर्णविराम लग चुका है। वालमार्ट जैसे दिग्गज रिटेलरों को लुभाने के लिए ही सरकार ने रिटेल क्षेत्र में एफडीआई की राह खोली थी। लेकिन भारती समूह और वालमार्ट की साझेदारी टूटने के पीछे एफडीआई नीतियों की खामियों को भी बड़ी वजह माना जा रहा है। इस अलगाव की पृष्ठभूमि तैयार करने में इन मुद्दों का बड़ा हाथ रहा।

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साझेदारी पर विवादों का साया
अमेरिका में वालमार्ट को अपने कारोबारी विस्तार के लिए लॉबिंग और घूस के आरोपों का सामाना करना पड़ रहा है। कंपनी पर भारतीय बाजार में प्रवेश के लिए लॉबिंग के आरोप लगे, जिसके बाद भारती-वालमार्ट के सीईओ राज जैन को हटना पड़ा। दुनिया भर में इस तरह आरोपों की आसर वालमार्ट की योजनाओं पर पड़ा। अक्टूबर, 2012 के बाद भारती-वालमार्ट ने भारत में कोई नया स्टोर नहीं खोला। इसके अलावा भारती समूह में वालमार्ट के निवेश भी सवालों के घेरे में रहा है।
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एफडीआई नीति की खामियां
गत सितंबर में मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई की राह खोलने के बावजूद अभी तक किसी विदेशी रिटेलर ने मल्टीब्रांड क्षेत्र में एंट्री नहीं की है। भारती और वालमार्ट ने होलसेल स्टोर के लिए साझेदारी की लेकिन यह आगे नहीं बढ़ी। 30 फीसदी स्थानीय खरीद और बुनियादी ढांचे जैसी पाबंदियों के चलते रिटेलर निवेश करने से हिचक रहे हैं।
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भारत में रिटेल क्षेत्र की चुनौतियां: वालमार्ट जैसी रिटेलर छोटे किराना दुकानदारों के अस्तित्व पर खतरा माने जा रहे थे, लेकिन हुआ इसके उलट। सुभिक्षा जैसे कई घरेलू रिटेल कंपनियां बाजार में नहीं टिक पाई। भारतीय बाजार की चुनौतियों को देखते हुए वालमार्ट ने अभी तक मल्टीब्रांड रिटेल में कदम नहीं रखा है।

हालांकि, होलसेल में भारती के साथ इसकी साझेदारी छह साल से चल रही थी। इन चुनौतियों ने विदेशी ही नहीं बल्कि देसी रिटेलरों को भी अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया है।

पढ़े-जुदा हो गईं भारती-वॉलमार्ट की राहें

भारती समूह की वित्तीय स्थिति
जानकारों का मानना है कि खुद भारती समूह भी टेलीकॉम क्षेत्र में ही खुद का मजबूत करना चाहता है।

वालमार्ट इंडिया के पूर्व प्रमुख बने भारती के सलाहकार
नई दिल्ली। वालमार्ट के साथ कैश एंड कैरी कारोबार से अलग होने के बाद भारती ग्रुप ने वालमार्ट इंडिया के पूर्व प्रमुख राज जैन को अपना समूह सलाहकार बनाया है। भारती के प्रवक्ता ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि जैन की नियुक्ति जल्द ही प्रभावी हो जाएगी। वह अभी इस बारे में इससे ज्यादा नहीं बता सकते हैं।

लॉबिंग के आरोपों से भी घिरी वालमार्ट
अमेरिकी सीनेट को दी गई लॉबिंग की जानकारी ने भारत में वालमार्ट की कार्यप्रणाली पर विवाद खड़ा कर दिया था। वालमार्ट ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि उसने भारत सहित दुनिया के दूसरे देशों में लॉबिंग के लिए करीब 25 मिलियन डॉलर की राशि चार वर्षों में खर्च की है।


मामला तूल पकड़ने के बाद भारत सरकार ने जनवरी में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायधीश मुकुल मुदगल की अध्यक्षता में एक सदस्य वाले समिति का गठन किया था। इस जांच में कॉरपोरेट अफेयर मंत्रालय, प्रवर्तन निदेशालय और डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी और प्रमोशन (डीआईपीपी) भी अपने स्तर पर समिति को सहयोग दे रहे थे।

समिति प्रमुख रूप से इस बात की जांच कर रही थी कि समझौते के जरिए किन भारतीय कानूनों का उल्लंघन किया गया। मुदगल समिति ने अपनी रिपोर्ट मई में कॉरपोरेट अफेयर मंत्रालय को सौंप दी थी। सूत्रों के अनुसार समिति को जांच में वालमार्ट के खिलाफ बहुत पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं।

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